जुबैर के उस ट्वीट से कितने लोग आहत हुए? जब कोर्ट ने पूछ लिया सीधा सवाल

नई दिल्ली

ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर के कथित आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में सुनवाई के दौरान दिल्ली की एक अदालत ने यह जानना चाहा कि ऐसे कितने लोग हैं जो आहत हुए हैं। दरअसल, कोर्ट 2018 में एक हिंदू देवता के बारे में किए गए ट्वीट से संबंधित मामले में जुबैर की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जज ने साफ-साफ पूछा, ‘कितने विक्टिमों के बयान दर्ज किए गए? कितने लोग ऐसे हैं जो आहत हुए हैं?’अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला ने आरोपी के साथ-साथ अभियोजन पक्ष के वकील की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। इससे पहले एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 2 जुलाई को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। आरोपी ने जमानत खारिज करने के मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को चुनौती दी है।

2014 से पहले और…
बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि तस्वीर के साथ, जुबैर ने लोगों को भड़काने के इरादे से ‘2014 से पहले’ और ‘2014 के बाद’ का इस्तेमाल किया था। सत्र अदालत ने तब पूछा कि सरकार को छोड़कर 2014 में क्या बदला, और क्या यह ट्वीट सरकार की आलोचना थी। लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि आरोपी लोगों को भड़काना चाहते थे और उनमें नफरत पैदा करना चाहते थे।

कितने लोगों को बुरा लगा?
तभी अदालत ने अभियोजन पक्ष से पूछा कि क्या जांच एजेंसी ने उन लोगों के बयान लिए हैं जो आहत महसूस करते हैं। जज ने पूछा, ‘कितने लोगों को बुरा लगा? आपने कितने बयान लिए हैं।’ अभियोजक ने अदालत से कहा कि यह काम नियत समय में किया जाएगा। जुबैर की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि आरोपी को व्यक्तिगत रूप से या उनकी कंपनी ‘प्रावदा मीडिया’ को कोई विदेशी चंदा नहीं मिला। अधिवक्ता ने कहा, ‘हमारी वेबसाइट पर कहा गया है कि हमें विदेशी योगदान नहीं मिलता है क्योंकि हम एफसीआरए प्रावधानों के तहत पंजीकृत नहीं हैं। मेरी वेबसाइट के अनुसार केवल भारतीय अकाउंट वाले भारतीय नागरिक ही योगदान कर सकते हैं। हम पैन नंबर, ई-मेल आईडी सहित दाता की सभी जानकारी मांगते हैं।’

उन्होंने कहा कि ‘रेजर पे’ के सीईओ (जिसके माध्यम से कंपनी को पैसा मिला) ने अपनी गिरफ्तारी के बाद एक बयान दिया कि ऑल्ट न्यूज को केवल घरेलू भुगतान प्राप्त करने के लिए अधिकृत किया गया था। उन्होंने कहा, ‘इसलिए, यह दावा कि प्रावदा मीडिया को कुछ मुस्लिम देशों से धन प्राप्त हुआ दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसा केवल मामले को संवेदनशील बनाने के लिए किया गया है।’ उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में, ‘फर्जी समाचार लोगों को निर्णय लेने में मदद नहीं करने वाला है इसलिए कम पैसे वाले लोग भी मेरे काम में मदद कर रहे हैं।’

अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की कंपनी की वेबसाइट पर कहा गया है कि केवल भारतीय नागरिकों को ही भुगतान करना चाहिए, लेकिन वे दूसरों से पैसा भी प्राप्त कर रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने कहा, ‘कोई भुगतान कर रहा है और आप इसे स्वीकार कर रहे हैं… एफसीआरए के उल्लंघन में 56 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं।’ अभियोजक ने कहा, ‘इसमें जालसाजी भी की गई थी जिसकी हम जांच कर रहे हैं।’

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