BJP के हथियार से अटैकिंग मोड में कांग्रेस, विरोधियों की बखिया उधेड़ने के मिशन पर गहलोत और सुखविंदर

जयपुर

2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से पार्टी नई स्ट्रेटजी पर काम करती दिख रही है। गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस के बड़े नेता अपने कार्यकताओं में उत्साह भरने के लिए बीजेपी के तौर-तरीके अपना रही है। 2014 के बाद से ना केवल राष्ट्रीय राजनीति में बल्कि, स्टेट लेवल पॉलिटिक्स में कांग्रेस को लेकर ऐसी छवि बनी है कि उसके जीते हुए जनप्रतिनिधियों को बीजेपी या अन्य दूसरी पार्टियां कभी भी अपने पाले में कर सकते हैं। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, गुजरात के अलावा नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में जनप्रतिनिधियों के पाला बदलने की घटनाओं से कांग्रेस की छवि बेहद खराब हुई है। कार्यकर्ता के बीच संदेश गया कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पार्टी को एकजुट रखते में सक्षम नहीं है, वहीं वोटर सोचते हैं कि इस पार्टी का प्रत्याशी जीत भी गया तो उसका भरोसा नहीं है कि वह यहां रहेगा भी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और वोटरों के बीच बनी इस छवि को सुधारने के लिए हिमाचल प्रदेश की जीत के बाद पार्टी बीजेपी की रणनीति से उन्हें जवाब देने में लगी है।

बीजेपी की कोन सी रणनीति अपना रही है कांग्रेस
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के रिजल्ट आए तो कांग्रेस के 40, बीजेपी के 26 और अन्य के 3 विधायक जीते। कांग्रेस के पक्ष में रिजल्ट आने के बाद भी मीडिया में इस तरह की खबरें देखने को मिली कि कहीं बीजेपी कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर अपनी सरकार ना बना ले। यहां तक चुनाव रिजल्ट आने के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को शिमला रवाना कर दिया गया, ताकि वह कांग्रेस के विधायकों को टूटने से रोक सकें। इस तरह की खबरें मीडिया में आने के बाद एक बार फिर मीडिया में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की कमजोरी को लेकर सवाल उठने लगे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, उल्टा हिमाचल प्रदेश में सरकार बनने के बाद से कांग्रेस फ्रंटफुट पर खेलती दिख रही है और बीजेपी और उसके संगठन के भीतर की कमियों को मीडिया में आकर गिनाया जा रहा है।

हिमाचल के CM का दावा, टूटने वाली है बीजेपी
ह‍िमाचल के ननविर्वाचित सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में पूछा गया कि क्या उनकी सरकार पर भी ऑपरेशन लोट्स का खतरा है। इसपर उन्होंने दो टूक जवाब दिया। सुक्खू ने दावा किया कि कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश इकाई के भीतर कोई अंतर्कलह नहीं है। उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि हिमाचल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए होड़ थी, क्योंकि तीन-चार दावेदार थे। अगर कुछ गलत होता, तो राजस्थान जैसी स्थिति हो जाती। सुक्‍खू ने बीजेपी के ऑपरेशन लोट्स के डर के सवाल सवाल पर कहा क‍ि अब टूटने की बारी बीजेपी की है। उन्होंने पूरे कॉन्फिडेंस से कहा कि बीजेपी में कई लोगों का दम घुट रहा है। उन्‍हें आने वाले समय में कांग्रेस की ओर से ही ‘ऑक्‍सीजन’ म‍िलेगा। इतना ही नहीं सुक्खू ने बीजेपी को चैलेंज किया कि वह हिमाचल प्रदेश में ऑपरेशन लोट्स चलाकर दिखाएं। उन्‍होंने कहा क‍ि ह‍िन्‍दुस्‍तान में बीजेपी ही अब तक दूसरे दलों के व‍िधायकों को तोड़ती आई है लेक‍िन अब बारी हमारी है। आने वाले समय में ह‍िमाचल बीजेपी में भगदड़ मचने वाली है।

अशोक गहलोत ने भी बीजेपी के अंदर की लड़ाई को किया उजागर
पिछले चार साल से राजस्थान कांग्रेस में सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डेप्युटी सीएम सचिन पायलट के बीच खींचतान की खबरें आती रहती है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इन खबरों के जरिए बीजेपी जनता के बीच लगातार मैसेज देने की कोशिश करती है कि राजस्थान में कांग्रेस दो फाड़ है। जबकि आलम यह है कि राजस्थान बीजेपी के अंदर भी नेताओं के बीच झगड़े की खाई बड़ी है। लेकिन लोगों के बीच ऐसी धारणा बनी है कि राजस्थान में केवल कांग्रेस के अंदर ही विवाद है, ना कि बीजेपी के भीतर भी। हिमाचल प्रदेश की जीत से उत्साहित राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इस धारणा को बदलने के प्रयास में जुट गए हैं। अपनी सरकार के चार साल पूरा होने पर सीएम अशोक गहलोत ने अपनी सरकार में हुए कामों का बखान करने के साथ ही बीजेपी की राज्य ईर्का में चल रही अंदरुनी कलह की ओर सबका ध्यान खींचने की कोशिश की।

सीएम अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बीतचीत के दौरान बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के बीच चल रहे शीतीयुद्ध को सार्वजनिक कर दी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी नेताओं के बीच चल रही खींचतान को लेकर सीधा अटैक किया है। गहलोत ने कहा कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के बीच जो भी चल रहा है, उसे प्रदेश की जनता क्यों भुगते। राजे के कार्यकाल में ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। अब उसी प्रस्ताव में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह खामियां निकाल रहे हैं। अगर प्रस्ताव में कोई कमी है तो पिछली सरकार के दौरान चुप क्यों रहे। उसी समय कमी को दूर कर लिया जाना चाहिए था। गहलोत ने कहा कि प्रदेश की जनता ने 25 के 25 सांसद जिताकर लोकसभा में भेजे। वे सब मिलकर इस परियोजना को पास क्यों नहीं करवा पा रहे हैं। इस दौरान गहलोत ने यह भी कहा कि कई सांसद तो ऐसे हैं जो कहते रहते हैं कि उनकी चलती ही नहीं है।

सुखविंदर सिंह सुक्खू और अशोक गहलोत जैसे नेताओं के इस तरह के बयान को देखकर समझा जा सकता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अग्रेसिव मोड में बीजेपी को उसी की भाषा में जवाब देने की लाइन पर काम कर रही है। हालांकि इस अग्रेसन का कांग्रेस को कितना फायदा या नुकसान होता है यह तो वक्त ही बताएगा।

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