बांग्लादेश का खजाना खाली, होगा दिवालिया! इस फैसले से बढ़ी आशंका

नई दिल्ली,

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में आर्थिक हालात बदतर होते जा रहे हैं. ऐसे में बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 4.5 अरब डॉलर का कर्ज मांगा है. इस संबंध में बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने आईएमएफ को आधिकारिक तौर पर पत्र लिखा है द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जिवा को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि देश की आर्थिक बदहाली के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने और बांग्लादेश पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए कर्ज की जरूरत है.

बांग्लादेश बैंक के डेटा के मुताबिक, पिछले साल जुलाई से इस साल मई के बीच बांग्लादेश का आयात 81.5 अरब डॉलर रहा जो एक साल पहले की तुलना में 39 फीसदी अधिक है.बांग्लादेश का चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2021-2022 के शुरुआती 11 महीनों में छह गुना से अधिक बढ़कर 17.2 अरब डॉलर हो गया.बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेज गिरावट देखने को मिली है. 20 जुलाई तक बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार 39.7 अरब डॉलर है.बांग्लादेश में जून महीने में महंगाई दर नौ महीने के उच्च स्तर पर रही. इस दौरान महंगाई दर 7.56 फीसदी रही.

वित्त मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ऐसी पूरी संभावना है कि आईएमएफ से मिलने वाली 4.5 अरब डॉलर की धनराशि में से 1.5 अरब डॉलर पर कोई ब्याज नहीं लगेगा और बाकी धनराशि पर दो फीसदी से कम ब्याज लगेगा.आईएमएफ से इस तरह मदद की गुहार लगाने का मतलब है कि बांग्लादेश उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आईएमएफ से कर्ज की मांग कर चुके हैं.

इस महीने की शुरुआत में आईएमएफ ने पाकिस्तान को चार अरब डॉलर का पैकेज देने पर सहमति जताई थी. यह पैकेज अगले साल तक पाकिस्तान को दिया जाएगा. इसके साथ ही तंजानिया को 1.05 अरब डॉलर और घाना को 1.5 अरब डॉलर का आर्थिक पैकेज देने की सहमति जताई.रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में बांग्लादेश की आईएमएफ के साथ सितंबर में बैठक हो सकती है, जिस दौरान कर्ज को लेकर शर्तों को अंतिम रूप दिया जाएगा.

अधिकारियों का कहना है कि इस साल दिसंबर तक दोनों पक्षों के बीच इस डील को लॉकइन कर जनवरी में आईएमएफ की बोर्ड मीटिंग के समक्ष पेश किया जाएगा.बता दें कि आमतौर पर आईएमएफ से मिलने वाले कर्ज से जुड़ी शर्तें बहुत सख्त होती हैं, जिनका पालन नहीं करने पर गंभीर खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है.

भारत के दो अन्य पड़ोसी देशों पाकिस्तान और श्रीलंका की आर्थिक बदहाली किसी से छिपी नहीं है. श्रीलंका में हालात इतने बदतर हो गए कि लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ा. राष्ट्रपति को देश छोड़कर किसी अन्य देश में शरण लेनी पड़ी. वहीं, पाकिस्तान का सरकारी खजाना लगभग खाली हो गया है, वहां महंगाई दर आसमान छू रही है और पाकिस्तानी रुपया निचले स्तर तक लुढ़क गया है.

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