ईरान वाली गलती रूस के साथ नहीं दोहराएगा भारत, लिया सबक

नई दिल्ली,

यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार अन्य देशों पर रूस से तेल ना खरीदने का दबाव बना रहे हैं. पश्चिमी देश, यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस को आर्थिक चोट पहुंचाने के मकसद से ऐसा कर रहे हैं. हालांकि, भारत की तेल कंपनियां इसके उलट, पहले से भी ज्यादा तेल खरीद रही हैं.भारत की तेल कंपनियां अधिक से अधिक मात्रा में तेजी से रूस का तेल खरीद रही हैं जबकि भारत सरकार घरेलू तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचाने के तरीके खोजने में जुटी हैं.

मई में रूस से भारत ने प्रतिदिन औसतन 819,000 बैरल तेल खरीदा
इसका नतीजा यह है कि यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद लिया है. मई में भारत ने रूस से प्रतिदिन 819,000 बैरल तेल खरीदा जबकि अप्रैल में यह दर 277,000 बैरल प्रतिदिन ही थी. यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस से भारत की तेल खरीद कितनी ज्यादा बढ़ी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत ने मई 2021 में रूस से प्रतिदिन की दर से 33,000 बैरल तेल ही खरीदा था.

इस तरह रूस, भारत में तेल का निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है. उसने सऊदी अरब को पीछे छोड़कर यह मुकाम हासिल किया है. वहीं, इराक से भारत में सबसे ज्यादा कच्चे तेल का आयात होता है.24 फरवरी को रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से यूरोपीय देशों और अमेरिका ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. हालांकि, भारत ने यूक्रेन में तुरंत संघर्षविराम का आह्वान किया था लेकिन भारत ने हमले को लेकर रूस की आलोचना से कन्नी काट ली थी.वहीं, रूस, यूक्रेन पर हमले को अपनी सैन्य कार्रवाई बताता है.

भारत के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बताया कि भारत की योजना है कि वह रूस से कम छूट पर तेल खरीदना जारी रखेगा. हालांकि, अब तेल पर मिलने वाली यह छूट कम होती जा रही है.उन्होंने कहा, अगर भारत, रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है तो पूरी दुनिया में तेल की मांग बढ़ेगी और इसके साथ तेल की कीमतों में भी इजाफा होगा.

ईरान वाली गलती नहीं दोहराएगा भारत
सरकार और तेल रिफाइनरी कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि रूस का कच्चा तेल खरीदने का भारत का मुख्य कारण व्यावसायिक है.चीन के बाद भारत सबसे अधिक मात्रा में रूस का तेल खरीद रहा है, जिससे रूस के तेल पर लगे प्रतिबंधों की वजह से मांग में कमी की भरपाई हुई है.दरअसल पश्चिमी देशों ने यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस को अलग-थलग करने के प्रयास किए और उस पर भारी प्रतिबंध लगा दिए.इस मामले पर कमार एनर्जी में एनर्जी कंसल्टेंसी के चीफ एग्जिक्यूटिव रॉबिन मिल्स ने रॉयटर्स से कहा, भारत का मानना है कि अगर चीन, रूस का तेल खरीद रहा है तो हम क्यों नहीं खरीद सकते?

भारत दोबारा ईरान के मामले में हुई गलती को नहीं दोहराना चाहता है. जब ईरान पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए तो उसने भारत समेत दूसरे देशों पर भी इन प्रतिबंधों का पालन करने की हिदायत दी. हालांकि, चीन ने तमाम प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का तेल खरीदना जारी रखा था लेकिन भारत ने ईरान से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया. ईरान ने उस वक्त ये शिकायत भी की थी कि भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए अमेरिकी दबाव के सामने और ज्यादा मजबूती से सामने आना चाहिए था.

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