SC की छुट्टी खत्मः शिवसेना, माल्या, अबू सलेम, वरवरा राव, बुलडोजर.. आएंगे ये फैसले

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में सामान्य कामकाज की शुरुआत करीब-करीब 50 दिनों की गर्मी की छुट्टियों के बाद आज फिर से शुरू हो जाएगी। सर्वोच्च न्यायालय लंबी छुट्टी के बाद खुल रहा है, इसलिए पहले हफ्ते में कई चर्चित मामलों में सुनवाई होनी है। इनमें एल्गार परिषद केस के एक आरोपी पी. वरवरा राव, महाराष्ट्र की नई सरकार और पैगंबर विवाद के बाद उत्तर प्रदेश में हुए उपद्रव के आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर के उपयोग जैसे मामले शामिल हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना के 16 बागी विधायकों की अयोग्यता समेत कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर तो आज ही फैसला भी आ जाने की उम्मीद है।

शिवसेना के 16 विधायकों का क्या होगा?
शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) गठबंधन की महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के गिरने और शिवसेना के बगावती धड़े के साथ बीजेपी गठबंधन की सरकार बनने का मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है। उद्धव गुट की शिवसेना के नेता सुभाष देसाई ने बगावती गुट के नेता एकनाथ शिंदे को सरकार बनाने का निमंत्रण देने के राज्यपाल के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन और विधानसभा में विश्वासमत पर मतदान की प्रक्रिया को भी गलत बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला शिवसेना के दोनों गुटों समेत कांग्रेस, एनसीपी और बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।

अदालत की अवमानना मामले में माल्या पर फैसला
आज भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की तरफ से अदालत की अवमानना किए जाने के मामले में भी फैसला आना है। देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों के समूह की माल्या के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज क्या फैसला देता है। उच्चतम न्यायालय ने 9,000 करोड़ रुपये का लोन नहीं चुकाने के मामले में मार्च में दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माल्या से उनकी सारी संपत्ति का ब्योरा देने को कहा था। उन्होंने फरवरी 2016 में शराब निर्माता कंपनी डायजियो (Diageo) से मिले 4 करोड़ डॉलर की जानकारी नहीं दी। इस कारण माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस चल पड़ा। इतना ही नहीं, माल्या ने शर्तों और वादों से इतर अपने तीन बच्चों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2017 में उसे अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया था क्योंकि तारीख पर तारीख मिलने के बावजूद माल्या कोर्ट में पेश नहीं हुआ था।

वरवरा राव और बिशप की याचिका पर हैं निगाहें
सुप्रीम कोर्ट आज एल्गार परिषद के मुख्य आरोपियों में एक पी. वरवरा राव को परमानेंट मेडिकल बेल की याचिका पर भी फैसला देना है। 83 वर्षीय राव महाराष्ट्र के पुणे स्थित भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी 2018 को हुई हिंसा केस के मुख्य आरोपी हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मेडिकल ग्राउंड पर बेल देने की उनकी याचिका 13 अप्रैल को खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने उन्हें तीन महीने में सरेंडर करने का आदेश दिया है। यह मियाद इसी महीने खत्म हो जाएगी। राव ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट से आज जो प्रमुख फैसले आ सकते हैं, उनमें एक भारत में इसाई समुदाय के लोगों के प्रति घृणा के माहौल का मामला भी है। एक बिशप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है।

अब सलेम पर भी आज आ सकता है आदेश
माफिया डॉल अबू सलेम का केस पर फैसला भी मई महीने में ही सुरक्षित रखा गया था। भारत सरकार ने पुर्तगाल सरकार से वादा किया था कि सलेम के प्रत्यर्पण के बाद उसे 25 वर्ष से ज्यादा की सजा नहीं दी जाएगी। हालांकि, जिला अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसे सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सलेम को 1993 मुंबई ब्लास्ट केस और 1995 में बिजनसमैन प्रदीप जैन की हत्या के मामले में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की बेंच ने तब मामले में केंद्र सरकार की राय मांगी थी। केंद्रीय गृह सचिव ने अप्रैल में हलफनामा देकर बताया कि भारत सरकार, पुर्तगाल से किए अपने वादों से बंधी है। हालांकि, अबू सलेम की 25 वर्ष की सजा नवंबर 2030 में पूरी होगी, तभी उसे रिहा किया जा सकता है। यह अवधि 11 नवंबर, 2005 से तय की गई है जब पुर्तगाल से सलेम को भारत लाया गया था। सलेम ने कहा कि पुर्तगाल की जेल में बीते उसके वक्त को भी 25 वर्ष की सजा में ही जोड़ दी जाए। अब सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि उसकी सजा की अवधि की गणना किस तरह की जाएगी।

इसी हफ्ते यूपी में बुलडोजर ऐक्शन पर भी फैसला संभव
सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को मुस्लिम संगठन जमीयत-उलमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनवाई हो सकती है जिसमें उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के बुलडोजर अभियान पर रोक लगाने की मांग की गई है। जमीयत का कहना है कि यूपी सरकार मुसलमानों को निशाना बना रही है और बहाने बनाकर उनके घरों को तोड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत के आरोपों पर यूपी सरकार से जवाब मांगा था। सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि जिन लोगों के घर तोड़े गए वो अवैध थे। बुलडोजर ऐक्शन पूरी तरह कानून को ध्यान में रखकर हुआ है और उसका कानपुर और प्रयागराज में हुई हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, जमीयत का कहना है कि पैगंबर विवाद में उपद्रव और हिंसा के बाद योगी सरकार मुसलमानों को टार्गेट कर रही है।

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