29 साल से बंद कातिल की SC से गुहार- राजीव के हत्यारे छूट गए, मुझे भी छोड़ दो

नई दिल्ली

अपनी पत्नी की हत्या करने के लिए उम्र कैद की सजा काट रहे 80 साल के स्वामी श्रद्धानंद ने सुप्रीम कोर्ट से रिहाई की गुहार लगाई है। उन्होंने दलील दी है कि अब तो राजीव गांधी के हत्यारों को भी छोड़ दिया, तो मुझे भी छोड़ दिया जाए। स्वामी श्रद्धानंद के वकील ने चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के पास याचिका दायर की है। श्रद्धानंद अपनी पत्नी शकीरा की हत्या के आरोप में 1994 से जेल में सजा काट रहे हैं।

श्रद्धानंद के वकील वरुण ठाकुर ने मुख्य चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और जे बी पर्दीवाला की पीठ के सामने दलील दी कि दोषी को हत्या के आरोप में बिना छूट या पैरोल के आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। स्वामी श्रद्धानंद पहले ही बिना किसी से मिले 29 साल जेल में बिता चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट याचिका पर सुनवाई के लिए राजी
ठाकुर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषियों की वजह से 1991 में 16 लोग मारे गए थे और 43 घायल हुए थे। उन्हें 30 साल की कैद के बाद पैरोल पर रिहा कर दिया गया है। यह समानता के अधिकार के उल्लंघन का एक मामला है। वरुण ठाकुर की दलील के बाद पीठ सुनवाई के लिए याचिका को जल्द सूचीबद्ध करने पर सहमत हुई।

2014 में पैरोल की याचिका की थी दायर
इस मामले में जल्दी सुनवाई के लिए निवेदन करते हुए ठाकुर ने कहा कि याचिकाकर्ता 80 साल से ज्यादा उम्र के हैं और मार्च 1994 से जेल में हैं। मृत्युदंड के दोषी के रूप में उन्हें तीन साल के लिए बेलगाम जेल के एकांत कारावास में रखा गया था और वह कई बीमारियों से भी पीड़ित थे। उन्होंने कहा कि छूट और पैरोल देने की उनकी याचिका 2014 में दायर की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किए जाने के बाद से यह बिना किसी सुनवाई के लंबित है।

राजीव गांधी की हत्या के दोषियों को किया रिहा
11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड में आजीवन दोषियों- नलिनी, मुरुगन, रविचंद्रन, जयकुमार, संथन उर्फ सुथेनथिराराजा और रॉबर्ट पायस को रिहा करने का आदेश दिया था। 18 मई को, सुप्रीम कोर्ट ने राजीव हत्याकांड के एक और आरोपी ए जी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश देने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया था।

बता दें कि मैसूर के पूर्व दीवान सर मिर्जा इस्माइल की पोती, शकीरा ने 21 साल के अपने पति अकबर खलीली को तलाक देने के एक साल बाद 1986 में श्रद्धानंद से शादी की थी। यह अपराध शकीरा की 600 करोड़ रुपये की संपत्ति को हड़पने के लिए किया गया था, जिसे अप्रैल-मई 1991 में किसी समय नशीला पदार्थ देकर जिंदा दफन कर दिया गया था। उसके शरीर को खोद कर निकाला गया था और 30 अप्रैल, 1994 को श्रद्धानंद को गिरफ्तार कर लिया गया था। 2000 में एक निचली अदालत ने उसे सजा सुनाई थी। 2005 में, कर्नाटक हाई कोर्ट ने सजा को जारी रखा। उनकी अपील पर, सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में मौत की सजा को ‘बिना किसी छूट के उम्र कैद’ में बदल दिया था।

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