हेल्थ-एजुकेशन पर बहस करें, CM केजरीवाल को BJP का चैलेंज, दिल्ली की सियासत में ‘रेवड़ी कल्चर’ ने पकड़ा तूल

नई दिल्ली

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘रेवड़ी कल्चर’ वाली टिप्पणी की आलोचना के बाद दिल्ली की सियासत गरमा गई है। रविवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने केजरीवाल को स्वास्थ्य और शिक्षा पर बहस करने की चुनौती दी।

गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल को लोगों को बताना चाहिए कि उनके कितने मंत्री, विधायक और नेताओं के बच्चे दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। गुप्ता ने सवाल किया, ‘अगर दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर है तो केजरीवाल और उनके मंत्री सरकारी खर्च पर निजी अस्पतालों में इलाज क्यों करवाते हैं।’

गुप्ता ने दावा किया, ‘केजरीवाल की ‘रेवड़ी’ राजनीति के कारण दिल्ली की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर घटकर -3.9 पर आ गई है, जबकि देश की जीडीपी दर 8.2 प्रतिशत है।’ उन्होंने कहा कि ‘रेवड़ी बांटने’ का ही नतीजा है कि अब दिल्ली का राजस्व 61,891 करोड़ रुपये है जबकि खर्च 71,085 करोड़ रुपये है।

भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष ने कहा, ‘नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की है कि सब्सिडी के रूप में राज्य सरकार का खर्च 2015-16 में 1,867.61 करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 3,592.94 करोड़ रुपये हो गया।’ बिजली शुल्क में वृद्धि, स्वास्थ्य और शिक्षा पर चर्चा के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ समय मांगते हुए गुप्ता ने कहा कि अगर केजरीवाल के पास लोगों की समस्याओं के लिए समय नहीं है तो भाजपा बड़े विरोध के माध्यम से मुद्दों को उठाएगी।

क्या है मामला
शनिवार को, प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को वोट के लिए मुफ्त उपहार देने की ‘रेवड़ी संस्कृति’ के खिलाफ आगाह किया था। केजरीवाल ने कहा था कि उनकी सरकार की निशुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बिजली की योजनाएं ‘मुफ्त की रेवड़ी’ नहीं हैं, बल्कि भारत को दुनिया का नंबर एक देश बनाने की नींव रखने का प्रयास है।

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