यूपी का तबादला कांड: नाराजगी के बीच इस्तीफों की अटकलें, जानिए क्यों चर्चा में हैं योगी के 3 मंत्री

नई दिल्ली ,

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने के साथ ही सूबे में ट्रांसफर के ‘खेल’ ने खलबली मचा दी है. योगी सरकार के तीन मंत्री इन दिनों चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं. पहले डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के स्वास्थ्य मंत्रालय में विभाग में हुए तबादलों पर सवाल खड़े हुए तो अब मंत्री जितिन प्रसाद के पीडब्लूडी विभाग में हुए ट्रांसफर पर सीएम योगी ने जांच बैठा दी है. वहीं, जलशक्ति मंत्रालय में भी तबादलों को लेकर खींचतान की बात भी सामने आ रही है. ऐसे में जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक भी सुर्खियों में हैं.

जितिन प्रसाद क्यों आ गए निशाने पर
जितिन प्रसाद के मंत्रालय लोक निर्माण विभाग में 350 से अधिक इंजीनियर्स का तबादला हुआ था. पीडब्ल्यूडी के करीब 200 अधिशासी अभियंता और डेढ़ सौ से अधिक सहायक अभियंता का तबादला हुआ है. पीडब्ल्यूडी विभाग में हुए तबादलों पर सीएम योगी ने न सिर्फ जांच बैठाई है, बल्कि जितिन प्रसाद के ओएसडी अनिल कुमार पांडेय भी नप गए हैं. भारत सरकार से प्रतिनियुक्ति पर आए अपर सचिव अनिल पांडेय के खिलाफ विजिलेंस जांच और विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश भी सरकार ने कर दी है.

कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और योगी सरकार में मंत्री बनाए गए जितिन प्रसाद के पीडब्ल्यूडी विभाग में हुए ट्रांसफर में ऐसे अधिकारियों का भी तबादला कर दिया गया था, जो जीवित भी नहीं हैं.जूनियर इंजीनियर घनश्याम दास का तबादला झांसी कर दिया गया था, जिनका तीन साल पहले ही निधन हो चुका है. इसी तरह से राजकुमार का तबादला इटावा से ललितपुर जिले में कर दिया गया था जबकि इस नाम कोई शख्स विभाग में है ही नहीं. ऐसे ही कई कर्मचारियों का तबादला तब बहुत दूर कर दिया गया, जब वे एक-दो साल के अंदर ही रिटायर होने वाले थे.

पीडब्ल्यूडी विभाग में तबादलों में गड़बड़ियों को लेकर लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं. लोक निर्माण विभाग में बड़ी कार्रवाई के बाद मंत्री जितिन प्रसाद नाराज हैं, लेकिन उनकी नाराजगी अभी तक खुलकर सामने नहीं आई है. माना जा रहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात कर तबादलों पर कार्रवाई और जांच को लेकर जितिन प्रसाद अपनी बात रख सकते हैं. हालांकि, जितिन प्रसाद ने इसी बात को लेकर मंगलवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी.

बृजेश पाठक के विभाग में ट्रांसफर का ‘खेल’
योगी सरकार में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के स्वास्थ्य मंत्रालय में भी ट्रांसफर का खेल सामने आया था. स्वास्थ्य विभाग में हुए तबादलों पर काफी आपत्तियां आईं थीं. डॉक्टर्स ने आरोप लगाए थे कि तबादला नीति को दरकिनार करके ट्रांसफर किए गए. एक जिले में तैनात पति-पत्नी का ट्रांसफर अलग-अलग जिलों में कर दिया गया. स्वास्थ्य विभाग में हुए ट्रांसफर पर खुद मंत्री ब्रजेश पाठक ने सवाल उठाए थे. उन्होंने इस मामले में विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद से जवाब भी तलब किया था. इसके बाद सीएम योगी ने तबादलों पर जांच बैठा दी है.

योगी सरकार में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक साल 2017 के चुनाव से पहले बसपा छोड़कर बीजेपी में आए थे और उन्हें योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दिनेश शर्मा की जगह डिप्टी सीएम बनाया गया था. उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था. ब्रजेश पाठक कभी अचानक अस्पताल के दौरे से चर्चा में रहे तो अब उनके विभाग के ट्रांसफर और पोस्टिंग के खेल से.

दिनेश खटीक आखिर क्यों नाराज
योगी सरकार के तीसरे मंत्री दिनेश खटीक भी नाराज बताए जा रहे हैं. दिनेश खटीक की नाराजगी को लेकर कहा जा रहा है कि जलशक्ति मंत्रालय का राज्यमंत्री होने के बावजूद अधिकारी उनकी नहीं सुनते. दिनेश खटीक ने कई तबादलों की लिस्ट दी थी लेकिन अधिकारियों ने उनसे कैबिनेट मंत्री से बात करने के लिए कह दिया था. चर्चा है कि दिनेश खटीक ने सीएम को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और वे कहीं अज्ञात स्थान पर जा चुके हैं. हालांकि, सरकार ने इस तरह की खबरों का खंडन किया है.

दिनेश खटीक मेरठ के हस्तिनापुर से दूसरी बार विधायक चुने गए और योगी सरकार में लगातार दूसरी बार मंत्री बनाए गए. सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सभी मंत्रियों के साथ बैठक की तो उसमें भी दिनेश खटीक नहीं पहुंचे थे. किसान भवन में ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने बैठक की जिसमें राज्यमंत्री खटीक पहुंचे तो थे, लेकिन बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए. चर्चा है कि तबादलों को लेकर भी कुछ खींचतान हुई थी, जिसमें उनकी बात नहीं सुनी गई. उन्होंने सरकारी गाड़ी और सुरक्षा भी छोड़ दी है. कहा तो ये भी जा रहा है कि दिनेश खटीक से किसी का संपर्क भी नहीं हो पा रहा है.

सीएम योगी की मंत्रियों को नसीहत
लोक निर्माण विभाग में तबादलों में भ्रष्टाचार पर अफसरों पर गाज गिरने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों को नसीहत दी है कि वे अपने दफ्तर और निजी स्टाफ पर आंखें बंद कर के भरोसा ना करें. उन्होंने कहा कि अपने दफ्तर और घर के स्टाफ पर नजर रखें. मंत्री ध्यान रखें कि उनका स्टाफ क्या कर रहा है. मंगलवार को लोक भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करें. भ्रष्टाचार और अनियमितता की एक भी घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. तबादलों में खेल को देखते हुए सीएम ने कहा कि फाइल पर जल्दबाजी में दस्तखत न करें. कोई भी फैसला मेरिट के आधार पर ही करें. साथ ही योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कैबिनेट मंत्री अपने राज्य मंत्रियों के साथ समन्वय रखें और विभागीय कामकाज में उनका भी सहयोग लें और बैठकों में शामिल भी करें.

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