मुश्किल में बायजूस, 17 महीने बाद भी नहीं दिया हिसाब-किताब, फंडिंग पर उठ रहे हैं सवाल

नई दिल्ली

देश की सबसे मूल्यवान स्टार्टअप कंपनी बायजूस (Byju’s) की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। कंपनी की फंडिंग पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने मार्च 2021 को खत्म फाइेंशियल ईयर के लिए अभी तक ऑडिटेड अकाउंट्स फाइल नहीं किया है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने इस बारे में कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। इस महीने की शुरुआत में कंपनी के भेजे एक पत्र में मंत्रालय ने पूछा है कि 17 महीने बीत जाने के बाद भी उसने ऑडिटेड अकाउंट्स फाइल क्यों नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक कंपनी अगले हफ्ते अपना हिसाब-किताब फाइल कर सकती है। बायजूस देश की सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप है और दुनिया के सबसे वैल्यूएबल एडटेक स्टार्टअप कंपनी है। इसका वैल्यूएशन करीब 22 अरब डॉलर है।

रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने मंत्रालय को दिए जबाव में कहा है कि अकाउंटिंग ईयर के दौरान उसने कई कंपनियों का अधिग्रहण किया था। इस कारण अकाउंट्स के कंसोलिडेशन के कारण फाइलिंग में देरी हुई है। बायजूस अनलिस्टेड कंपनी है। नियमों के मुताबिक अनलिस्टेड कंपनियों को फाइनेंशियल ईयर खत्म होने के सात महीने के भीतर अपना सालाना लेखाजोखा फाइल करना होता है। इस अवधि के बाद उन्हें हरेक दिन के लिए अतिरिक्त फीस देनी होती है। अगर बहुत ज्यादा देर हो जाती है तो कंपनी और उसके डायरेक्टर्स पर जुर्माना लग सकता है। दो साल से ज्यादा देर होने पर उनके खिलाफ मुकदमा भी हो सकता है।

सवालों के घेरे में फंडिंग
बायजूस की फंडिंग पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले महीने कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम ने बायजू रवीन्द्रन की अगुवाई वाली इस यूनिकॉर्न कंपनी की फंडिंग की जांच करने की मांग की थी। उनका आरोप है कि इस कंपनी में सबकुछ ठीक नहीं है और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को इसकी जांच करनी चाहिए। बायजूस ने हाल में 80 करोड़ डॉलर जुटाने का दावा किया था। लेकिन कंपनी की ताजा फंडिंग राउंड में हिस्सा लेने वाली कई कंपनियों ने अब तक अपना वादा पूरा नहीं किया है। इससे कंपनी की फंडिंग पर सवाल उठ रहे हैं।

कार्ति चिदंबरम ने कहा कि इस मामले की गहराई से जांच की जानी चाहिए। कंपनी के फाइनेंसेज के बारे में कई तरह खबरें आ रही हैं। कंपनी ने मार्च में 80 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाने का दावा किया था। लेकिन इस फंडिंग राउंड में हिस्सा लेने वाली दो कंपनियों Sumeru Ventures और Blackrock ने पैसा नहीं दिया है। इन कंपनियों में बायजूस में करीब 2500 करोड़ रुपये लगाने का वादा किया था। हालांकि कंपनी का कहना है कि उसके फंड जुटाने के प्रयास पटरी पर हैं और 80 करोड़ डॉलर में से अधिकांश रकम मिल चुकी है।

कर्मचारियों की छंटनी
बायजूस के मुताबिक 2019-20 में उसका रेवेन्यू 81 फीसदी की तेजी के साथ 2,434 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान कंपनी को 51 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ था जो उससे पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में 152 फीसदी अधिक है। बायजूस ने हाल में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की है। लॉकडाउन के दौरान एडटेक सर्विसेज की मांग में भारी तेजी आई थी लेकिन अब इनकी डिमांड में काफी गिरावट आई है।

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