काम ना आई भगवान की कसम! गोवा में कांग्रेस के 11 में से 10 विधायक भाजपा में हो सकते हैं शामिल

पणजी,

महाराष्‍ट्र के बाद अब पड़ोसी राज्‍य गोवा में राजनीत‍िक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार गोवा में कांग्रेस एक बार फिर टूट के कगार पर है। बताया जा रहा क‍ि राज्‍य में कांग्रेस के 11 में से 10 विधायक सत्‍ताधारी दल यानी बीजेपी (BJP) में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव दलबदल को रोकने की कोशिशों में जुटे हैं। लेकिन उनकी कोश‍िश सफल होती नहीं दिख रही। सबसे बड़ी बात तो यह क‍ि राज्‍य में इसी साल विधानसभा चुनाव हुए थे। बीजेपी ने 40 में 20 सीटों पर जीत दर्ज की और तीन निर्दलीय विधायकों की मदद से सरकार बनाई। चुनाव से पहले दलबदल के डर से कांग्रेस ने पार्टी उम्मीदवारों को ईश्वर के सामने शपथ दिलाई दी थी कि वे निर्वाचित होने के बाद पाला नहीं बदलेंगे। हालांक‍ि कांग्रेस ने इन खबरों का खंडन किया है क‍ि उनका कोई विधायक बीजेपी ज्‍वाइन कर रहा।

गोवा में कांग्रेस के इस समय 11 विधायक हैं। खबरों की मानें तो इनमें से 10 अब भाजपा में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो पार्टी का टूटना लगभग तय है। क्‍योंक‍ि इतनी संख्‍या में पाला बदलने वाले विधायकों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो सकती। एक राजनीतिक दल को किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय करने की अनुमति है। शर्त इतनी है कि उस दल के न्यनूतम दो तिहाई जनप्रतिनिधि विलय के पक्ष में हों। ऐसी स्थिति में जनप्रतिनिधियों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा और न ही राजनीतिक दल पर। ऐसे में कांग्रेस चाहकर भी जाने वाले विधायकों पर कार्रवाई नहीं कर पाएगी।

कांग्रेस का खंडन, लेकिन नहीं पहुंचे 7 विधायक!
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया क‍ि शनिवार को विधानसभा सत्र से पहले कांग्रेस ने पार्टी के सभी विधायकों की मीटिंग बुलाई थी। लेकिन इस बैठक में 7 विधायक पहुंचे ही नहीं। इसी बैठक में कांग्रेस ने पार्टी के भीतर किसी भी दरार से इनकार किया। गोवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित पाटकर ने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा इस तरह की अफवाहें फैला रही है क‍ि हमारे विधायक उनकी पार्टी में जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, दिगंबर कामत जो इस साल की हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी थे, शनिवार को विधायकों की बैठक में शामिल नहीं हुए।

पूर्व सीएम कामत भी ज्‍वाइन कर सकते हैं बीजेपी
सूत्रों की मानें तो गोवा के पूर्व सीएम दिगंबर कामत और विपक्ष के नेता माइकल लोबो के बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस के विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर हमारे सहयोगी टीओआई को बताया क‍ि ‘हम कभी भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं और हम भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान का इंतजार कर रहे हैं। किसी विशेष पद या कैबिनेट बर्थ के लिए कोई वादा नहीं किया गया है।’

उधर कुछ खबरों में बताया जा रहा क‍ि कांग्रेस को कोलकाता में भी बड़ा झटका लग सकता है। सूत्रों के अनुसार पार्टी के 3 मौजूदा और 3 पूर्व सांसद टीएमसी के संपर्क हैं। हालांकि कामत और लोबो दोनों ने इस बात से इनकार किया कि वे भाजपा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि अयोग्यता से बचने के लिए सामूहिक रूप से भाजपा में जाने का फैसला किया गया है। दरअसल गोवा के 40 सदस्यीय सदन में, कांग्रेस के पास 11 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 20 और एमजीपी के 2 सदस्य और तीन निर्दलीय हैं।

सूत्रों ने कहा कि भाजपा की राज्य इकाई कांग्रेस के विधायकों को पार्टी में शामिल करने को लेकर बहुत इच्छुक नहीं है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ऐसा माना जा रहा है क्योंकि यहां भाजपा 2019 में दक्षिण गोवा सीट कांग्रेस से हार गई थी। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सदानंद शेत तनावडे ने टीओआई को बताया कि मुझे केंद्रीय नेतृत्व से इस बात को लेकर कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिला है।

वफादारी की कसम काम ना आई?
अगर कांग्रेस के विधायक पार्टी छोड़ते हैं तो वे वफादारी की उस कसम को भी तोड़ेंगे जो उन्‍हें चुनाव से पहले पार्टी ने दिलवाई थी। गोवा विधानसभा चुनाव 2022 से पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अपने सभी उम्‍मीदवारों को वफादारी की कसमें दिलवाई थी। दलबदल से परेशान कांग्रेस ने पार्टी उम्मीदवारों को ईश्वर के सामने शपथ दिलाई थी क‍ि वे निर्वाचित होने के बाद पाला नहीं बदलेंगे। आम आदमी पार्टी ने भी ऐसा ही किया था। लेकिन ये जुगत भी फेल होते दिख रही।

आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2017 में राज्य की 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस को 17 सीटों पर जीत मिली थी और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। लेकिन 2022 का चुनाव आते-आते सदन में पार्टी के महज दो विधायक ही बचे। 2019 में कांग्रेस के 10 विधायक सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए थे। 2017 में बीजेपी के खाते में 13 सीटें आई थी। कांग्रेस से पिछड़ने के बाद भी बीजेपी गोवा में सरकार बनाने में सफल रही थी। कांग्रेस के 12 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था।

गोवा में पिछले पांच सालों में 60 प्रतिशत विधायक बदल चुके हैं पार्टी
गोवा में बीते पांच साल में लगभग 24 विधायक एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थाम चुके हैं जो 40 सदस्यीय राज्य विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या का 60 प्रतिशत है। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा किसी राज्‍य में नहीं हुआ है। पिछले विधानसभा (2017-2022) के पांच साल के कार्यकाल के दौरान लगभग 24 विधायकों ने दल बदला था। 24 में से 10 विधायक कांग्रेस के थे। महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के भी कई विधायक इधर से उधर हुए।

महाराष्ट्र में विधायकों के पाला बदलने से गिर गई थी उद्धव सरकार
बता दें कि महाराष्ट्र में हाल ही में शिवसेना के विधायकों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद उद्धव सरकार गिर गई थी. उद्धव खेमे के विधायकों ने एक साथ शिंदे को समर्थन दिया है जिसके बाद सदन में उद्धव खेमा बहुमत साबित नहीं कर पाया. जिसके बाद एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने हैं जबकि भाजपा के देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी सीएम बनाया गया है.

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