वैश्विक हथियारों की दौड़ क्यों जीत सकता है चीन? क्या खत्म हो जाएगी अमेरिका की बरसों की बादशाहत

बीजिंग

अमेरिका और ताइवान से जारी तनाव के बीच चीन तेजी से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। चंद दिनों पहले ही चीन ने अपने सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान को लॉन्च किया है। कई पश्चिमी पर्यवेक्षक और जानकार मानते हैं कि पूरी दुनिया में सैन्य शक्ति के वैश्विक संतुलन में गहरा बदलाव चल रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के सशस्त्र बलों को 2035 तक आधुनिकीकरण करने का आदेश दिया है। उनके अनुसार, उन्हें एक विश्व स्तरीय सैन्य शक्ति बनना चाहिए, जो 2049 तक युद्ध लड़ने और जीतने में सक्षम हो। यही कारण है कि चीन 2015 से ही काफी तेजी से अपनी नौसैनिक ताकत को बढ़ा रहा है। ताइवान के साथ जारी तनाव को देखते हुए भी चीन की सैन्य शक्ति के विस्तार को काफी अहम माना जा रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना, सबसे शक्तिशाली नहीं
चीन की तुलना में अमेरिकी नौसेना के पास संख्या में भले ही कम युद्धपोत हैं, लेकिन उनकी मारक क्षमता काफी ज्यादा है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के रक्षा विश्लेषक निक चिल्ड्स के अनुसार, अमेरिका के पास अपने युद्धपोतों से लॉन्च किए जाने वाले 9000 से अधिक वर्टिकल लॉन्च मिसाइल सेल्स मौजूद हैं, जबकि चीन के पास यह क्षमता केवल 1000 के आसपास है। ऐसे में मिसाइलों के मामले में चीन कहीं भी अमेरिका को टक्कर नहीं दे सकता है। इसके अलावा अमेरिकी नौसेना के 50 पनडुब्बियों में सभी के सभी परमाणु शक्ति से संचालित होती हैं। वहीं, चीन के पास कहने को तो 62 पनडुब्बियां हैं, लेकिन उनमें से केवल 7 ही परमाणु शक्ति से चलती हैं।

2040 तक नौसैनिक युद्धपोतों को 40 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य
अमेरिकी नौसेना ने भविष्यवाणी की है कि 2020 और 2040 के बीच, चीनी नौसेना के जहाजों की कुल संख्या में लगभग 40% की वृद्धि होगी।बीजिंग में सिंघुआ विश्वविद्यालय के पूर्व पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के वरिष्ठ कर्नल झोउ बो का कहना है कि चीन का नौसैनिक विस्तार समुद्र आधारित खतरों का मुकाबला करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है, जिसका वह सामना करता है। हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या चीनी जल क्षेत्र में अमेरिकी उकसावे की घटनाए हैं। पिछले महीने तो दो बार अमेरिकी युद्धपोतों ने दक्षिण चीन सागर के विवादित इलाके में प्रवेश किया था। तब चीन ने दावा किया था कि उसने अमेरिकी युद्धपोत को खदेड़ दिया था, लेकिन अमेरिका ने कहा था कि वह स्वतंत्र नौवहन के अधिकार के तहत ऐसी कार्रवाई करता रहेगा।

दुनिया से छिपाकर गुपचुप सैन्य खर्च बढ़ा रहा चीन
सैन्य बजट के मामले में चीन दुनिया में दूसरे नंबर पर है। 2021 में चीन का सैन्य बजट 293 बिलियन डॉलर था। यह चीन की जीडीपी का 1.7 फीसदी है। इतना ही नहीं, दुनिया के सैन्य बजट में चीन की हिस्सेदारी 14 फीसदी है। वहीं, कुछ कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपने रक्षा बजट से जुड़े वास्तविक आंकड़ों को छिपा रहा है। वाशिंगटन में सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, चीन के सैन्य बजट की वृद्धि ने कम से कम एक दशक के लिए अपने समग्र आर्थिक विकास को पीछे छोड़ दिया है। पिछले साल चीन का रक्षा बजट 200 अरब डॉलर के पार गया था। चीन ने वित्त वर्ष 2021 में अपने रक्षा बजट में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि की थी जिससे उसका कुल रक्षा बजट 209 अरब डॉलर हो गया था।

2025 तक चीनी नौसेना में 400 से ज्यादा युद्धपोत शामिल करने का लक्ष्य
यूएस ऑफिस ऑफ नेवल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के बेड़े में 255 युद्धपोत थे। 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 360 तक पहुंच गया। अब चीनी नौसेना 2025 तक अपने बेड़े में 400 से ज्यादा युद्धपोत को शामिल करने की तैयारी में है। चीन ने 2020 में में संख्या के मामलों में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया था। चीनी नौसेना के बेड़े में युद्धपोत, पनडुब्बियां, एयरक्राफ्ट कैरियर, लड़ाकू विमान, एम्फिबियस असाल्ट शिप, बैलिस्टिक न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी, आधुनिक पेट्रोल वेसल और पोलर आइसब्रेकर शिप शामिल हैं। इनके अलावा भी बड़े पैमाने पर नए-नए युद्धपोतों का निर्माण किया जा रहा है।

परमाणु हथियारों के भंडार को भी बढ़ा रहा चीन
नवंबर में, अमेरिकी रक्षा विभाग ने भविष्यवाणी की थी कि चीन मौजूदा दशक के अंत तक अपने परमाणु भंडार को चौगुना करने के लिए तैयार है। वहीं, चीन का कहना है कि 2030 तक कम से कम 1,000 हथियार रखने का इरादा रखता है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के अनुसार, चीन हाल के वर्षों में अपने परमाणु हथियारों की संख्या में वृद्धि कर रहा है। चीन अभी भी अमेरिका के 5550 परमाणु हथियारों के भंडार से काफी दूर है, लेकिन इसकी बढ़ती भूख को पश्चिमी सैन्य वर्चस्व के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। लंदन में रॉयल यूनाइटेड गूठे के निशान और हस्ताक्षर शामिल हैं।

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