लासित बोरफुकान, सुहेलदेव, केम्पेगोड़ा, अल्लूरी… नैरेटिव की सियासी जंग में नए नायक तलाशती BJP

नई दिल्ली,

दिल्ली में शुक्रवार को पीएम मोदी ने अहोम साम्राज्य के सेनानायक वीर लासित बोरफुकान की 400वीं जयंती पर अपने संबोधन में कहा कि भारत का इतिहास सिर्फ गुलामी का इतिहास नहीं है, भारत का इतिहास योद्धाओं का इतिहास है विजय का इतिहास है. उन्होंने कहा कि हमारे देश की कहानी अत्याचारियों के विरुद्ध अभूतपूर्व शौर्य और पराक्रम दिखाने की कहानी है.

पीएम ने कहा कि आजादी के बाद भी हमें वही इतिहास पढ़ाया गया तो गुलामी के काल में साजिश के तहत रचा गया था. उन्होंने कहा कि जब हमें स्वतंत्रता मिली तो जरूरत इस बात की थी कि हमें गुलाम बनाने वाले विदेशी एजेंडे को बदला जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया. हमें ऐसा बताया गया जैसे हम हमेशा से पीटने, लुटने और मरने वाले लोग रहे. लासित बोरफुकान को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश के हर कोने में वीर बेटे बेटियों ने आक्रांताओं का मुकाबला करते हुए अपना जीवन समर्पित कर दिया. लेकिन इस इतिहास को जानबूझकर दबाया गया.

नया नैरेटिव बनाने की कोशिश
दरअसल पीएम मोदी नैरेटिव की लड़ाई में एक ऐसा नैरेटिव तैयार करने की कोशिश में हैं जिसके केंद्र में वे भूले-बिसरे नायक हैं जो कई कारणों ने इतिहास के दस्तावेजों में दर्ज नहीं हो पाए. राजस्थान से आंध्र तक, यूपी से कर्नाटक तक बीजेपी ऐसे नायकों को सामने ला रही है और उनकी जिंदगी और साहस की कहानियों को जनता को सुना रही है. इन नायकों में पिछले 1000 सालों के वो योद्धा शामिल हैं जिनका देश के अलग अलग भागों में तत्कालीन समाज पर व्यापक प्रभाव था.

लासित बोरफुकान
24 नवंबर 1622 को पैदा हुए लासित बोरफुकान अहोम साम्राज्य के सेनापति थे. अहोम राजा चक्रध्‍वज सिंह ने उन्हें अपने साम्राज्‍य का सेनापति बनाया और सोलाधार बोरुआ, घोड़ा बोरुआ और सिमूलगढ़ किले का सेनापति जैसी कई उपाधियां दीं. वर्ष 1671 में गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर हुए सराईघाट के युद्ध में उन्होंने जो वीरता दिखाई वो इतिहास बन गई. इस युद्ध में उन्होंने औरंगजेब की सेना को इतनी भयानक शिकस्त दी कि अगले 250 सालों तक मुगल पूर्वोत्तर की ओर आना ही भूल गए. असम की बीजेपी सरकार इस असमी सेनानायक की गुण गाथा को प्रसारित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. पीएम मोदी ने लासित बोरफुकान को भारत की आत्मनिर्भर सेना का प्रतीक कहा था.

महाराजा सुहेलदेव 
उत्तर प्रदेश के बलशाली सेनानायक महाराजा सुहेलदेव ने तो लगभग 1000 साल पहले उत्तर प्रदेश के बहराइच में आक्रांता महमूद गजनवी के भतीजे सैयद सालार मसूद गाजी को युद्धभूमि में रौंदकर उसे मार डाला था. यूपी और केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद बीजेपी राजा सुहेलदेव की महिमा और शौर्य को बार बार लोगों को बता रही है. इसी सिलसिले में फरवरी 2021 में पीएम मोदी ने बहराइच में महाराजा सुहेलदेव मेमोरियल की आधारशिला रखी. यहां एक संग्रहालय बनने जा रहा है जहां उनसे जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियां संभालकर रखी जाएंगी. खास बात यह है कि सैयद सालार मसूद गाजी को बहराइच में ही दफनाया गया है.

भील नायक गोविंद गुरु
नवंबर 2022 के शुरुआत में ही पीएम मोदी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में मानगढ़ धाम का उद्घाटन किया था. ये जगह भील स्वतंत्रता सेनानी गोविंद गुरु से जुड़ी हुई है. आजादी की लड़ाई के समय भील और दूसरी जनजातियों ने लंबे समय तक इस स्थान पर अंग्रेजों को छकाया और उन्हें नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया. 17 नवंबर 1913 को 1.5 लाख से ज्यादा भीलों ने मानगढ़ की पहाड़ी पर एक जनसभा आयोजित की थी. इसी सभा पर अंग्रेजों ने गोलियां चलाई थी. इसमें 1500 आदिवासी बलिदान हो गए थे. ये स्थान राजस्थान, गुजरात और एमपी के जनजातियों के विशेष महत्व रखती है. पीएम मोदी ने मानगढ़ के इस स्थान को धाम का दर्जा दिया और इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया.

नादप्रभु केम्पेगोड़ा
नवंबर में ही पीएम मोदी कर्नाटक के अतीत के गौरव रहे नादप्रभु केम्पेगोड़ा से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल हुए. केम्पेगोड़ा को बेंगलुरु का संस्थापक कहा जाता है. पीएम मोदी ने यहां केम्पेगोड़ा की 108 फीट की ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया. 98 टन कांसे और 120 टन स्टील से मिलकर बने इस प्रतिमा को स्टैचू ऑफ प्रोसपेरिटी के नाम से जाना जाएगा. 27 जून 1510 को पैदा हुए केम्पेगोड़ा ने 1537 में बेंगलुरु की स्थापना की थी. उन्होंने बेंगलुरु की सुरक्षा के लिए परकोटे बनाए. पीएम मोदी ने कहा कि केम्पेगोड़ा भविष्यद्रष्टा थे जिन्होंने जनकल्याण को सर्वोपरि रखा.

अल्लूरी सीताराम राजू
दक्षिण भारत के नायकों को इतिहास के मुख्य पृष्ठ पर लाने में पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश के महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू का भी नाम चुना. उन्होंने जुलाई 2022 में उनकी 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में पश्चिम गोदावरी जिले में अल्लूरी सीताराम राजू की 30 फुट ऊंची कांस्य की मूर्ति का अनावरण किया. पीएम मोदी ने कहा कि ऐसी धरती पर आकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं जहां बलिदान का इतिहास है, जज्जबे से भरी और आदिवासी नायकों की कहानियां हैं.

पीएम मोदी के इस कार्यक्रम को बीजेपी के आदिवासी आउटरीच एजेंडे के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है. माना जाता है कि ऐसे नायकों के जरिए बीजेपी आदिवासी समुदाय के बीच खुद का नैरेटिव पेश कर पाएगी और अपनी पैठ बनाने में सफल हो पाएगी. बता दें कि राजू ने आंध्र प्रदेश में मान्यम विद्रोह का नेतृत्व किया था. ये गुलामी काल में आदिवासियों द्वारा 1922 से 1924 तक विशाखापत्तनम-गोदावरी के आदिवासी क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ स्थानीय जनजातियों का सशस्त्र प्रतिरोध था.

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