साल 2022 से क्या मिलेगा 2024 का जवाब, PM मोदी की राह आसान या मिलेगी चुनौती

नई दिल्ली

साल 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को देखा जाए तो यह अगले लोकसभा चुनाव 2024 की संभावनाओं के बारे में क्या संकेत देते हैं? यह साल जो अब बीतने वाला है उसमें बीजेपी ने दो महत्वपूर्ण राज्यों में ऐतिहासिक जनादेश के साथ जीत दर्ज की। उत्तर प्रदेश में पार्टी को लगातार दूसरी जीत मिली वहीं गुजरात में अब तक की सबसे ज्यादा सीटें उसे हासिल हुई। पार्टी ने मणिपुर में सत्ता में लौटकर नार्थ ईस्ट में भी अपनी उपस्थिति मजबूत की साथ ही गोवा और उत्तराखंड में सत्ता को बचाए रखने में कामयाबी मिली। वहीं हिमाचल प्रदेश में वह जीत से दूर रह गई तो पंजाब में वह लड़ाई से बाहर ही थी। महाराष्ट्र में जहां एक नया साथी मिला और सरकार बनाने में कामयाबी हाथ लगी तो दूसरी ओर बिहार से पुराने साथी नीतीश के जाने के बाद सत्ता हाथ से गई। वहीं कांग्रेस के लिए असली चुनौती आने वाले साल 2023 में है तो आम आदमी पार्टी भी पूरा जोर लगाए हुए है।

आने वाले साल में कांग्रेस के सामने और भी बड़ी चुनौती
इस साल कांग्रेस को केवल हिमाचल के चुनाव में जीत मिली और करीब चार साल बाद आखिरकार पार्टी को अपने दम पर किसी राज्य में सरकार बनाने का मौका मिला। पार्टी को जहां इस साल एक गैर गांधी अध्यक्ष मिला लेकिन अब भी गांधी परिवार का दबदबा वैसे ही बरकरार है। भारत जोड़ो यात्रा का पहला चक्र पूरा हो गया है और इसकी कथित सफलता से उत्साहित होकर पार्टी 2023 में पश्चिम से पूर्व की ओर इसी तरह के मार्च निकालने की सोच रही है। हालांकि, पार्टी के चुनावी प्रदर्शन से उसके कट्टर समर्थकों को भी चिंता होनी चाहिए। उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में पार्टी वापसी करने में विफल रही। पंजाब भी हाथ से गया और यूपी और गुजरात में पार्टी पूरी तरह से हाशिए पर रही। वहीं कांग्रेस को अब आम आदमी पार्टी (AAP) की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। पंजाब में कांग्रेस को AAP ने बेदखल किया वहीं गुजरात में भी उसकी वजह से कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ।

राष्ट्रीय राजनीति में आम आदमी पार्टी की एंट्री
आम आदमी पार्टी उत्तराखंड, गोवा या हिमाचल में अपनी छाप नहीं छोड़ पाई, लेकिन पार्टी नेतृत्व स्पष्ट रूप से मानता है कि गुजरात में 10% से अधिक वोट शेयर जीतना न केवल एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में इसकी औपचारिक मान्यता का संकेत है, बल्कि एक अखिल भारतीय पार्टी के रूप में उभरने की संभावना भी है। पंजाब में पार्टी को शानदार जीत मिली। 2024 के आम चुनाव अब बमुश्किल 16 से 18 महीने दूर हैं और इससे पहले कई राज्यों में 2023 में विधानसभा चुनाव है। कर्नाटक के अलावा तीन उत्तर-पूर्वी राज्यों में अगले साल की पहली छमाही में चुनाव होने हैं, जबकि दूसरे हाफ में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव है। वहीं आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव होंगे।

बीजेपी को कौन देगा चुनौती AAP या कांग्रेस
2024 में मुकाबले से पहले सभी दलों के लिए रास्ते खुले हैं लेकिन बीजेपी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उसे चुनौती देना मुश्किल है। कांग्रेस के पास कर्नाटक में वापसी और छत्तीसगढ़ में सत्ता में लौटने का मौका है वहीं राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी मुकाबला है। बीजेपी से कांग्रेस का इन राज्यों में सीधा मुकाबला है। बीजेपी तेलंगाना को लेकर अधिक उत्साहित है उसे लगता है कि पार्टी राज्य में सत्ता में आएगी। हालांकि 2024 की लड़ाई में यह देखने वाली बात होगी कि राष्ट्रीय स्तर पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच संघर्ष तेज होगा या वे भाजपा को चुनौती देने के लिए किसी खास मोर्चे में शामिल होंगे। AAP की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को देखते हुए उसके कांग्रेस के साथ जाने की संभावना कम है। खासतौर पर पंजाब और गुजरात के नतीजों को देखकर यह कहा जा सकता है कि आप अब सिर्फ एक शहरी मध्यवर्गीय पार्टी नहीं रह गई है। अब इसका ग्रामीण, गरीब और पिछड़ी जाति के मतदाताओं के बीच भी पकड़ बढ़ी है।

2024 में कौन करेगा विपक्ष की अगुवाई
AAP के बढ़ने के साथ ही विपक्ष की अगुवाई कौन करेगा इसको लेकर भी कई सवाल हैं। हाल के एक सर्वे जिसमें यह पूछा गया कि बीजेपी के सामने पसंदीदा विपक्ष कौन। कम से कम 31% उत्तर देने वालों ने AAP के नाम का समर्थन किया। वहीं 21% ने कांग्रेस और 19 प्रतिशत ने क्षेत्रीय दलों के गठबंधन की बात कही। क्षेत्रीय दल, खासकर दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में, ऐसा लगता है कि वे अपने आधार पर कायम हैं। तृणमूल और डीएमके जैसी पार्टियों के पास मजबूत संगठन हैं, लेकिन वे राज्यों में अपने गढ़ को बनाए रखने में अपनी सारी ऊर्जा खर्च करने से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। सपा, राकांपा और जद (यू) जैसे दलों का राजनीतिक स्थान बड़ा है, लेकिन फिलहाल वे सुस्त दिख रहे हैं। वहीं बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियों की राष्ट्रीय राजनीति में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। ऐसे में यदि आम चुनाव से पहले बीजेपी के खिलाफ कोई राजनीतिक चुनौती खड़ी करनी है तो इन पार्टियों को एक समझौते पर पहुंचना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो 2024 का चुनाव भाजपा-एनडीए, कांग्रेस, आप और खंडित चौथे राजनीतिक गुट के चतुष्कोणीय पेंच में फंस जाएगा।

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