एकनाथ शिंदे की बगावत को शिवाजी से जोड़ने पर बवाल, जानें क्या है छत्रपति का महापलायन?

नई दिल्ली

हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीति एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिंदे सरकार में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दलबदल की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रसिद्ध आगरा पलायन से कर दी। उनके इस बयान की उन राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों ने तीखी आलोचना की, जो शिवाजी को एक मराठा आइकन के रूप में मानते हैं। लोढ़ा ने कहा था, ‘छत्रपति शिवाजी महाराज को मुगल बादशाह औरंगजेब ने आगरा में कैद कर लिया था। लेकिन शिवाजी महाराज स्वराज्य के लिए निकले। सीएम एकनाथ शिंदे भी लंबे समय तक किसी के मोहपाश में रहे। लेकिन महाराष्ट्र के व्यापक कल्याण के लिए उन्होंने भी कदम आगे बढ़ा दिए।’

शिवसेना ने जताया विरोध
पूर्व मंत्री और उद्धव गुट की शिवसेना के नेता आदित्य ठाकरे ने मंत्री के बयान पर विरोध जताते हुए कहा, ‘ईमान बेचने वाले गद्दारों की तुलना छत्रपति शिवराय से करना हिंदुत्व नहीं, महाराष्ट्र से नफरत है। इस सरकार का लक्ष्य है ‘महाराष्ट्र का जेंट्रीफिकेशन (लोगों की सोच बदलना)’। वहीं, शिवसेना (उद्धव गुट) की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘गद्दारी से बनाई सरकार की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य से जोड़ना फिर से भाजपा के राजनीतिक दीवालियापन का प्रतीक है। हर दिन महाराष्ट्र के आराध्य देव का तिरस्कार हो रहा है और असंवैधानिक मुख्य मंत्री और उप मुख्यमंत्री शांत है। शर्म करो!

बता दें कि इसी साल जून में एकनाथ शिंदे गुट ने महाअघाड़ी सरकार के खिलाफ विद्रोह कर लिया था। इसके बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार गिर गई। एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। आज हम आपको शिवाजी महाराज के उस किस्से के बारे में बताएंगे जिसका जिक्र एकनाथ शिंदे के मंत्री ने किया।

कौन थे शिवाजी महाराज?
इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। उन्होंने 17वीं शताब्दी में दक्कन राज्यों को एक स्वतंत्र मराठा राज्य बनाया था। कहा जाता है कि उन्होंने पहले हिंदू साम्राज्य की स्थापना की थी। शिवाजी महाराज ने अपने जीवनकाल में मुगलों के छक्के छुड़ा दिए थे। उनका जन्म 19 फरवरी 1630 में महाराष्ट्र के शिवनेरी किले में हुआ था। शिवाजी के पिता शाहजी भोंसले बीजापुर दरबार में काम करते थे। लेकिन शिवाजी के भीतर देशभक्ति और साहस के गुण उनकी मां जीजाबाई की वजह से था।

शिवाजी ने युद्ध और प्रशासन की शिक्षा दादाजी कोंडदेव जी ली। 1674 में उन्होंने पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। जब शिवाजी महाराज केवल 16 साल के थे तब उन्होंने बीजापुर की आदिल शाही सल्तनत के साथ युद्ध किया था। उन्होंने 17वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक शासन किया। जब उनकी मृत्यु हुई तब तक उनके पास करीब 300 किले थे। उनके शासन का क्षेत्र सूरत से लेकर गोवा के पास कोंकण तट तक फैला हुआ था।

शिवाजी महाराज और मुगल
शिवाजी महाराज के मराठा साम्राज्य का विस्तार तेजी से फैल रहा था। शिवाजी के शासन का विस्तार औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति के सामने सबसे बड़ा रोड़ा बन गया था। मुगलों का दक्कन के क्षेत्र पर प्रभाव कम हो रहा था। ऐसे में औरंगजेब ने मराठों के साथ संधि करने का फैसला लिया। इसके लिए उसने राजा जय सिंह को 1665 में करीब 1 लाख सैनिकों की सेना के साथ दक्कन भेजा था। राजा जय सिंह ने दक्कन में शिवाजी को पुरंदर पहाड़ी में घेर लिया। इसके बाद शिवाजी महाराज मुगलों से संधि के लिए तैयार हो गए। इस संधि को पुरंदर संधि के नाम से जाना जाता है।

क्या है शिवाजी महाराज का महापलायन?
इसके बाद शिवाजी महाराज को 1666 में आगरा में औरंगजेब के दरबार में ले जाया गया। उस समय मुगल दरबार में केवल बादशाह बैठा करता था, बाकी सभी दरबारी खड़े रहते थे। जिसकी मनसबदारी यानी रैंक जितनी ज्यादा होती थी, मुगल दरबार में उसकी पहुंच भी उतनी ही होती थी। शिवाजी को 5,000 वाली मनसरबारी दी गई, जबकि वो 7,000 वाली चाहते थे। शिवाजी महाराज ने भरे दरबार में इसके खिलाफ नाराजगी जताई। इसके बाद उन्हें कैद कर लिया गया।

शिवाजी महाराज कई दिनों तक औरंगजेब की कैद में रहे। लेकिन उन्होंने महसूस किया कि मराठा साम्राज्य को बचाने के लिए उन्हें कैद से भागने की जरूरत है। बताया जाता है कि जब वो कैद में थे, तब वहां कुछ टोकरियों में सामान आता था। एक दिन शिवाजी महाराज ने योजना बनाई और अपने बेटे संभाजी के साथ इन टोकरियों में छिप गए। शिवाजी महाराज मुगलों की नाक के नीचे से चमका देकर उनकी कैद से फरार हो गए।

कहा जाता है कि जब तक शिवाजी को खोजने की औरंगजेब ने लाख कोशिश की। जब उसके हाथ कुछ न लगा तो शर्म से लाल था। उसने शिवाजी के साथ फिर से तत्काल संघर्ष शुरू नहीं करने का फैसला किया। इसके बजाय उन्होंने शिवाजी को राजा की उपाधि दी और मराठा भूमि में अपने अधिकार की गारंटी दी। 1669 तक शिवाजी ने फिर से संगठित होकर एक प्रभावी सेना खड़ी कर ली थी। अपनी पुरानी छापामार रणनीति का उपयोग करते हुए उन्होंने बीजापुर और सिंहगढ़ के किले को वापस लिया। जब औरंगजेब उत्तर-पश्चिम कोने में पठान विद्रोहों को झेल रहा था, तब शिवाजी ने चतुराई से कोंकण तट पर अपनी खोई हुई स्थिति को फिर से हासिल कर लिया। 1674 में उन्होंने खुद को छत्रपति का ताज पहनाया और आधिकारिक तौर पर एक स्वतंत्र मराठा साम्राज्य का निर्माण किया

 

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