तीन राज्यों के HC में चीफ जस्टिस की नियुक्ति जल्द, कॉलेजियम ने केंद्र से की सिफारिश

नई दिल्ली,

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंगलवार को बैठक कर तीन हाई कोर्ट में स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की. सूत्रों के मुताबिक कॉलेजियम ने उत्तराखंड से झारखंड हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस संजय मिश्रा को वहीं चीफ जस्टिस, गुवाहाटी हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह को जम्मू-कश्मीर के चीफ जस्टिस और बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस के विनोद चंद्रन को गुवाहाटी हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्त करने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करने का फैसला किया है.

जानकारी के मुताबिक सितंबर के अंतिम हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की संस्तुति पर जस्टिस संजय मिश्रा को उनके मूल हाई कोर्ट ओडिशा से उत्तराखंड भेजा गया. वहां वो कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनका तबादला झारखंड हाई कोर्ट करने की सिफारिश की थी. अब उन्हें वहीं मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई है.

इसके अलावा जस्टिस नोंगमाइकापन कोटेश्वर सिंह गुवाहाटी हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश हैं. उन्हें जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है. जस्टिस के विनोद चंद्रन को केरल हाई कोर्ट से सितंबर में ही बॉम्बे हाई कोर्ट भेजा गया था. अब उनको बॉम्बे हाई कोर्ट से गुवाहाटी हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है.

बॉम्बे HC के चीफ जस्टिस SC के जज बने
बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जज दीपांकर दत्ता ने 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर शपथ ले ली. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. दत्ता के शपथ लेने के साथ ही शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या 28 हो गई.

केंद्र सरकार ने ढाई महीने पहले जस्टिस दीपांकर दत्त को तरक्की देकर सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश को सिफारिश की थी. उनके नाम की सिफारिश चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित की अगुआई वाले कॉलेजियम ने 26 सितंबर को हुई बैठक में की गई थी.

केंद्र ने कॉलेजियम को लौटा दी थीं 20 फाइलें
कानून मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पिछले महीने सरकार ने हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति से संबंधित 20 फाइलें वापस लौटा दी थीं. सरकार ने इन पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है. इनमें 11 फाइलें पिछले कुछ महीनों में भेजे गए नए नामों की हैं. 9 ऐसे नाम हैं, जिन्हें पहले वापस भेज दिया गया था और फिर से दोहराया गया है. सरकार ने अलग-अलग हाई कोर्ट में नियुक्तियों से संबंधित वो सभी नाम वापस कर दिए हैं, जिन पर हाई कोर्ट कॉलेजियम के साथ उसके ‘मतभेद’ हैं.

लीक से हटकर सोचने की जरूरत: संसदीय समिति
संसदीय समिति ने कार्यपालिका और न्यायपालिका से हाई कोर्टों में खाली पदों को लेकर कहा है कि वे इस स्थाई समस्या से निपटने के लिए लीक से हटकर विचार करें और समस्या का समाधान निकालें. समिति ने संसद में पेश रिपोर्ट में कहा कि वह केंद्रीय कानून मंत्रालय में न्याय विभाग की टिप्पणियों से सहमत नहीं है कि हाई कोर्ट में जजों की रिक्तियों को भरने के लिए समय का संकेत नहीं दिया जा सकता है.

समिति ने आगे कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर, 2021 तक तेलंगाना, पटना और दिल्ली के तीन हाई कोर्ट थे, जहां 50 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली थे और 10 हाई कोर्ट में 40 प्रतिशत से ज्यादा सीटें खाली थीं. बीजेपी के सीनियर लीडर सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाले पैनल ने कहा- ये सभी बड़े राज्य हैं, जहां जजों और जनसंख्या का अनुपात पहले से ही कम है और इस तरह खाली पद होना गहरी चिंता का विषय हैं.

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