3 थाने, 12 किमी लंबी सड़क और 9 PCR वैन… फिर भी पुलिस ने नहीं देखी कार से घिसटती लाश!

नई दिल्ली,

दिल्ली में सुल्तानपुरी से कंझावला के बीच पथरीली सड़क भी है. मगर ये सड़क भी शायद उतनी पथरीली नहीं होगी, जितना ये शहर पत्थरदिल है. पथरीली सड़क सिर्फ जिस्मों को खरोंच सकती है. उन्हें बेजान बना सकती है. उन जिस्मों से रूह को आजाद कर सकती है. मगर पथरीली सड़क की वही जकड़न जिस्म के रास्ते दिल में उतर जाए, तो फिर उस मौत को कोई ताउम्र भुला नहीं सकता.

पुलिस को कुछ पता नहीं चला!
तीन थानों की पुलिस. 12 किलोमीटर का दायरा. पुलिस की 9 पीसीआर वैन और कागजों पर ही सही दिल्लीवालों की हिफाजत के लिए गश्त करती पुलिस. इन सबके बीच एक कार में सवार पांच हैवान, 20 साल की एक लड़की को देश की राजधानी की एक पथरीली सड़क पर पूरे 12 किलोमीटर तक पहियों तले रौंदते रहे. रौंदते रहे और घूमते रहे. कब लडकी की मौत हुई, किस पल वो लाश बन गई और कैसे वो लाश एक मोटरकार के पहिए के नीचे फंस कर लगभग दो घंटे तक पथरीली सड़क पर भागती रही. तीन थानों की पुलिस ना देख सकी. 12 किलोमीटर के दायरे में 9 पीसीआर वैन को भी इसका पता नहीं चला.

दीपक ने दिखाई हिम्मत
कागजों पर ही सही दिल्लीवालों की हिफाजत के लिए गश्त करती पुलिस भी ना उस कार को देख पाई, ना कार में फंसी लाश को. ना पथरीली सड़कों पर खिंच चुके खून के उस निशान को. वो तो इस पत्थरदिल शहर में दीपक बन कर अब भी थोड़ी बहुत इंसानियत को जिंदा रखनेवाले दीपक ने दो घंटे तक मोटरकार की पहियों में फंसी दिल्ली की उस बेटी का अकेले पीछा किया, तब कहीं जाकर ये खबर भी सामने आ गई. वरना क्या पता दिल्ली पुलिस इसे भी एक मामूली सड़क हादसा बता कर अपना फर्ज निभा चुकी होती.

शर्मसार करनेवाली खौफनाक कहानी
पहले इंसानियत को झकझोर देनेवाली इस कहानी को सुनिए. 31 दिसंबर की शाम थी. दिल्ली के अमन विहार में रहनेवाली 20 साल की लड़की घर से काम पर जाने के लिए निकलती है. लड़की के पिता की 8 साल पहले ही मौत हो चुकी है. मां की दोनों किडनियां भी खराब हैं. घर में वो इकलौती कमानेवाली है. पार्ट टाइम वो इवेंट मैनेजमेंट का काम किया करती थी. 31 दिसंबर के मौके पर न्यू ईयर की एक पार्टी का उसे काम मिला था. उसने मां को पहले ही बता दिया था कि घर आने में आज बहुत देर हो जाएगी. वो सुबह तक घर नहीं पहुंची. मोबाइल भी बंद था. नए साल की सुबह पुलिसवाले उसके घर पहुंच गए. उन्होंने ही बताया कि एक स्कूटी का एक्सीडेंट हुआ है और उसका नंबर आपकी बेटी के नाम पर रजिस्टर्ड है. तब पहली बार लड़की की मां, बहन और भाई को उसकी मौत की खबर मिली. सिर्फ मौत की खबर. मगर मौत की दहला देनेवाली खबर अभी मिलना अभी बाकी था.

बेटी की लाश देख चीख पड़े घरवाले
लाश अब तक मुर्दा घर पहुंचाई जा चुकी थी. लड़की के घरवालों ने मुर्दाघर में जब पहली बार लाश देखी, तो मातम के साथ उनकी चीखें निकल गई. खुद ही अंदाजा लगा लीजिए कि करीब दो घंटे तक 12 किलोमीटर के दायरे में मोटरकार के पहियों के नीचे पथरीली सड़क पर जो लाश घिसटती रही, उस लाश में क्या बचा होगा? घरवाले उसी बची खुची लाश में अपनी बेटी को ढूंढ रहे थे. अब यहां से पहले पुलिस की कहानी शुरू होती है.

पुलिस ने बताई ये कहानी
इस मामले पर पहले पुलिस की जुबानी पूरी कहानी बताते हैं. दिल्ली पुलिस के बाहरी जिले के डीसीपी की तरफ से लड़की की मौत पर एक बयान जारी किया गया. बयान क्या, दिल्ली पुलिस की कहानी है. जिसमें लिखा था कि एक जनवरी की तड़के 3 बजकर 24 मिनट पर एक शख्स ने पीसीआर को फोन किया. उसने फोन पर कहा “एक बलेनो गाड़ी ग्रे कलर की, जो कुतुबगढ़ की साइड जा रही है, उसमें एक डेडबॉडी बंधी हुई है, जो नीचे लटकी हुई है.”

कार सवार पांच आरोपी गिरफ्तार
फोन करनेवाला लगातार पुलिसवाले से बात कर रहा था. यहां तक कि उसने कार का नंबर तक बता दिया. इस सूचना के बाद चौकी में तैनात पुलिसवालों को फौरन हादसे की जानकारी दी गई. तड़के करीब 4 बजकर 11 मिनट पर कंझावला पुलिस स्टेशन को एक और कॉल आया. इस बार फोन करनेवाले ने बताया कि सड़क किनारे एक लड़की की लाश पड़ी है. बाद में मौके पर पुलिस पहुंची और लाश को मंगोलपुरी के एसजीएम हॉस्पिटल ले गई. इसके बाद कार और कार में सवार पांच लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

3 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं सभी आरोपी
स्पेशल सीपी सागरप्रीत सिंह हुड्डा ने बताया कि इससे पहले नाइट पेट्रोलिंग के दौरान सुल्तानपुरी थाने के एसएचओ को एक स्कूटी दुर्घटनाग्रस्त हालत में सड़क किनारे पड़ी मिली. स्कूटी के नंबर से पता चला कि स्कूटी अमन विहार में रहनेवाली एक लड़की के नाम है. कार से जिन पांच लड़कों को गिरफ्तार किया गया, उनमें से एक का नाम दीपक खन्ना है. उम्र 26 साल. ये पेशे से ड्राइवर है. दूसरे का नाम अमित खन्ना. उम्र 25 साल. ये उत्तम नगर में एसबीआई कार्ड में काम करता है. तीसरा कृष्ण है. 27 साल का कृष्ण स्पेनिश कल्चर सेंटर कनॉट प्लेस में काम करता है. चौथा 26 साल का मिथुन है, जो एक हेयर ड्रेसर है. जबकि पांचवा 27 साल का मनोज मित्तल सुल्तानपुरी में ही राशन डीलर के तौर पर काम करता है और बीजेपी से जुड़ा है. इन सभी को गैर इरादतन हत्या, खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाने और बाकी मामलों में गिरफ्तार किया गया है. सभी को अदालत में पेश किया गया. जहां से पांचों को तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है.

पुलिस ने पूछा था- लाश पर कफन है या नहीं?
तो ये तो थी दिल्ली पुलिस की अपनी कहानी. अब आपको वो कहानी बताते हैं, जिसे सुनकर आपको ही फैसला करना है कि दिल्ली की बेटी की मौत का असली गुनहगार कौन है? इस कहानी में एक अहम किरदार है दीपक. वो कंझावला में दूध का व्यापारी है. कंझावला में ही इसकी डेयरी है. शहरवालों तक दूध पहुंचाने के लिए वो तड़के ही अपनी दुकान खोल लेता है. रोजाना की तरह 1 जनवरी की सुबह 3 बजे भी उसने अपनी दुकान खोली. तब करीब सुबह के 3 बजकर 18 मिनट हुए थे. ये वही दीपक था, जिसका जिक्र दिल्ली पुलिस ने अपनी प्रेस रिलीज में किया है. दीपक को शुरू में ऐसा लगा था जैसे लाश कार से निकल कर बाहर आ गई है और बाहर पहिये में फंस गई है. ये खौफनाक मंजर देखते ही दीपक ने पहली बार पीसीआर को कॉल किया था. अब जरा अंदाजा लगाइए घबराया हुआ दीपक फोन पर पुलिस को ये बता रहा है कि एक कार है जिसमें एक लाश बंधी है और दूसरी तरफ से पुलिसवाले उससे ये पूछ रहे हैं कि लाश ने कफन पहना है या नहीं?

दीपक लगातार पुलिस से कर रहा था बात
दिल्ली पुलिस के लिए शायद मोटरकार के पहियों में लिपटी लाश की सूचना उतनी चौंकानेवाली नहीं थी. लेकिन दीपक के लिए थी. दीपक एक तरफ फोन पर लगातार पुलिस को उस कार की जानकारी दे रहा था, कार के रंग से लेकर नंबर तक बता रहा था और दूसरी तरफ खुद ही अपनी स्कूटी उठा कर साथ-साथ उस कार का पीछा भी कर रहा था. पीसीआर को फोन किए करीब 12 मिनट हो चुके थे. पर इन 12 मिनटों में एक भी पुलिसवाला पुलिस की जिप्सी या पीसीआर दीपक के बताई जगह पर नहीं पहुंची. बल्कि 12 मिनट बाद सुबह साढ़े तीन बजे दीपक को वही कार यू टर्न लेकर एक बार फिर वापस आती दिखाई दी. लाश अब भी कार के नीचे फंसी थी. उसने फिर से पुलिस से कहा कि कार मेरे सामने है. लाश अब भी फंसी है. आप जल्दी आओ. पर पुलिस तब भी नहीं आई.

दीपक ने PCR को दी थी कार की जानकारी
अब दीपक को भी लगने लगा था कि पुलिस कुछ नहीं करेगी. लिहाजा उसने तय किया कि वो खुद ही कार का पीछा करेगा. पर रात का वक्त था, पीछा करना रिस्की भी था. लिहाजा उसने सबसे पहले अपनी स्कूटी रखी और बोलेरो कार निकाली. अब वो कार से उन हैवानों की कार का पीछा करने लगा. इस दौरान कम से कम दो से 3 बार दीपक की नजर सड़क पर घूमती पीसीआर वैन पर पड़ी. एक पीसीआर वैन से तो दीपक ने कहा भी कि कार उस तरफ है, उसे पकड़ लो. मगर शायद उस पीसीआर वैन में सवार पुलिसवालों का मूड काम करने का था ही नहीं.

चश्मदीद दीपक ने बताया पुलिस का रवैया
इस दौरान दीपक अकेला लगा रहा. कार का पीछा करता रहा. तभी एक जगह उसे कार तो दिखाई दी, लेकिन अब कार के पहिए से लाश अलग हो चुकी थी. 3 बजकर 18 मिनट से लेकर सुबह 5 बजे तक दीपक अपना सारा काम धंधा छोड कर उस कार का पीछा करता रहा. पुलिस को फोन करता रहा. पुलिस से मदद मांगता रहा. फिर पुलिस का अफसोसनाक रवैया देख कर खाली हाथ वापस लौट आया. तो पुलिस के बाद ये दीपक की कहानी थी. इस अफसोसनाक हादसे के इकलौते चश्मदीद की कहानी. खुद दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर सागरपीत सिंह हुड्डा ने ऑन रिकॉर्ड ये कहा है कि उस लड़की को कार के पहियों तले करीब 10 से 12 किलोमीटर तक घसीटा गया था.

कार सवार आरोपियों को नहीं था कोई डर
चश्मदीद दीपक के मुताबिक जिस कार में उस लड़की की लाश को घसीटा जा रहा था, उसकी स्पीड मुश्किल से 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रही होगी. यानी कार में सवार लोगों को इस बात का कोई खौफ ही नहीं था कि उन्हें भागना है. जिस लड़की की मौत हुई वो आउटर दिल्ली के अमन विहार की रहनेवाली थी. सुल्तानपुरी में उसकी दुर्घटनागस्त स्कूटी मिली. जबकि लाश कंझावला में मिली. यानी इस हिसाब से इस लडकी ने उस एक रात 3 थाना इलाकों का सफर किया. अमन विहार, कंझावला और सुल्तानपुरी. दिल्ली पुलिस के पिछले कमिश्नर ने पीसीआर वैन को सीधे थाना से जोड़ दिया था.

3 थाना इलाके, 9 पीसीआर वैन
इस नए बदलाव के बाद हर थाने को कम से कम 3 पीसीआर वैन दिए गए. अब इस हिसाब से अगर तीनों थानों को जोड़ दें, तो उस रात 9 पीसीआर वैन इन इलाकों में गश्त पर होने चाहिए थे. दो या तीन पीसीआर वैन को तो गश्त पर दीपक ने देखा भी. स्पेशल कमिश्नर खुद कह रहे हैं कि लड़की को करीब 12 किलोमीटर तक घसीटा गया. जाहिर है कार मैन सड़क पर दौड़ रही थी. अब ऐसे में सवाल ये है कि 12 किलोमीटर और 2 घंटे तक एक भी पीसीआर वैन या गश्त पर मौजूद एक भी पुलिसवाले की नजर इस कार और कार के पहियों में फंसी लाश पर क्यों नहीं पडी?

उस रात कहां थी पुलिस?
10 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा सालाना बजट वाली दिल्ली पुलिस में लगभग 84 हजार जवान-अफसर हैं. लेकिन जमीनी सच्चाई ये है कि हर 6 सौ दिल्ली वालों पर सिर्फ 1 पुलिसवाला है. जिस रात या सुबह ये हादसा हुआ वो 31 दिसंबर की रात थी. हर साल 31 दिसंबर की रात दिल्ली की सड़कों पर दिल्ली पुलिस की सबसे ज्यादा गश्त होती है. नए साल के जश्न में शराब पीकर गाड़ी चलानेवालों के लिए खास तौर पर सबसे ज्यादा इसी रात अल्कोहल टेस्ट भी होते हैं. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक कार में सवार पांचों लड़कों ने शराब पी रखी थी. पांचों लड़के एक लाश को अपनी कार से 2 घंटे तक 12 किलोमीटर के दायरे में घसीटते भी रहे. अब ऐसे में सवाल ये है कि 31 दिसंबर की रात जब सबसे ज्यादा पुलिसवाले सड़कों पर होते हैं, तो फिर वो पुलिसवाले कहां नदारद थे? क्या नए साल के जश्न और सुरक्षा के नाम पर सिर्फ नई दिल्ली की खास इलाकों की ही चौकसी होती है? बाकी दिल्ली को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है?

बिना जांच ही पुलिस ने कर दी थी ये टिप्पणी
दिल्ली पुलिस को भी इस बात का इल्म था कि चश्मदीद दीपक के खुलासे के बाद उसकी वर्दी पर ऊंगलियां उठेंगी. इसीलिए बाद में अपनी साख बचाने की खातिर दिल्ली पुलिस ने उल्टे और गलतियां करनी शुरू कर दी. बिना फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के ही उसने अपनी तरफ से ये डिक्लियर कर दिया कि कार में सवार लड़के और उनकी शिकार बनी लड़की एक दूसरे से अंजान थे. ये एक रोड एक्सीडेंट का मामला है. लड़की के साथ कोई रेप नहीं हुआ है. हालांकि ये दिल्ली पुलिस भी अच्छी तरह से जानती है कि जब तक सारी रिपोर्ट ना आ जाए, जांच पूरी ना हो जाए, तब तक केस की हर पहलू से जांच जरूरी है. सवाल ये है कि-

– आखिर ये लड़की कार के पहिये तक पहुंची कैसे?
– उसकी स्कूटी का एक्सीडेंट कैसे हुआ?
– कार बार-बार एक ही इलाके में क्यों घूम रही थी?
– क्या पहियों में फंसने की वजह से लड़की के जिस्म पर कपड़े नहीं थे?
– या लड़की के साथ कुछ और हुआ था?

ये हो सकता है इस केस का अंजाम
अब हम आपको इस केस का अंजाम अभी बता देते हैं. कोर्ट में ये कहानी कुछ यूं पहुंचेगी. पांचों लड़के नए साल की मस्ती कर रहे थे. शराप पी कर कार चला रहे थे. तभी एक स्कूटी इनकी कार से आ टकराई. लड़की के कपड़े कार के पहिए में फंस गए. इस वजह से लड़की पहिए के साथ घिसटती चली गई. कार में म्यूजिक बज रहा था. सभी ने शराब पी रखी थी. बाहर अंधेरा था. फिर पीछे कोई देख भी नहीं रहा था. लिहाजा उन्हें कुछ पता नहीं चला. इस तरह ये एक ड्रंकन ड्राइव का केस भर बनता है. ऐसे में पांचों बहुत जल्दी और बड़ी आसानी से छूट जाएंगे.

अभी शायद आपको यह बात अटपटी लग रही होगी. मगर यकीन मानिए आने वाले दिनों में ऐसा ही होगा. ऐसा ही होता आया है और शायद आगे भी ऐसा ही होगा. बस फर्क इतना होगा कि तब कोई 12 किलोमीटर की जगह दो-चार-छह या आठ किलोमीटर घसीटी जाएगा या घसीटा जाएगा.

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