यंग इंडिया की डायरेक्‍टर क्‍यों बनीं, कंपनी का क्‍या है काम… सोनिया गांधी से किन सवालों के जवाब चाहता है ईडी?

नई दिल्‍ली

कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में पूछताछ के लिए हाजिर हुईं। उनकी पेशी पर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा देखने को मिला। सोनिया गांधी से ईडी की पूछताछ को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देशभर में जमकर प्रदर्शन किया। सोनिया गांधी जेड प्लस सिक्योरिटी में ईडी दफ्तर पहुंचीं। उनके साथ राहुल गांधीऔर प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थे। ईडी नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी से पूछताछ कर रहा है। गुरुवार को सोनिया गांधी से दो घंटे पूछताछ चली। उन्‍हें शुक्रवार को दोबारा बुलाया गया है। इस केस में ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कंपनी से जुड़े कई अन्य कांग्रेस नेताओं पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया है। मामले में राहुल गांधी से ईडी ने जून में पूछताछ की थी। इस बीच लोग जानना चाहते हैं कि आखिर सोनिया गांधी से ईडी किन सवालों के जवाब जानना चाहता है। आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि जांच एजेंसी सोनिया गांधी के सामने क्‍या-क्‍या सवाल रख सकती है।

क्‍या है पूरा मामला?
पूरा मामला नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ा है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में इसकी नींव रखी थी। अखबार में मुख्‍य तौर पर नेहरू के लेख छपते थे। इस अखबार से ब्रितानी सरकार इतनी भयभीत हो गई थी कि 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। अखबार का मालिकाना अधिकार एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल के पास था। कंपनी दो और अखबार छापा करती थी। हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज। 1956 में एजेएल को गैर व्यावसायिक कंपनी के तौर पर स्थापित किया गया। इसी के साथ इसे कंपनी एक्ट की धारा 25 से कर मुक्‍त कर दिया गया। धीरे-धीरे घाटे कंपनी में चली गई। कंपनी पर 90 करोड़ का लोन भी चढ़ गया।

इस बीच साल 2010 में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक दूसरी कंपनी बनाई गई। इसमें 38-38 प्रतिशत शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास के थे। बाकी की हिस्‍सेदारी मोतीलाल बोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास थी। कांग्रेस पार्टी ने अपना 90 करोड़ का लोन नई कंपनी यानी यंग इंडिया को ट्रांसफर कर दिया। लोन चुकाने में पूरी तरह असमर्थ द एसोसिएट जर्नल (AJL) ने सारे शेयर यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिए। इसके बदले में यंग इंडियन ने महज 50 लाख रुपये द एसोसिएट जर्नल को दिए। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि यंग इंडिया प्राइवेट ने केवल 50 लाख रुपये में 90 करोड़ वसूलने का उपाय निकाला जो नियमों के खिलाफ है।

क्‍या-क्‍या सवाल पूछ सकता है ईडी
ईडी के सवाल इस पूरे मामले के इर्दगिर्द हो सकते हैं। यंग इंडिया से सोनिया गांधी के कनेक्‍शन को लेकर सवाल किया जा सकता है।
– जांच एजेंसी पूछ सकती है कि आखिर सोनिया गांधी ने यंग इंडिया प्राइवेट में 38 फीसदी शेयर क्‍यों लिए
-एजेएल की रिपोर्ट के संदर्भ लोन का जिक्र क्‍यों नहीं किया गया है, यंग इंडिया की ओर से यंग इंडिया को अनसिक्‍योर्ड लोन देने की क्‍या वजह थी
– जब एजेएल का अधिग्रहण हुआ तो क्‍या उससे पहले नियमों के अनुसार शेयरधारकों की बैठक हुई, रजिस्‍ट्रार ऑफ कंपनीज के पास मौजूद दस्‍तावेजों के अनुसार, 29 दिसंबर 2010 तक एजेएल के शेयरधारकों की संख्‍या 1057 थी
– एजेएल ने रकम कांग्रेस को क्‍यों नहीं दिखाई, उस पर कितने करोड़ की देनदारी थी
– यंग इंडिया ने एजेएल को शेयर पेमेंट कैसे दिया, इसका क्‍या तरीका था
– सोनिया गांधी से पूछा जा सकता है कि वह यंग इंडिया प्राइवेट की डायरेक्‍टर क्‍यों बनीं, वह डायरेक्‍टर बनने वाली आखिरी शख्‍स थीं
– अगर यंग इंडिया एक धर्मार्थ संगठन है तो उसका डोनेशन में योगदान क्‍यों नहीं है, उसका असल काम क्‍या है
– मोतीलाल वोरा और ऑस्‍कर फर्नांडिस को जो बाकी के शेयर ट्रांसफर हुए, उसके पीछे क्‍या कारण था

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