ताइवान पर हमला कर जीत तो लेंगे शी जिनपिंग लेकिन चीन को चुकानी होगी खूनी कीमत

वॉशिंगटन

अमेरिकी कांग्रेस की स्‍पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा पर भड़का चीन शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। मिलिट्री ड्रिल की धमकी देने वाले चीन ने कहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका को इस यात्रा के नतीजे भुगतने होंगे। पेलोसी से पहले जब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन पूर्वी एशिया की अपनी पहली यात्रा पर गए तो उस समय उन्‍होंने भी साफ कर दिया था कि चीन की तरफ से ताइवान पर होने वाले किसी भी हमले में अमेरिका उसकी रक्षा करेगा। जब से यूक्रेन पर रूस ने हमला किया है तब से ही विदेश नीति के जानकार मान रहे हैं चीन भी ताइवान को लेकर ऐसा ही कोई कदम उठा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो न सिर्फ ताइवान बल्कि अमेरिका और जापान की तुलना में भी चीन के पास ज्‍यादा सैनिक, मिसाइलें और बहुत से हथियार हैं। अगर ताइवान पर कोई भी हमला हुआ तो फिर उसकी स्थिति बहुत ही जटिल हो जाएगी। एक नजर डालिए कि अगर आज युद्ध होता है तो फिर स्थिति क्‍या होगी।

नौसेना की ताकत
ताइवान की जनसंख्‍या 24 मिलियन है और ज्‍यादातर आबादी राजधानी ताइपे में है। यहां पर एक स्‍क्‍वॉयर किलोमीटर पर 9575 लोग रहते हैं। जबकि यूक्रेन के मारियोपोल में ये आंकड़ा 2690 था। ऐसे में चीन भले ही ताकतवर हो लेकिन वो ताइवान पर कब्‍जे से पहले दो बार सोचेगा क्‍योंकि अगर वो यहां दाखिल होता है तो स्थिति बहुत मुश्किल हो जाएगी। चीन की नौसेना दुनिया में सबसे बड़ी है और इसके पास 360 लड़ाकू जहाज हैं। जबकि अमेरिका के पास सिर्फ 300 जहाज ही हैं। सिर्फ इतना ही नहीं चीन के पास दुनिया की सबसे एडवांस्‍ड मर्चेंट शिप, कोस्‍ट गार्ड और समुद्री सैनिक हैं। इस वजह से ही कई बार विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो वो सबसे पहले समुद्र के रास्‍ते से ही दाखिल होगा।

ताइवान की मिसाइलें
इयान एस्‍टन जो कि प्रोजेक्‍ट 2049 इंस्‍टीट्यूट के डायरेक्‍टर हैं, वो मानते हैं कि चीन को जीत हासिल करने के लिए पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) सैनिकों के साथ हजारों टैंक, तोपखाने की बंदूकें, बख्तरबंद कर्मियों के वाहन और रॉकेट लांचर ले जाने होंगे। उपकरणों के पहाड़ और ईंधन की झीलों को उनके साथ पार करना होग और ताइवान का जो साइज है, उसमें ये एक मुश्किल मिशन होगा। स्‍कॉटलैंड स्थित सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के फिलिप ओ ब्रायन की मानें तो चीन का ताइवान पर हमले का ख्‍याल ही चीनी नौसेना के लिए नरसंहार सा लगता है। ताइवान के पास सस्‍ती और लैंड बेस्‍ड एंटी-शिप मिसाइलें हैं।

ये बिल्‍कुल यूक्रेन की उसी नैप्‍चूयन मिसाइल सी है जिसने इस साल अप्रैल में रूस के जहाज मॉस्‍कवा को डूबा दिया था। न्‍यू अमेरिकी सिक्‍योरिटी पर एक विशेषज्ञ और यूएस नेवी की सबमरीन पर बतौर कैप्‍टन तैनात रहने वाले थॉमस शुगार्ट की मानें तो ऐसा कोई भी ऑपरेशन बहुत दिनों तक चलेगा, भले ही चीन की नौसेना कितनी ही ताकतवर क्‍यों न हो। चीनी नौसेना मिलिट्री क्षमता और पूरी ताकत के साथ समुद्री मिशन को अंजाम देने में काफी कमजोर है।

अमेरिकी नेवी करेगी मदद
अगर चीनी नौसेना किसी भी तरह से समुद्र के रास्‍ते ताइवान पर हमला करने की सोचेगी तो फिर उसका सामना निश्चित तौर पर अमेरिकी नौसेना से होगा। अमेरिकी नौसेना ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर्स से लेकर एमफीबिशियस शिप जो एफ-35 और एफ-18 जैसे जेट्स से लैस हैं उन्‍हें ताइवान के आसपास ही तैनात किया है।

अमेरिका के पास कुल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर्स हैं जबकि चीन के पास केवल दो ही कैरियर्स हैं। हालांकि सबसे बड़ी चिंता चीन की DF-25 और DF-21D एयरक्राफ्ट किलर मिसाइलें हैं। साल 2020 में ग्‍लोबल टाइम्‍स ने इन मिसाइलों को दुनिया की पहली ऐसी बैलेस्टिक मिसाइलों के तौर पर करार दिया था जो किसी भी मध्‍यम आकार के जहाज को तबाह कर सकती हैं।

हवा में कैसा होगा युद्ध
चीन हमेशा दावा करता है कि उसकी वायुसेना किसी भी युद्ध में दुश्‍मन पर भारी पड़ेगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि चीन के पास हवा में दुश्‍मन पर भारी पड़ने का मौका है। फ्लाइट ग्‍लोबल 2022 की मानें तो चीन की वायुसेना के पास करीब 1600 लड़ाकू जहाज हैं जबकि ताइवान के पास सिर्फ 300 ही जहाज हैं। जबकि अमेरिकी अगर बात करें तो ये आंकड़ा 2700 है लेकिन ये सभी फाइटर जेट्स चीन को पूरे क्षेत्र में घेरने की ताकत रखते हैं। एरियल वॉर में चीन ने रूस की असफलताओं से सीख ली है।

यूक्रेन पर हवा से हमले करने में रूस फेल रहा है और कई बार तो खुद हैरान रह गया है। लेकिन इसके बाद भी चीन को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ताइवान ने अमेरिका के साथ डील की है जिसके तहत उसे खतरनाक स्टिंगर एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें और पैट्रियॉट मिसाइल डिफेंस बैटरीज हासिल हुई हैं। साथ ही ताइवान अपने मिसाइल उत्‍पादन पर भी काफी भरोसा रखता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन सालों की अगर बात करें तो ताइवान की मिसाइल उत्‍पादन क्षमता तीन गुना तक बढ़ गई है। चाइना पावर प्रोजेक्‍ट के मुताबिक चीन के पास ऐसी कम से कम 425 मिसाइलें हैं जो अमेरिकी बेसेज को निशाना बना सकती हैं। लेकिन ये काफी नहीं है और यहां भी चीन को काफी मुश्किलें होंगी।

जमीन पर मुंह की खाएगा चीन
चीन को ये उम्‍मीद है कि वो जमीन पर ताइवान को ढेर कर सकता है। जबकि हकीकत इससे अलग है। ताइवान के पास 150000 सैनिक हैं जबकि 2.5 मिलियन रिजर्व हैं। इस देश की राष्‍ट्रीय रक्षा नीति इस तरह की है जो चीन के घुसपैठ का जवाब दे सके। ताइवान के पास अपनी जमीन का फायदा होगा और वो हर जगह से वाकिफ है। साथ ही इसकी रक्षा के लिए भी सैनिक पूरे प्रयास करेंगे। जमीन से युद्ध में चीन ताइपे में खासी मुश्किलें होने वाली हैं। विशेषज्ञों ने उन 14 समुद्री किनारों की पहचान कर दी है जहां पर चीन को मुंह की खानी पड़ सकती है।
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ताइवान को भी इन इलाकों के बारे में सारी जानकारी है। ताइवान के इंजीनियर्स ने कई साल की मेहनत के बाद इन जगहों पर देश की सुरक्षा के लिए कई बंकर्स और सुरंग तैयार कर ली हैं। ताइवान के सैनिक चीनी सैनिकों की तुलना में ज्‍यादा जोश में होंगे और वो उन्‍हें आसानी से मात दे सकते हैं। चीन के पास पैराट्रूपर्स की कमी है और ये बात उसकी परेशानियों को दोगुना कर देगी।

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