26 घंटे पूछताछ के बाद ममता के मंत्री अरेस्ट, लेकिन पिक्चर अभी बाकी है…

नई दिल्ली,

पश्चिम बंगाल में शिक्षा भर्ती घोटाले की जांच करते हुए ईडी ने करीब 26 घंटे की रेड के बाद ममता सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री और वर्तमान में उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया है और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को भी हिरासत में ले लिया है. बताया जा रहा है कि अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर अभी भी ईडी की रेड जारी है. बताया जा रहा है कि एसएससी घोटाले से जुड़े कई और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती हैं. ईडी के अधिकारी अभी अर्पिता मुखर्जी से पूछताछ कर रहे हैं. इस रेड के खत्म होने के बाद और भी रुपये बरामद हो सकते हैं.

शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी मानी जाने वालीं अर्पिता मुखर्जी के घर पर शुक्रवार को ED ने छापेमारी की थी, जिसमें करीब 20 करोड़ रुपये कैश बरामद किया गया था. ED को अर्पिता के खिलाफ कुछ पुख्ता सबूत मिले थे, जिसके बाद उनके घर पर भी रेड मारी थी. इस लिस्ट में माणिक भट्टाचार्य, आलोक कुमार सरकार, कल्याण मॉय गांगुली जैसे नाम भी शामिल हैं. इन सभी का बंगाल शिक्षा भर्ती घोटाले में कनेक्शन सामने आया था.

पार्थ चटर्जी के कार्यकाल में हुआ था घोटाला
ममता सरकार में उद्योग और वाणिज्य मंत्री पार्थ चटर्जी उस समय राज्य के शिक्षा मंत्री थे, जब कथित घोटाला हुआ था. सीबीआई दो बार उनसे पूछताछ कर चुकी है. पहली बार पूछताछ 25 अप्रैल, जबकि दूसरी बार 18 मई को की गई थी. सीबीआई पश्चिम बंगाल के शिक्षा राज्य मंत्री अधिकारी से भी पूछताछ कर चुकी है.

बंगाल सरकार में शिक्षा मंत्री हैं अधिकारी
बता दें कि परेश चंद्र अधिकारी फिलहाल बंगाल सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री हैं. आरोप है कि मंत्री परेश अधिकारी ने अपने प्रभाव से बेटी अंकिता अधिकारी को एसएससी में बिना मेधा तालिका में नाम आए शिक्षिका की नौकरी दिलवाई. हालांकि बाद में कोलकाता हाई कोर्ट ने अंकिता अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त करने का आदेश दिया था. साथ ही कहा था कि जो तनख्वाह उन्होंने ली है, उसे वापस जमा कराई जाए.

क्या है शिक्षा भर्ती घोटाला?
राज्य के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत शिक्षक और अन्य पदों पर नियुक्तियों के लिए स्कूल सेवा आयोग ने वर्ष 2016 में परीक्षा आयोजित की थी. उसके परिणाम 27 नवंबर 2017 को आए. उसमें सिलीगुड़ी की बबीता सरकार का नाम शीर्ष 20 उम्मीदवारों में शामिल था, लेकिन आयोग ने वह सूची रद्द कर दी. बाद में निकली सूची में बबीता का नाम तो वेटिंग लिस्ट में चला गया, लेकिन उससे 16 नंबर कम पाने के बावजूद मंत्री की पुत्री अंकिता का नाम शीर्ष पर आ गया.

अदालत ने बनाई थी कमेटी
अदालत ने पहले इस कथित घोटाले की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट में घोटाले में शामिल तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी.

सीबीआई को सौंपी गई थी जांच
इस समिति ने ग्रुप-D और ग्रुप- C पदों पर नियुक्तियों में अनियमितता पाई थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि ग्रुप-C और ग्रुप-D में 609 कई नियुक्तियां अवैध रूप से की गई थीं. इसने राज्य स्कूल सेवा आयोग के चार पूर्व शीर्ष अधिकारियों और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तत्कालीनी अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की सिफारिश की थी. अदालत ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी.

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