‘तेजी से न बढ़े एक वर्ग की आबादी…’ योगी के बयान के क्या हैं मायने, क्यों बढ़ा विवाद

लखनऊ

विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास सफलतापूर्वक हों, लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि कहीं भी जनसांख्यकीय असंतुलन की स्थिति न पैदा होने पाए। ऐसा न हो कि किसी एक वर्ग की आबादी बढ़ने की गति अधिक हो और जो मूल निवासी हों, जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों से उनकी आबादी को नियंत्रित कर जनसंख्या असंतुलन पैदा कर दिया जाए। जिन देशों में जनसांख्यकीय असंतुलन होता है वहां चिंताएं बढ़ती हैं, क्योंकि इससे धार्मिक डेमोग्राफी पर विपरीत असर पड़ता है। इससे एक समय के बाद वहां अव्यवस्था, अराजकता जन्म लेने लगती है। जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाने और जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े की शुरुआत के मौके पर दिया गया योगी का यह बयान अब राजनीतिक रंग लेता दिखने लगा है।

सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान के मायने को समझने की जरूरत है। प्रदेश में जनसंख्या विस्फोट की स्थिति को देखते हुए इस बयान को समझा जा सकता है। प्रदेश में अगर मातृत्व की स्थिति पर गौर करें तो स्थिति की गंभीरता सामने आएगी। प्रदेश में एक महिला औसतन 3.15 बच्चों को जन्म देती है। इसमें से हिंदू महिलाओं को औसतन 3.06 बच्चे होते हैं। वहीं, एक मुस्लिम महिला 3.6 बच्चों को जन्म देती हैं। प्रदेश में 44.2 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिनके 2 या उससे कम बच्चे हैं। दो या कम बच्चों वाली महिलाओं में 44.85 फीसदी हिंदू महिलाएं हैं, जबकि इस दायरे में 40.38 फीसदी मुस्लिम महिलाएं ही आती हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान पर राजनीतिक संग्राम शुरू हो गया है।

सीएम योगी ने जताई है चिंता
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बढ़ती जनसंख्या की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों से सभी मत मजहब, वर्ग, संप्रदाय, क्षेत्र को समान रूप से जोड़ा जाना चाहिए। सीएम ने कहा भी कि एक निश्चित पैमाने पर जनसंख्या समाज की उपलब्धि भी है, लेकिन यह तब ही संभव है जब समाज स्वस्थ एवं दक्ष हो। जहां बीमारी हो, संसाधनों का अभाव हो वहां जनसंख्या चुनौती होती है। प्रदेश में मैटरनल एनिमिया, मातृ, शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने की कोशिशों के बीच हमारे सामने एक और चुनौती है।

योगी ने कहा कि एक वर्ग विशेष में मातृ और शिशु मृत्यु दर दोनों ही ज्यादा है। अगर दो बच्चों के जन्म के बीच अंतराल कम है तो इसका खमियाजा मातृ और शिशु मृत्यु दर पर भी पड़ेगा और इसकी कीमत समाज को भी चुकानी पड़ेगी। ऐसे में इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। सीएम योगी के इस भाषण पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने बड़ा हमला बोला। उन्होंने इसे एक वर्ग विशेष पर निशाना साधने से इसे जोड़ा। वहीं, सपा सांसद ने तो इस मामले में अलग ही मोड़ दे दिया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह योगी के बयान के समर्थन में खड़े हो गए हैं।

‘योगी के बयान को समझने की जरूरत’
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यूपी के सीएम के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है, उसे समझने की जरूरत है। उन्होंने देशहित में बात कही है। जनसंख्या नियंत्रण कानून का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक चश्मे से देखने की जरूरत नहीं है। इसे देश, विकास और सामाजिक समरसता के चश्मे से देखना चाहिए। भारत और चीन की आबादी मिलाकर ही विश्व की आधी आबादी हो जाती है। वहीं, भाजपा के पूर्व मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा देश की सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश में जनजागरण अभियान को लेकर राजनीति किसी भी स्थिति में सही नहीं है।

‘अल्लाह से है औलाद पैदा करने का ताल्लुक’
समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्ररहमान बर्क ने संभल में योगी के बयान पर हमला बोला। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के मसले को एक अलग ही रंग दे दिया। बच्चों के पैदा करने को सपा सांसद धर्म से जोड़ते नजर आए। शफीकुर्रहमान ने कहा कि औलाद पैदा करने का ताल्लुक इंसान से नहीं, अल्लाह से है। जनसंख्या नियंत्रण कानून की जगह शिक्षा पर जोर दिया जाना जरूरी है। अगर लोगों में तालीम होगी तो जनसंख्या का मामला खुद हल हो जाएगा। इस मामले को उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 से जोड़ते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी लोगों के नजरिए को बदलना चाहती है।

सपा ने जताया विरोध
उधर, सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने कहा, ज्यादा जनसंख्या किसी भी देश के लिए समस्या होती है, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि कैसे उस समस्या का समाधान हो और कैसे देश विकास के रास्ते पर जाएं और उन्नति करें. साथ ही कैसे रोजगार बड़े और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो यह भी सरकार की जिम्मेदारी होती है सरकार इससे भाग नहीं सकती है.

क्या जनसंख्या नियंत्रण कानून की तैयारी?
सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद एक बड़ा सवाल उठने लगा कि क्या देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाए जाने की तैयारी की जा रही है। भाजपा के एजेंडे में जनसंख्या नियंत्रण कानून प्रमुखता से है। ऐसे में देश के सबसे राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से एक वर्ग विशेष की जनसंख्या बढ़ने के मामले पर बयान के बाद इस संबंध में चर्चा शुरू हुई है। विपक्षी दल इस पूरे मामले को इसी नजरिए से देख रहे हैं। विपक्षी दलों का मानना है कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भाजपा इस मुद्दे को हवा देकर अलग माहौल बनाने की तैयारी में है।

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