6.4 C
London
Monday, March 23, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयशर्तों बदलने पर अड़ता दिख रहा है रूस, भारतीय नौसेना के लिए...

शर्तों बदलने पर अड़ता दिख रहा है रूस, भारतीय नौसेना के लिए सबसे बड़ा प्रोजेक्‍ट मुश्किल में

Published on

मॉस्‍को

रूस ने भारतीय नौसेना के लिए साइन हुई उस डील से हाथ खींच लिए हैं, जिसके तहत 6 एडवांस्‍ड पनडुब्बियों का निर्माण होना था। इस डील को प्रोजेक्‍ट-75I नाम दिया गया है। रूस की तरफ से भारत को इस बारे में बता दिया गया है। ये डील 40,000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की है। रूस के एक सीनियर अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि जो शर्तें भारत की तरफ से रखी गई थीं, वो पूरी तरह से अवास्‍तविक हैं। उनकी मानें तो जब तक इन शर्तों को नहीं बदला जाता, तब तक ये प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती है।

शर्तें बहुत ही सख्‍त
रक्षा मंत्रालय की तरफ से इस प्रोजेक्‍ट की डेडलाइन को 30 जून को अगले 6 महीने के लिए बढ़ाया जा चुका है। अब दिसंबर माह के अंत तक इस डेडलाइन में रूस को फैसला लेना होगा। रूस की रूबिन डिजाइन ब्‍यूरो के डिप्‍टी डायरेक्‍टर जनरल आंद्रे बारानोव ने आर्मी-2022 एक्‍सपो में कहा कि जो जरूरतें भारत की तरफ से रिक्‍वेस्‍ट फॉर प्रपोजल (RFI) में रखी गई हैं, वो बहुत ही सख्‍त हैं। इन शर्तों के बाद डिजाइनर पर बहुत ज्‍यादा जिम्‍मेदारियां आ जाती हैं। उनका कहना है कि डिजाइनर का निर्माण पर कोई नियंत्रण नहीं है जो कि भारत में होता है।

उनका कहना था कि पहले रूस ने इस प्रोजेक्‍ट से हाथ खीचें और फिर फ्रांस भी इससे बाहर हो गया। उन्‍होंने कहा है कि अगर डिजाइन की बात की जाए तो प्रोजेक्‍ट काफी अच्‍छा है। लेकिन इसे कैसे लागू किया जाएगा, ये चिंता का विषय है क्‍योंकि ये काम भारत में होना है। उनका कहना था कि ये अच्‍छा नहीं है और इसलिए प्रोजेक्‍ट रुका हुआ हुआ है। उनकी मानें तो बिना बदलाव के ये प्रोजेक्‍ट आगे नहीं बढ़ सकता है।

क्‍या हैं भारत की शर्तें
भारतीय नौसेना ने भी रक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया है कि कुछ शर्तों में ढील दी जानी चाहिए। बारानोव ने कहा कि नौसेना की तरफ से जो खास जरूरतें रखी गई हैं, वही दरअसल चिंता का विषय हैं। उन्‍होंने बताया कि इंडियन नेवी चाहती है कि प्रोजेक्‍ट के तहत ट्रांसफर ऑफ टेक्‍नोलॉजी, ताकतवर मिसाइलों के साथ स्‍टेट ऑफ आर्ट पनडुब्‍बी हों, स्‍टेल्‍थ और ऐसी ही कुछ शर्तें रखी गई हैं। लेकिन दुनिया में किसी भी नौसेना के पास इस तरह की पनडुब्‍बी का प्रोटोटाइप मौजूद नहीं है।

इसके अलावा जो शर्त रखी गई है उसके तहत पनडुब्‍बी का निर्माण भारत में हो और अगर तय समय में निर्माण पूरा नहीं होगा तो भारी जुर्माना अदा करना होगा। जनवरी 2020 में रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने मझगांव डॉक्‍स लिमिटेड और लार्सन एंड टूर्बो को प्रोजेक्‍ट में भारतीय पार्टनर के तौर पर नामित किया था। इसके अलावा साउथ कोरिया के दो, फ्रांस का एक, स्‍पेन, रूस और जर्मनी की एक-एक कंपनियों का चयन किया गया था।

Latest articles

बीएचईएल की बड़ी उपलब्धि: 100वें पावर ट्रांसफॉर्मर का सफल निर्माण, ईडी ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

भोपाल भेल भोपाल के परिणामित्र (ट्रांसफॉर्मर) विनिर्माण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सफलता का...

आकृति रिट्रीट में विकास कार्यों का शिलान्यास: राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने किया 31.50 लाख के कार्यों का भूमि पूजन

भोपाल राजधानी के बावड़ियाँ कलाँ स्थित आकृति रिट्रीट कॉलोनी में विकास की नई इबारत लिखते...

नगर निगम पेड़ों की कटाई पर सख्ती की तैयारी, जुर्माना और शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव

भोपाल राजधानी की हरियाली को बचाने और अवैध कटाई पर अंकुश लगाने के लिए नगर...

दादाजी धाम में माँ कूष्मांडा का विधि-विधान से पूजन, गुरु गीता और हनुमान चालीसा के पाठ से गूंजा मंदिर

भोपाल रायसेन रोड स्थित पटेल नगर के प्रतिष्ठित तीर्थ स्थल 'दादाजी धाम मंदिर' में चैत्र...

More like this

असम में भाजपा की ताकत का प्रदर्शन, भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भरी हुंकार

विधानसभा चुनाव में पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार...

ईरान-अमेरिका टकराव: दोनों देशों ने जताया जीत का दावा, बढ़ा वैश्विक तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान: Donald Trump और ईरान के नेताओं के बीच जारी बयानबाज़ी ने दुनिया की चिंता...

ट्रंप की दहाड़: ‘ईरान के साथ कोई सीजफायर नहीं!’ चीन और जापान को लेकर कह दी इतनी बड़ी बात कि मच गई खलबली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक ताजा बयान इस वक्त पूरी दुनिया में चर्चा...