अंतरिक्ष में क्यों सुनाई दे रहीं ‘दिल की धड़कनें’? वैज्ञानिकों ने पकड़ी अबूझ तरंगें?

ओटावा

अंतरिक्ष, रहस्यों और संभावनाओं से भरा एक महासागर जिसे जितना खोजा और समझा जाए कम है। कुछ लोग इस अंतरिक्ष में जीवन की उत्पत्ति और इतिहास खोज रहे हैं तो कुछ नया जीवन। दुनियाभर के खगोलविदों की नजरें दिन-रात अंतरिक्ष पर टिकी रहती हैं और अक्सर ये चौंकाने वाले खुलासे करते रहते हैं। बुधवार को नेचर पत्रिका में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है जिसमें ऐसी ही एक चौंकाने वाली खोज की जानकारी दी गई है। स्पेस में एक रहस्यमय रेडियो बर्स्ट का पता चला है जिसका पैटर्न ‘दिल की धड़कनों’ जैसा है। खगोलविदों का अनुमान है कि ये सिग्नल लगभग एक अरब प्रकाश वर्ष दूर एक गैलेक्सी से आया है। लेकिन इसकी सटीक लोकेशन और बर्स्ट का कारण अभी भी अज्ञात है।

स्पेस में रेडियो तरंगों के मिलीसेकेंड लंबे बर्स्ट को ‘फास्ट रेडियो बर्स्ट’ या एफआरबी (FRB) कहते हैं जिनका स्रोत अज्ञात होता है। पहले FRB की खोज 2007 में की गई थी जिसके बाद इस तरह के सैकड़ों बर्स्ट खोजे जा चुके हैं जो ब्रह्मांड के दूरस्थ स्थानों से आ रहे हैं। कई FRBs से बेहद चमकीली रेडियो तरंगें निकलती हैं जो सिर्फ कुछ मिलीसेकेंड में ही पूरी तरह गायब हो जाती हैं। इनमें से करीब 10 फीसदी रिपीट होती हैं और उनमें पैटर्न होता है। फास्ट रेडियो बर्स्ट इतने तेज, अचानक और अप्रत्याशित होते हैं कि उन्हें देख पाना बेहद मुश्किल होता है।

21 दिसंबर 2019 को देखा था बर्स्ट
रेडियो बर्स्ट को पकड़ने के लिए कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया की डोमिनियन रेडियो एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी में एक रेडियो टेलिस्कोप है जिसे कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट या CHIME कहा जाता है। यह टेलिस्कोप 2018 से काम कर रहा है और लगातार आसमान और FRB की निगरानी करता है। यह टेलिस्कोप दूर ब्रह्मांड में उत्सर्जित रेडियो तरंगों के प्रति बेहद संवेदनशील है। CHIME की मदद से वैज्ञानिकों ने 21 दिसंबर 2019 को कुछ ऐसा देखा जिससे उनका ध्यान वहीं रुक गया।

आम रेडियो बर्स्ट से 1000 गुना अधिक लंबा
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के कावली इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च में शोधकर्ता डेनियल मिचिली के अनुसार, यह फास्ट रेडियो बर्स्ट ‘कई मायनों में अजीब’ था। इस सिग्नल का नाम FRB 20191221A रखा गया। यह 3 सेकेंड तक रहा जो किसी आम फास्ट रेडियो बर्स्ट की तुलना में 1000 गुना अधिक लंबा था। बर्स्ट के बाद CHIME से हासिल हुए डेटा को मिचिली मॉनिटर कर रहे थे। यह सिग्नल अब तक का सबसे लंबे समय तक रहने वाला फास्ट रेडियो बर्स्ट है।

‘दिल की धड़कनों’ जैसा था पैटर्न
उन्होंने कहा, ‘यह अजीब था, सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि यह बहुत लंबा था और तीन सेकेंड तक रहा बल्कि इसलिए क्योंकि इसका पैटर्न दिल की धड़कन जैसा था, हर सेकेंड- बूम, बूम, बूम।’ एक मेल में उन्होंने कहा, ‘FRB 20191221A आज तक रिपीट नहीं हुआ, लेकिन हमने पाया कि यह सिग्नल सिलसिलेवार पीक से बना था जिनके बीच में 0.2 सेकेंड का अंतर था।’ मिचिली ने कहा कि रिसर्च टीम को सटीक गैलेक्सी की जानकारी नहीं है जहां से बर्स्ट निकला था और एक अरब प्रकाश-वर्ष की दूरी का अनुमान भी ‘बेहत अनिश्चित’ है।

वैज्ञानिक बना रहे अपग्रेड टेलिस्कोप
CHIME टेलिस्कोप रेडियो तरंगों का तो पता लगाने में सक्षम है लेकिन यह उनके स्रोत की जानकारी नहीं दे सकता। उन्होंने बताया कि अब CHIME को एक प्रोजेक्ट के माध्यम से अपग्रेड किया जा रहा है और अतिरिक्त टेलिस्कोप भी तैयार किए जा रहे हैं जो रेडियो बर्स्ट का उनकी गैलेक्सी तक पता लगाने में सक्षम होंगे। रेडियो तरंगों की आवृत्ति और उनका बदलाव, ब्रह्मांड के विस्तार की दर को समझने में खगोलविदों की मदद कर सकता है।

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