राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में मल्लिकार्जुन खड़गे को उचित सीट नहीं दी गई, विपक्ष ने उपराष्ट्रपति से की शिकायत

नयी दिल्ली

द्रौपदी मुर्मू ने आज देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली। इसी के साथ पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की विदाई भी हुई। अब द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी विवाद हो गया है। कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने सोमवार को दावा किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को उनकी गरिमा के अनुरूप सीट पर नहीं बैठाया गया।

उपराष्ट्रपति से विपक्ष ने की शिकायत
विपक्षी नेताओं ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर यह दावा भी किया कि एक वरिष्ठ नेता का जानबूझकर अनादर किया गया है जिसको लेकर वे हैरानी और विरोध जताते हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्विटर पर यह पत्र साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने नायडू को पत्र लिखा है।

द्रौपदी मुर्मू ने ली शपथ
पत्र में इन दलों ने कहा, ‘आज राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में मल्लिकार्जुन खड़गे को ऐसी सीट पर बैठाया गया जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।’
द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को संसद के केंद्रीय कक्ष में देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। भारत के प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलायी।

प्राचीन परंपराओं एवं आधुनिक राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के संकल्प के साथ द्रौपदी मुर्मू ने देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में सोमवार को शपथ ली । वह जनजातीय समुदाय से आने वाली देश की पहली राष्ट्राध्यक्ष और इस शीर्ष संवैधानिक पद को ग्रहण करने वाली दूसरी महिला हैं ।संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित समारोह में आज भारत के प्रधान न्यायाधीय एन वी रमण ने मुर्मू को देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी।

ये मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं- मुर्मू
शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा, ‘राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना, मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, यह भारत के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है। मेरा निर्वाचन इस बात का सबूत है कि भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।’ मुर्मू (64 वर्ष) देश की सबसे युवा राष्ट्रपति हैं और देश की पहली ऐसी राष्ट्रपति हैं जिनका जन्म आजादी के बाद हुआ हैं । उन्होंने हिन्दी में ईश्वर के नाम पर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली ।

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