कभी इसके नाम से थर्राती थी मुंबई, अमिताभ बच्‍चन ने भी उतारा स्‍टाइल, आप पहचान पाए क्या?

नई दिल्‍ली

तस्‍वीर में जो शख्‍स आपको दिख रहा है उसके नाम से कभी मुंबई थर्राती थी। खौफ के इस नाम को गरीबों का मसीहा भी कहते थे। इसने हर वो काम किया जो गैर-कानूनी था। एक समय आया जब मैगजीनों के कवर पेज पर इसकी तस्‍वीरें छपने लगीं। कई फिल्‍मों में इसके कैरेक्‍टर को दिखाया गया। यहां तक बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्‍चन ने अपनी एक फिल्‍म में इसके स्‍टाइल को उतारा था। अब तक नहीं पहचान पाए? गुनाहों के इस देवता का नाम था वरदराजन मुदालियर। वरदराजन ने शुरू में महायानगरी मुंबई में कुली का काम किया। इसके बाद जुर्म की दुनिया में कदम बढ़ाए। अंडरवर्ल्‍ड डॉन हाजी मस्‍तान के सहारे उसने करीब दो दशक तक मुंबई पर राज किया।

बात 1960 के दशक की है। उन दिनों मायानगरी मुंबई में हाजी मस्‍तान और करीम लाला का सिक्‍का चलता था। वरदराजन को तो तब तक पता भी नहीं था वह कुछ समय में अंगुलियों पर मुंबई को चलाएगा। तमिलनाडु के तूतीकोरिन से उसकी जड़े जुड़ी थीं। 1926 में वहीं उसका जन्‍म हुआ था। परिवार की स्थिति खराब थी। ऐसे में वह घर-द्वार छोड़कर मुंबई आ गया।

वीटी स्‍टेशन पर कुली का क‍िया काम
वीटी स्‍टेशन पर वरदराजन ने कुली का काम किया। स्‍टेशन के पास ही बाबा बिस्मिल्लाह शाह की दरगाह है। वरदराजन दरगाह पर गरीबों को खाना खिलाता था। स्‍टेशन पर ही एक दिन उसकी मुलाकात अवैध शराब का कारोबार करने वाले लोगों से हुई। वह छोटे-मोटे कामों से ऊब चुका था। अमीर बनने की तमन्‍ना हिलोरे मार रही थी। लालच में उसने अवैध शराब के कारोबार में कदम रख दिए। धीरे-धीरे उसका रुतबा बढ़ने लगा। वह धारावी की झुग्‍गी-झोपड़ी में रहने वाले तमिलों के लिए मसीहा बन गया था। अवैध शराब की तस्‍करी, जुआं, किडनैपिंग, रंगदारी, कॉन्‍ट्रैक्‍ट किलिंग, जमीनों पर कब्‍जा। इन सभी कामों के लिए उसने धारावी को हेडक्‍वार्टर की तरह इस्‍तेमाल किया।

हालांकि, असली किंग हाजी मस्‍तान था। एक दिन उसकी मुलाकात हाजी मस्‍तान से भी हो गई। हाजी मस्‍तान ने वरदराजन को करीम लाला से मिलवाया। इसके बाद उसने गुनाह के हर एक क्षेत्र में पैर पसार दिए। 70 का दशक आते-आते हाजी मस्‍तान ने मुंबई के इलाकों का बंटवारा कर दिया। वरदराजन के हिस्‍से ईस्‍ट और नॉर्थ मुंबई आए। माटुंगा और धारावी में वरदराजन को तमिलों का बहुत साथ मिलता था। काली कमाई का कुछ हिस्‍सा वह इनकी जरूरत पर खर्च करता था। वो वरदराजन को भगवान मानते थे। आलम यह था कि पुलिस भी उसके इलाके में जाने से कतराती थी।

इस फ‍िल्‍म में अमिताभ बच्‍चन ने स्‍टाइल क‍िया कॉपी
वरदराजन की जिंदगी पर कई फिल्‍में बनीं। 1983 में बनी फिल्‍म ‘अर्ध सत्‍य’ में जिस राम शेट्टी का किरदार सदाशिव अमरापुरकर ने निभाया था, वह वरदराजन से प्रेरित था। 1984 में फिल्‍म मशाल में अमरीश पुरी ने डॉन का किरदार निभाया। मणिरत्नम ने 1987 में वरदराजन के जीवन पर ‘नायागन’ नाम की तमिल फिल्म बनाई थी। फिर 1988 में फिल्म ‘दयावान’ में वरदराजन का किरदार विनोद खन्ना ने निभाया था। अमिताभ बच्चन ने एक इंटरव्‍यू में खुद यह बात कही थी कि फिल्म ‘अग्निपथ’ में उन्होंने कुछ डायलॉग वरदराजन स्टाइल में बोले थे।

गुनाह की दुनिया में वरदराजन के पंखों को किसी ने काटा तो वह थे पुलिस अधिकारी वाईसी पवार। वरदराजन उनके निशाने पर आ गया था। इसी अधिकारी ने वरदराजन को मुंबई से तमिलनाडु भागने के लिए मजबूर कर दिया। उसके सारे गैर-कानूनी कामों पर ताला लग गया। 2 जनवरी 1988 में चेन्‍नई में वरदराजन की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।

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