ओमीक्रोन के नए वेरिएंट को लेकर क्यों टेंशन में हैं वैज्ञानिक, भारत को भी किया जा रहा अलर्ट

नई दिल्ली

एक बार फिर से कोविड-19 के ओमीक्रोन वेरिएंट के नए म्यूटेंट से कोरोना की नई लहर की आशंका जताई जा रही है। तेजी से बदलते कोरोनावायरस के एक और सुपर संक्रामक ओमीक्रोन म्यूटेंट वैज्ञानिकों को चिंतित कर रहा है। यह अमेरिका, भारत समेत कई देशों में चिंता का नया कारण है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के ओमीक्रोन वेरिएंट के सब वेरिएंट BA.2.75 तेजी से फैलता है। कोरोना टीका इस पर कितना असरदार होगा कुछ कहा नहीं गया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह विश्व स्तर पर BA.5 सहित दूसरे ओमीक्रोन वेरिएंट की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

तेजी से फैल रहा नया वेरिएंट
अमेरिका के मिनेसोटा के रोचस्टर में मेयो क्लिनिक में क्लिनिकल वायरोलॉजी के निदेशक मैथ्यू बिन्नीकर ने कहा कि अभी कोई भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन ऐसा लगता है भारत में ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BA.2.75 की रफ्तार अधिक है। यह बीए.5 से आगे निकल पाएगा या नहीं, यह अभी तय नहीं हुआ है। नई दिल्ली में काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी की ओर से नए सब वेरिएंट को लेकर चिंता जताई गई है। इसके वैज्ञानिक लिपि ठुकराल ने कहा कि नया म्यूटेंट भारत में भी पाया गया है। यह दूसरे वेरिएंट की तुलना में तेजी से फैल रहा है। यह ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा सहित लगभग 10 अन्य देशों में भी पाया गया है। अमेरिका में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।

नए वायरस पर वैक्सीन का कितना असर
नए म्यूटेंट को लेकर एक और चिंता की जो बात है कि यह वैक्सीन या पहले हो चुके कोरोना से बने एंटीबॉडी को बेअसर कर सकती है। हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि गंभीर कोविड -19 के खिलाफ टीके और बूस्टर अभी भी सबसे अच्छा बचाव हैं। हालांकि कुछ लोगों का सवाल है कि टीका और बूस्टर डोज भी लोगों को संक्रमित होने से नहीं रोका पाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सच है लेकिन हमने जो देखा है वह यह है कि अस्पताल में लोगों के मरने की दर में काफी कमी आई है। जैसे-जैसे अधिक लोगों को टीका लगाया गया है कोरोना का असर भी कम देखने को मिला है।

कितना असर समझने में लग सकते हैं कई दिन
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कांग का कहना है कि यह समझने में कई सप्ताह लग सकते हैं कि ओमीक्रोना का नया सब वेरिएंट कितना प्रभावित कर सकता है। नए वेरिएंट पर जो चिंता है उसके लिए जरूरी है कि वायरस को ट्रैक और ट्रेस करने की निरंतर जरूरत है। कौन बीमार हो रहा है और कितनी बुरी तरह। यह सब जरूरी है। हमें अब भी सावधान रहने की जरूरत है।

बूस्टर डोज क्यों है जरूरी
कोरोना के खतरे को देखकर अभी हाल ही में कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज और प्रीकॉशन डोज डोज का अंतर जो 9 महीने का था उसे अब तीन महीने घटा दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के सभी जिलों में कोरोना वैक्सीन के लिए हर घर दस्तक 2.0 अभियान भी चलाया है। कोविड वैक्सीनेशन सेंटरों के साथ-साथ लोगों के घरों पर भी दस्तक दी जा रही है। कोरोना की दूसरी डोज लगे हुए 6 महीने हो गए हैं तो प्रीकॉशन डोज या बूस्टर डोज लगवा सकते हैं। बूस्टर डोज के लिए 6 महीने का समय 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए है।

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