BJP को ‘बूस्टर’ तो महाठबंधन के लिए कड़वा घूंट, बड़ा मैसेज दे गया बिहार का निकाय चुनाव

पटना

बिहार नगर निकाय चुनाव 2022 में बीजेपी समर्थित ज्यादा प्रत्याशियों के विजई होने से पार्टी उत्साहित है। पटना नगर निगम के मेयर पद पर फिर से कब्जा जमाने वाली सीता साहू और डिप्टी मेयर पद पर जीती रेशमी चंद्रवंशी भी बीजेपी समर्थित बताई जाती हैं। वैसे, बिहार में नगर निकाय चुनाव दलगत आधार पर नहीं होते, लेकिन सभी राजनीतिक दलों की नजर इस चुनाव पर लगी थी। इस चुनाव में विभिन्न पदों पर जीते प्रत्याशी सत्ताधारी महागठबंधन समर्थित भी बताए जा रहे हैं। शुक्रवार को मतगणना के दौरान चुनाव के नतीजे आने शुरू होने के साथ बीजेपी कार्यालय में भी खुशी देखी गई। पटना नगर निगम में सीता साहू ने मजहबी को पराजित किया, तो डिप्टी मेयर पद पर रेशमी चंद्रवंशी विजई हुई। बीजेपी के नेताओं का दावा है कि नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण में जिन 17 नगर निगमों में मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर चुनाव हुए, उनमें से आधे से अधिक जगहों पर बीजेपी समर्थकों का दबदबा रहा। वहीं महागठबंधन का दावा है कि कई क्षेत्रों में उसके कार्यकर्ताओं की भी जीत हुई है।

बीजेपी पड़ रही महागठबंधन पर भारी?
बिहार के 17 नगर निगमों में छह पर बीजेपी और 6 पर ही महागठबंधन समर्थित उम्मीदवार की जीत हुई है। इनमें बीजेपी समर्थित पटना में सीता साहू, मुजफ्फरपुर में निर्मला देवी, भागलपुर में डॉ. वसुंधरा लाल, कटिहार में उषा देवी अग्रवाल, आरा से इंदु देवी, छपरा से राखी गुप्ता शामिल हैं। जबकि महागठबंधन समर्थित 6 प्रत्याशी में गया के प्रत्याशी वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, पूर्णिया की विभा कुमारी, मोतिहारी की प्रीति गुप्ता, मुंगेर की कुमकुम देवी और बेगूसराय की पिंकी देवी शामिल हैं। मतलब राजद, जेडीयू समर्थित उम्मीदवारों ने मिलकर चुनाव लड़ा फिर भी केवल छह प्रत्याशी ही महापौर बन पाए, जबकि बीजेपी ने अकेले दम पर अपने छह प्रत्याशियों को महापौर बनवा दिया।

निकाय चुनाव को दल से जोड़कर देखना सही नहीं: RJD
हालांकि राजद इसे दल से जोड़कर देखने को सही नहीं मानता। राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि राज्य में नगर निकाय चुनाव राजनीतिक दल की तर्ज पर नहीं हुए और किसी उम्मीदवार की जीत को किसी राजनीतिक दल की जीत घोषित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव स्वतंत्र रूप से लडे़ गए और यह प्रत्याशियों की जीत है।

बिहार के लोग महागठबंधन को नकार चुके: BJP
इधर, बीजेपी के प्रवक्ता मनोज शर्मा कहते हैं कि विधानसभा उपचुनाव परिणाम से ही यह संकेत मिल गए थे कि बिहार के लोग महागठबंधन को नकार चुके हैं, नगर निकाय चुनाव ने इस संकेत पर मुहर लगा दी। आज नगर निकाय चुनाव में जीते प्रत्याशी बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में 23 जिलों में 11,127 उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा था। 28 दिसंबर को 23 जिलों में 135 नगर निकायों में 1529 वार्डों समेत 1665 पदों के लिए चुनाव हुए थे।

महागठबंधन के लिए खतरे के खंटी?
बिहार उपचुनाव के बाद नगर निकाय चुनाव हुए हैं। नगर निकाय चुनाव भले ही पार्टियां नहीं लड़ती हैं लेकिन जब पर्दे के पीछे से समर्थन का जो खेल चलता है, उसे पार्टियों की साख से ही जोड़ा जाता है। उपचुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी राजद-जेडीयू समर्थित प्रत्याशियों का मुकाबला बीजेपी से था। यहां भी बीजेपी का पलड़ा भारी देखने को मिला। राज्य के चार बड़े नगर निगमों पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बेगूसराय में से तीन पर ‘भगवा’ लहरा चुका है। बिहार में बीजेपी के लिए ये बूस्टर डोज से कम नहीं। जबकि महागठबंधन के लिए खतरे की घंटी।

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