सेंट्रल विस्टा पर बने अशोक स्तंभ में हुआ है कोई बदलाव, खुद इसे बनाने वाले मूर्तिकार से जान लीजिए

औरंगाबाद

नए संसद भवन में लगे अशोक स्तंभ के उद्घाटन के बाद से इसे लेकर विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष का कहना है कि नए संसद भवन में लगने वाले अशोक की लाट के मोहक और राजसी शेरों की तुलना में ये उग्र और क्रूर लग रहे हैं। इस बीच राष्ट्रीय प्रतीक को बनाने वाले मूर्तिकार का बयान भी सामने आया है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी मूर्तिकार सुनील देवरे ने यह राष्ट्रीय प्रतीक बनाया है। उनका कहना है कि प्रतीक में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बस फोटो अलग ऐंगल से ली गई है।

टाइम्स नाउ से बातचीत में सुनील देवरे ने बताया, ‘असली राष्ट्रीय प्रतीक 7 फीट ऊंचा है जबकि नया प्रतीक लगभग 7 मीटर (लगभग 21 फीट) ऊंचा है। उनका कहना है कि ‘वायरल हो रहे राष्ट्रीय प्रतीक की चिह्न की तस्वीर मूर्ति लो ऐंगल से ली गई है और जब आप उसे उस ऐंगल से देखेंगे तो इसका कैरेक्टर बदला हुआ नजर आता है।’

‘सरकार की ओर से निर्देश नहीं मिला’
मूर्तिकार सुनील देवरे ने दावा किया, ‘मैंने सही ढंग से स्टडी करने के बाद राष्ट्रीय प्रतीक को बनाया है। मुझे टाटा प्रोजक्ट्स लिमिटेड की ओर से प्रतीक बनाने का काम दिया गया था और मुझे सरकार से कोई निर्देश नहीं मिला।’

गौरतलब है कि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन पर बने अशोक स्तंभ का अनावरण किया। इसके बाद से राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने सारनाथ और सेंट्रल विस्टा के अशोक स्तंभ की तस्वीर शेयर की। आम आदमी पार्टी से राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया क‍ि बीजेपी ने राष्‍ट्रीय चिह्न ही बदल दिया।

केंद्रीय मंत्री ने दी मामले में सफाई
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मामले में सफाई दी। हरदीप सिंह पुरी ने जोर दिया कि अगर सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक के आकार को बढ़ाया जाए या नए संसद भवन पर बने प्रतीक के आकार को छोटा किया जाए, तो दोनों में कोई अंतर नहीं होगा।

अशोक स्तंभ की खासियत जानिए
नए संसद भवन में कांस्य का बना यह प्रतीक 9,500 किलोग्राम वजनी है और इसकी ऊंचाई 6.5 मीटर है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय प्रतीक को नए संसद भवन के शीर्ष पर स्थापित किया गया है और इसे सहारा देने के लिए इसके आसपास करीब 6,500 किलोग्राम के स्टील के एक ढांचे का निर्माण किया गया है। नए संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक को स्थापित करने की प्रक्रिया क्ले मॉडलिंग और कम्प्यूटर ग्राफिक्स से लेकर कांस्य की ढलाई और पॉलिश तक आठ विभिन्न स्तरों से गुजरी है

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