सतर्क रहे नेपाल, भारत कब्जा कर रहा जमीन… हड़पबाजी में कुख्यात चीन की बदमाशी तो देखिए

बीजिंग

चीन पूरी दुनिया में दूसरों की जमीन पर हक जताने के लिए कुख्यात है। इस कारण रूस, मंगोलिया समेत चंद देशों को छोड़कर चीन का अपने हर पड़ोसी के साथ सीमा विवाद है। अब वही चीन पड़ोसी देश नेपाल को भारत के खिलाफ भड़का रहा है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि भारत धीरे-धीरे नेपाल की जमीन पर कब्जा कर रहा है। जबकि, सच्चाई यह है कि चीन ने नेपाल के अंदर कई किलोमीटर तक की जमीन पर जबरन कब्जा कर कई स्थायी निर्माण कर लिए हैं। इतना ही नहीं, चीनी सेना ने नेपाल सीमा पर लगी कई बॉर्डर पिलर को भी उखाड़ कर फेंक दिया है। खुद नेपाली गृह मंत्रालय की कमेटी ने स्वीकार किया है कि उसकी जमीन पर चीन ने कब्जा किया हुआ है। इस कमेटी ने पिछले साल अक्टूबर में ही प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।

भारत-अमेरिका सैन्य अभ्यास पर भड़का चीन
ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा कि भारत सीमा पर लगातार नए कदम उठा रहा है। 14 से 31 अक्टूबर तक, भारत और अमेरिका उत्तराखंड के औली में वार्षिक युद्धाभ्यास आयोजिक करने वाले हैं। ग्लोबल टाइम्स ने आरोप लगाया कि भारत ने जानबूझकर वास्तविक नियंत्रण रेखा से 100 किलोमीटर की दूरी पर इस युद्धाभ्यास को आयोजित करने का फैसला किया है। भारत ने 8 अगस्त को हिमाचल प्रदेश में अमेरिका के साथ 24 दिनों तक चलने वाले एक और युद्धाभ्यास वज्र शक्ति को भी शुरू किया था। लेख में आरोप लगाया गया है कि भारत ने चीन को निशाना बनाने के लिए अमेरिका के साथ इस इलाके में सैन्य अभ्यास करने का फैसला किया है।

कालापानी में नेपाली जमीन पर भारत के कब्जे का दावा किया
ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में झूठा दावा करते हुए लिखा कि भारत एएसी के पास चीन के इलाके में अतिक्रमण के प्रयासों में मुश्किल का सामना कर रहा है। इस काऱण वह तीसरे देश की सीमा पर अपने नियंत्रण और अतिक्रमण को मजबूत करने के लिए दूसरे पड़ोसियों की ओर रुख किया है। ग्लोबल टाइम्स ने नेपाल को चढ़ाते हुए लिखा कि हाल के वर्षों में, चीन, भारत और नेपाल के जंक्शन पॉइंट कालापानी क्षेत्र में, नई दिल्ली ने भी जितना संभव हो सके कब्जा करने की कोशिश की है, जिससे नेपाली पक्ष ने कड़ा विरोध किया है। चीन-भारत-नेपाल सीमा के पास कालापानी क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच पारंपरिक रूप से विवादित क्षेत्र है।

नेपाल के विवादित मानचित्र वाली घटना की याद दिलाई
ग्लोबल टाइम्स ने तथ्यों के साथ खिलवाड़ करते हुए कहा कि भारत ने मई 2020 में एलएसी पर यथास्थिति को चुनौती दी थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने काला पानी में बनाए सड़क का उद्घाटन किया, जिससे भारत और नेपाल के बीच घरेलू विवाद शुरू हो गया। चीनी मीडिया ने दावा किया किया कि भारत ने नवंबर 2019 में कालापानी को अपने मानचित्र में शामिल कर लिया, जिसके जवाब में नेपाल ने मई 2020 में अपना नया राजनीतिक मानचित्र जारी कर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपना हिस्सा बताया था।

शेर बहादुर देउबा को बताया भारत का करीबी
लेख में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने नेपाल की मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह भारत के इस कदम पर चुप है। इतना ही नहीं, ग्लोबल टाइम्स ने तो नेपाली प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को भी भारत समर्थक घोषित कर दिया। उसने कहा कि यही कारण है कि देउबा सरकार भारत के साथ टकराव को टालने की कोशिश कर रही है। चीन ने सिक्किम का उदाहरण देते हुए नेपाल को चढ़ाने की कोशिश की। उसने कहा कि भारतीय सेना 1962 में सिक्किम की रक्षा के बहाने पहुंची थी और वहीं रुक गई।

नेपाल ने खुद कबूला- हमारी जमीन पर चीन का कब्जा
पिछले साल नेपाली गृह मंत्रालय की कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि चीन ने नेपाल के हुमला इलाके में घुसपैठ की है। काठमांडू पोस्ट ने बताया कि इस कमेटी में शामिल संयुक्त सचिव जय नारायण आचार्य ने पिलर नंबर 4 से 13 तक की समस्याओं की पहचान की है। रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने नेपाल की राज्य नीति में सीमा मुद्दों को शामिल करने और इनके स्थायी समाधान के महत्व पर जोर दिया है।

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