सत्ता हासिल का यज्ञ, दिल्ली में दफ्तर… केसीआर के आने से कितना बदलेगा 2024 का समीकरण

नई दिल्ली

2024 लोकसभा चुनाव से पहले केसीआर ने भी दिल्ली में दस्तक दे दी है। तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) जिसका नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति (BRS) करने की इजाजत कुछ ही समय पहले चुनाव आयोग ने दी थी। पार्टी के संस्थापक और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने दिल्ली में बुधवार बीआरएस के ऑफिस का शुभारंभ किया। इस मौके पर यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी भी पहुंचे। इस मौके पर एक खास पूजा भी की गई। विशेष पूजा, दिल्ली में दफ्तर के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि पीएम मोदी बनाम कौन में एक और नाम। हालांकि केसीआर के नाम की चर्चा काफी दिनों से है। 24 घंटे के भीतर 2024 चुनाव को लेकर दो बड़ी बातें सामने आई एक ओर जहां नीतीश कुमार ने कहा कि वो पीएम पद के उम्मीदवार नहीं हैं तो वहीं केसीआर की दिल्ली में दस्तक। हालांकि नीतीश कुमार के इस बयान का कतई मतलब यह नहीं है कि वह इस दौड़ में नहीं हैं।

एक कदम आगे और एक कदम पीछे, कल नीतीश और आज केसीआर
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार बिहार और देश की सियासत के लिहाज से एक साथ दो बड़े बयान दिए। नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के अगले चुनाव यानी 2025 में महागठबंधन को तेजस्वी यादव लीड करेंगे। इसकी चर्चा काफी दिनों से बिहार में हो भी रही थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि न तो वह पीएम पद की रेस में हैं और न सीएम की रेस में। नीतीश कुमार ने कहा कि उनका मकसद बीजेपी को हराना है। नीतीश कुमार के इस बयान पर कई लोगों को हैरानी भी हुई वहीं यह भी कहा गया कि इसका कतई मतलब नहीं कि पीएम मोदी के खिलाफ 2024 में विपक्ष की अगुवाई करने को वह तैयार नहीं। यह सब आगे की सियासत पर निर्भर करेगा।

वहीं इस मुकाबले में आज साउथ की ओर से भी एंट्री हो गई। दिल्ली में पार्टी कार्यालय का उद्घाटन करने के साथ ही बीआरएस, केसीआर के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर अपने सफर की शुरुआत कर रही है और वह देशभर में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी। 2024 में पीएम मोदी के खिलाफ कौन? बंगाल, बिहार, दिल्ली के बाद साउथ से भी अब एक नाम जुड़ गया है। हालांकि अब तक जो नाम सामने आए उस पर कांग्रेस की ओर से कुछ भी खुलकर नहीं कहा गया लेकिन केसीआर को कांग्रेस निशाने पर लिया है। 2024 से पहले विपक्ष की ओर से कोई क्या एक राय बन पाती है या 2019 जैसी बात होगी यह चुनाव करीब आते ही पता चल पाएगा।

सत्ता हासिल का यज्ञ और केसीआर का दिल्ली सपना
दिल्ली में बीआरएस का आधिकारिक लॉन्च यागम(यज्ञ) के साथ किया गया। विशेष पूजा के लिए दक्षिण के कई पुजारी दिल्ली में मौजूद थे। मंगलवार से पूजा शुरू थी। जाने-माने वास्तु सलाहकार और केसीआर के सहयोगी ने बताया कि किसी खास मिशन की शुरुआत से पहले इस यज्ञ का खास महत्व है। केसीआर राष्ट्रीय राजनीति की ओर आगे बढ़ रहे हैं इस बात को ध्यान में रखते हुए यह पूजा हुई। केसीआर ने 2019 में अपने मंत्रिमंडल के विस्तार के पहले भी हैदराबाद में 5 दिनों का चंडी यज्ञ करवाया था। केसीआर शुभ मुहूर्त का भी खास ध्यान रखते हैं।

केसीआर ने एक खास समय का ध्यान रखते हुए ही उस लेटर पर साइन किए जिससे उनकी पार्टी का नाम टीआरएस से बीआरएस हुआ। बीआरएस का यह दफ्तर दिल्ली के पटेल मार्ग पर खोला गया। केसीआर ने हाल ही में 9 दिसंबर को हैदराबाद में बीआरएस का गुलाबी झंडा फहराया था और यह विश्वास जताया कि यह झंडा एक दिल्ली में उड़ान भरेगा। केसीआर पूर्व में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मिल चुके हैं जो खुद अगले दावेदार हैं। देश की राजधानी से 2024 के लिए और दिल्ली के लिए ही केसीआर ने शुरुआत तो कर दी है लेकिन कितनी कामयाबी मिलती है इसका सही पता आने वाले कुछ महीनों में चल जाएगा।

फैसला कांग्रेस को नहीं आया पसंद, बोली DNA नहीं बदलने वाला
कांग्रेस अब तक 2024 के लिए विपक्ष की ओर से जो नाम आते हैं उस पर खुलकर कभी हमला नहीं किया गया। हालांकि केसीआर के मामले में ऐसा नहीं देखने को मिला। टीआरएस का नाम भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) करने को लेकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव पर कांग्रेस ने कटाक्ष करते हुए कहा कि प्लास्टिक सर्जरी करने से डीएनए नहीं बदलने वाला है। केसीआर को वीआरएस ही लेना पड़ेगा। पार्टी के मीडिया एवं प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि जब दिल्ली के शराब घोटाले में सीबीआई केसीआर की बेटी को तलब करती है तो वह कहते हैं कागज लाओ। अब वही केसीआर बिना किसी कागज और प्राथमिकी के यह सब कर रहे हैं। मोदी जी और केसीआर में कोई फर्क नहीं है।

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना में ‘नाइस’ यानी नारकोटिक्स, इनकम टैक्स, सीबीआई और ईडी की कार्रवाई और केसीआर की पुलिस की मनमानी नहीं चलेगी। केसीआर तेलंगाना का नाम मिटाना चाहते हैं। तेलंगाना से जो फायदा मिलना था, उन्हें मिल गया। हो सकता है कि (वह) अपनी पार्टी का नाम अंतरराष्ट्रीय कर दें। नाम बदलने से डीएनए नहीं बदलेगा। प्लास्टिक सर्जरी से सोच नहीं बदलेगी। केसीआर के डीएनए और सोच के बारे में सबको पता है।

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