ममता के मंत्री पार्थ ने कुत्‍तों के लिए अलग से लिया था लग्जरी फ्लैट, ED ने खंगाली कुंडली

कोलकाता

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी को लेकर नए खुलासे क‍िए हैं। पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से ईडी ने 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बरामद की है। ऐसे में अब ईडी पार्थ चटर्जी की भी कुंडली खंगालने में जुट गई है। ईडी को डायमंड सिटी में पार्थ चटर्जी का एक हैरान करने वाला लग्जरी फ्लैट म‍िला है। इस फ्लैट में पार्थ चटर्जी ने अपने पालतू कुत्‍तों को रख रखा था। दरअसल पार्थ चटर्जी को कुत्‍तों से खास लगाव है। श‍िक्षामंत्री रहते पार्थ चटर्जी ने कहा था क‍ि वह अपनी पत्नी की याद को जिंदा रखने के लिए कुत्तों का अस्पताल बनाने की तैयारी शुरू की है। उनका कहना था है कि डॉग लवर पत्नी की याद में इससे बेहतर और कोई काम नहीं।

दरअसल ईडी के छापे में पार्थ चटर्जी के तीन और बंगले मिले हैं, जो क‍ि पूरी तरह से एयर कंडीशन थे। इसी में से एक में पार्थ चटर्जी के पालतू कुत्ते रहा करते थे। ईडी की जांच में पता चला है कि पार्थ चटर्जी के पास अथाह पैसा था और वह फ्लैट नंबर 18/D, 19/D और 20/D के अकेले मालिक थे। ये सभी फ्लैट डायमंड सिटी में ही थे। ईडी ने बताया क‍ि इन्हीं में से एक फ्लैट में अर्पिता मुखर्जी रहा करती थीं। जो क‍ि पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी रही हैं।

पार्थ चटर्जी की करीबी के घर म‍िले थे 21 करोड़ रुपये कैश
ईडी ने अर्पिता मुखर्जी के घर से 21 करोड़ रुपये कैश और लाखों का सोना बरामद क‍िया था। इसके बाद पार्थ चटर्जी की गिरफ्तार हुई। ED के मुताब‍िक, पार्थ चटर्जी के पास तीनों के अलावा भी औकई फ्लैट हैं। इसके अलावा उनके कुछ बंगलों में करीबी रह रहे हैं। ऐसे में ईडी अब नए करीब‍ियों के ख‍िलाफ भी छापेमारी की तैयारी कर रही है।

26 घंटे की पूछताछ के बाद अरेस्‍ट हुए थे पार्थ चटर्जी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीते शन‍िवार को 26 घंटे की पूछताछ के बाद शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के संबंध में शनिवार को गिरफ्तार क‍िया था। 69 साल के चटर्जी, वर्तमान में ममता बनर्जी सरकार में उद्योग और संसदीय मामलों के विभाग को संभाल रहे हैं। वह वर्ष 2014 से 2021 तक शिक्षा मंत्री थे। उनके शिक्षा मंत्री रहने के दौरान शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताएं हुईं।

साठ के दशक के उत्तरार्ध में राजनीति में आए चटर्जी
चटर्जी ने साठ के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस की छात्र शाखा-छात्र परिषद के नेता के रूप में राजनीति में कदम रखा।तब वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। वह तत्कालीन तेजतर्रार युवा नेताओं सुब्रत मुखर्जी और प्रिय रंजन दासमुंशी से प्रेरित थे। सत्तर के दशक के मध्य में एक हाई-प्रोफाइल कारपोरेट नौकरी करने का फैसला करने के बाद उनका राजनीतिक करियर रुक गया। ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होने और एक जनवरी 1998 को तृणमूल कांग्रेस का गठन करने के बाद चटर्जी ने सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया।

पांच बार बेहाला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए चटर्जी
वह तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2001 से लगातार पांच बार बेहाला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। चटर्जी का सियासी सफर वर्ष 2006 में तब शिखर पर पहुंचा, जब विधानसभा में वह तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता बने और बाद में नेता प्रतिपक्ष बने। जब ममता बनर्जी ने सिंगूर और नंदीग्राम में कथित जबरन भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर बंगाल की सड़कों पर शक्तिशाली वाम मोर्चा शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तो चटर्जी विधानसभा में विपक्ष की आवाज बन गए।

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