मध्य प्रदेश: कांग्रेस के लिए क्यों चिंता का सबब बना निकाय चुनावों का खरगोन मॉडल?

भोपाल ,

मध्य प्रदेश में कांग्रेस भले पांच नगर निगमों पर कब्जा जमाने में कामयाब रही हो, लेकिन उसके लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम बड़ी चिंता लेकर आई है. सूबे में पहली बार किस्मत आजमाने उतरी एआईएमआईएम ने एक नगर निगम में कांग्रेस का खेल बिगाड़ा तो सात पार्षद भी उसके चुनकर आए. सांप्रदायिक तनाव वाले खरगोन में एआईएमआईएम के 3 पार्षद जीते तो जबलपुर में दो और खंडवा-बुरहानपुर में एक-एक पार्षद जीतकर आए.

एमपी के मुस्लिम वोटरों ने निकाय चुनाव में विकल्प के तौर पर एआईएमआईएम को चुना है. मुसलमानों का यही वोटिंग पैटर्न 2023 के विधानसभा चुनाव में रहा तो कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ जाएगी. मध्य प्रदेश का मुस्लिम मतदाता कांग्रेस का परंपरागत वोटर माना जाता है. अगर वो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को विकल्प के तौर पर देख रहा है तो निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए चिंता का सबब है.

मध्य प्रदेश में करीब 8 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. वो शुरू से कांग्रेस समर्थक माने जाते थे. 1967 में जब देश में गैर-कांग्रेसवाद की राजनीति शुरू हुई और मुसलमानों को भी विपक्ष में कांग्रेस का विकल्प दिखाई दिया. हालांकि, मध्य प्रदेश में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस का वोटर बना रहा. लेकिन, निकाय चुनावों में कहानी कुछ बदली नजर आ रही है.

मध्य प्रदेश निकाय चुनाव में एआईएमआईएम ने पहली बार कदम रखा और पार्टी ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया. खरगोन के अलावा जबलपुर, बुरहानपुर और खंडवा में एआईएमआईएम के पार्षद जीते. बुरहानपुर नगर निगम की मेयर सीट पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM प्रत्याशी शाइस्ता हाशमी 10274 वोट हासिल करने में कामयाब रहीं, जिसके चलते कांग्रेस प्रत्याशी शहनाज अंसारी महज 542 वोट से बीजेपी के हाथों हार गई. कांग्रेस के लिए यह काफी बड़ा झटका माना जा रहा है.

AIMIM से पार्षद चुनी गई अरुणा उपाध्याय
खरगोन में पिछले दिनों रामनवमी पर निकाली शोभायात्रा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी. यहां के निकाय चुनाव में मुस्लिम वोटरों ने विकल्प के तौर पर ओवैसी की पार्टी का साथ दिया. खरगोन नगर पालिका की कुल 33 पार्षद सीटों में से 19 बीजेपी, 7 निर्दलीय, 4 कांग्रेस और 3 AIMIM के खाते में गईं. खरगोन में ओवैसी की पार्टी से दो मुस्लिम और एक हिंदू महिला अरुणा उपाध्याय पार्षद चुनी गई हैं.

ओवैसी की पार्टी को जहां-जहां सफलता मिली है, वहां के सामाजिक समीकरण को देखें तो वो मुस्लिम बहुल इलाके हैं. खरगोन के अलावा जबलपुर, खंडवा और बुरहानपुर में AIMIM के पार्षद बने हैं. ऐसे में खरगोन समेत पूरे निमाड़ की राजनीति में एआईएमआईएम को सफलता मिली है.

एमपी में मुस्लिम वोट करीब दो दर्जन विधानसभा सीटों पर निर्णायक प्रभाव रखते हैं. राज्य के 51 जिलों में से 19 जिलों में मुस्लिम आबादी 1 लाख से ज्यादा है. भोपाल में संख्या बल के आधार पर सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं जबकि फीसदी के लिहाज से बुरहानपुर में सबसे ज्यादा हैं.

भोपाल उत्तर विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 60 फीसदी और बुरहानपुर सीट पर 50 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. इंदौर-1, इंदौर-3, भोपाल मध्य, उज्जैन और जबलपुर सीट पर 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं. खंडवा, रतलाम, जावरा और ग्वालियर सीट पर 20 से 25 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. शाजापुर, मंडला, नीमच, महिदपुर, मंदसौर, इंदौर-5, नसरुल्लागंज, इछावर, आष्टा और उज्जैन दक्षिण सीट पर 16 फीसदी वोटर हैं

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