आधी रात भूकंप की आपबीती: हिलने लगा बेड, खौफ में बदहवास भौंकने लगे कुत्ते

नई दिल्ली:

आधी रात को नेपाल से लेकर पूरा उत्तर भारत जोरदार भूकंप के झटकों से सहम गया। तीव्रता 6.3 मापी गई है और केंद्र नेपाल में था, जो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से मात्र 90 किमी दूर है। नेपाल में जानमाल का काफी नुकसान हुआ है। धीरे-धीरे खबरें भी आने लगी हैं। मरने वालों की संख्या फिलहाल 6 बताई गई है और मकानों को काफी नुकसान पहुंचा है। इधर, दिल्ली-नोएडा में रहने वाले लोगों के लिए यह मंजर डरावना था। लोग घर से निकलकर सड़क पर भागने लगे थे। दरअसल, सुबह जल्दी उठना हो तो रात में जल्दी सोना भी पड़ता है। 2 बजे रात हम सभी गहरी नींद में थे तभी लगा जैसे कोई बेड हिला रहा है। फ्लैट कल्चर में आधी रात के बाद भला कौन आ सकता है? हड़बड़ाकर उठा और यह समझने में सेकेंड भर लगे कि यह तो भूकंप है। पंखा चल रहा था, आसपास देखने लगा जिससे यह पुख्ता किया जा सके कि धरती डोलने से बेड हिलने लगा था या कोई वहम था। 30 मंजिला बिल्डिंग है इसलिए झटका आसानी से महसूस हो जाता है। इतने में दाहिनी तरफ आलमारी में टंगी चाबी पर नजर पड़ी। दो चाबियों के गुच्छे में एक चाबी लगी थी और जो लटकी थी वो तेजी से हिल रही थी। बालकनी के सामने मैदान में कुत्ते भी बदहवास भौंक रहे थे।

हम बिस्तर छोड़ चुके थे। बालकनी से झांककर देखा तो टावर के सामने भीड़ जमा हो गई थी। लोग सोशल मीडिया पर लिखना शुरू कर चुके थे। हम ग्रेटर नोएडा में थे लेकिन सोशल मीडिया से पता चला कि नेपाल में बड़ा भूकंप आया है और उसके झटके पूरे उत्तर भारत में महसूस किए गए हैं। झटके के अनुभव से ही साफ हो गया था कि यह 6 तीव्रता से बड़ा भूकंप था। पिछले 10 साल में दिल्ली-एनसीआर के झटके महसूस होते-होते अब हल्के झटके भी पता चल जाते हैं।

30 मंजिला बिल्डिंग का क्या होगा?
अगले मिनट में हम भी टावर के नीचे उतर चुके थे। मन में घबराहट थी कि अगर कोई अनहोनी होती है तो भला 30 मंजिला बिल्डिंग का क्या होगा। क्या हम सुरक्षित घरों में रह रहे हैं? नीचे उतरकर आने का भी क्या फायदा, जैसे हम खबरों और फिल्मों में देखते हैं मलबा तो नीचे ही आता है। ऐसे सवालों पर चर्चा शुरू हो गई थी। बिल्डिंग से हटकर थोड़ी दूरी पर हमारा परिवार और बाकी सभी आधे घंटे तक खड़े रहे। लेकिन कहते हैं न जब विज्ञान और इंसान की नहीं चलती तो सब ईश्वर के सहारे छोड़ना ही पड़ता है। यही सोचकर धीरे-धीरे लोग सकारात्मक बातें करने लगे और अपने घरों की ओर चल दिए। आज की रात ऐसे ही बीती। सुबह तक एक डर बना रहा कि कहीं झटके फिर न आ जाए।

वैसे भी, दिल्ली-NCR का क्षेत्र ऐसा है जहां भूकंप के झटके आना कोई असामान्य बात नहीं है। यह दूसरे सबसे ज्यादा भूकंपीय खतरे वाले जोन में पड़ता है। कब, कहां, कितनी तीव्रता का भूकंप आ जाएगा इसका अनुमान पहले लगाना संभव नहीं है। इतना जरूर है कि क्षेत्र की संवेदनशीलता के साथ हमें अलर्ट रहने की जरूरत होती है। अमेरिका से लेकर जापान तक कई देशों में रहने वाले लोगों के लिए ये आम बात है। वे तैयार रहते हैं या कहिए तैयारी रखते हैं कि भूकंप आते ही क्या करना है। लेकिन अपने देश में इसको लेकर जागरूकता या जानकारी की कमी है। कोरोना फैलने के समय भी दिल्ली-एनसीआर में लगातार कई भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

नेपाल में अबतक 6 लोगों की मौत
नेपाल में भूकंप आते रहते हैं। रात में आए जलजले में नुकसान की खबरें आने लगी हैं। शुरुआती रिपोर्ट में 6 लोगों के मारे जाने और कई घरों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। इससे पहले नेपाल में 25 अप्रैल 2015 को 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था। इस विनाशकारी जलजले ने 9,000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। करीब 25,000 लोग घायल हो गए थे। जानमाल का भारी नुकसान हुआ था।

सुबह उत्तराखंड में कांपे लोग
आज रात जो भूकंप आया, उसका केंद्र नेपाल में था। इस हिसाब से देखिए तो उत्तर भारत में केवल झटके महसूस किए गए, अगर यहां केंद्र होता तो न जाने क्या होता? रात के डरावने मंजर के बाद सुबह लोगों ने टीवी पर देखा तो साढ़े छह बजे उत्तराखंड के लोग सहम गए। यहां भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह आए भूकंप की तीव्रता 4.3 थी और इसका केंद्र पिथौरागढ़ में 5 किमी गहराई में था।

भूकंप क्यों आते हैं?
धरती में सात प्रमुख प्लेटों के अलावा कुछ छोटी प्लेटें भी होती हैं। ये प्लेटें अपने आसपास की प्लेटों की अपेक्षा अलग दिशाओं में अलग गति से बढ़ती हैं। कभी-कभी आगे चल रही प्लेट धीमी गति में होती है, तब उसके पीछे वाली प्लेट आकर टकरा जाती है। इससे झटके महसूस होते हैं। (इसी प्रक्रिया के तहत पर्वतों का निर्माण होता है)। इसके अलावा, कभी-कभी दो प्लेटें एक दूसरे से अलग हो जाती हैं।

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