देखता रह गया चीन का जासूस, अग्नि 5 का वो रहस्य किसी को नहीं मालूम

नई दिल्ली

जब भारत हुंकार भरता है कि चीन अब 1962 वाली भूल नहीं करे तो यह एक चेतावनी होती है। चेतावनी कि, इस बार हेकड़ी दिखाई तो समेट दिए जाओगे। 1962 बहुत पीछे छूट चुका है, भारत बहुत आगे बढ़ गया है। दुनिया को यह अहसास है। परमाणु क्षमता से लैस अग्नि 5 मिसाइल की टेस्ट फायरिंग से चीन को भी पता चल गया होगा। ड्रैगन ने बहुत कोशिशें कीं अग्नि 5 की चाल, उसके हाल का पता लगाने की, लेकिन हाथ लगी तो सिर्फ मायूसी। मिसाइल और सैटेलाइट ट्रैकिंग जहाज ‘यूआन वांग 5’ करीब एक सप्ताह तक हिंद महासागर क्षेत्र में रहने के बाद वहां से बाहर निकल गया। 14 दिसंबर को चीन का जासूसी विमान हिंद महासागर क्षेत्र से निकला और अगले ही दिन भारत ने अग्नि 5 का सफल परीक्षण कर दिखाया, वो भी अंधेरे में।

कभी भी सेना को सौंपी जा सकती है अग्नि 5 मिसाइल
ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर से अग्नि 5 ने शाम 5.30 बजे के करीब उड़ान भरी। उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के जश्न वाले समारोह में शिरकरत कर रहे थे। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अग्नि 5 परमाणु मिसाइल की टेस्ट फायरिंग की। लेकिन, इस पर सरकार की तरफ से बिल्कुल चुप्पी साध ली गई है और अब तक कोई बयान नहीं आया है। लेकिन कहा जा रहा है कि अक्टूबर 2021 में जिस अग्नि 5 मिसाइल की टेस्टिंग हुई थी, उससे कहीं ज्यादा रेंज वाली मिसाइल इस बार लॉन्च की गई। अगर चीन ने दुस्साहस किया तो अग्नि 5 उसके घर में घुसकर तबाही का तांडव मचा देगा। अग्नि 5 चीन के बीचोबीच हान प्रांत से लेकर तिब्बत और शिनजियांग के सीमाई इलाकों तक मार करने में सक्षम है। अब मोदी सरकार का इशारा मिलते ही 5,000 किमी रेंज वाले अग्नि 5 को सेना को समर्पित कर दिया जाएगा।

तवांग झड़प के छठे दिन ही भारत ने दिखा दी ताकत
सबसे बड़ी बात है परमाणु शक्ति संपन्न अग्नि 5 मिसाइल के प्रक्षेपण की टाइमिंग। 9 दिसंबर को चीन के सैकड़ों सैनिकों को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में मुंह की खानी पड़ी और सप्ताह भर के अंदर अग्नि 5 की टेस्ट फायरिंग हो गई। भारत की घोषित नीति है कि वह पहले परमाणु हथियारों का उपयोग किसी भी दुश्मन के खिलाफ नहीं करेगा, लेकिन अगर किसी ने ऐसा दुस्साहस दिखाया तो उसे दुनिया के नक्शे से मिटने से कोई ताकत नहीं रोक पाएगी। अग्नि 5 के सिवा बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चिंग की क्षमता से लैस पनडुब्बियों पर के-4 मिसाइलें तैनात की जाएंगी।

एंटी-शिप मिसाइल भी बना रहा भारत
इतना ही नहीं, भारत जहाज रोधी बैलिस्टिक मिसाइल भी बना रहा है। अगर भारत के 7,500 किलोमीटर की समुद्री सीमा में किसी दुश्मन देश ने नौसैनिक अभियान छेड़ने की सोची भी तो उसे इसी नए विकसित बैलेस्टिक मिसाइल का सामना करना पड़ेगा। चीन के पास डीएफ-21 जहाज रोधी मिसाइल हैं। उसका पूरा ध्यान समुद्र में अमेरिकी दबाव से निपटने पर है। अगर अमेरिका ने ताइवान की मदद के लिए अपने जहाज भेजे तो चीन अपने डीएफ-26 से गुआम स्थित अमेरिका के मुख्य नौसैनिक अड्डे को निशाना बना सकता है। हालांकि, अमेरिका के पास भी चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पर्याप्त हथियार हैं। अमेरिका साउथ चाइना सी में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पूर्वी तट पर स्थित चीनी मिसाइल अड्डे को तहस-नहस करने की क्षमता रखता है।

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