आर्मी में पहली बार नई ब्रांच में सिलेक्शन के आधार पर कर्नल बनेंगी महिलाएं, बनने जा रहा इतिहास

नई दिल्ली

इंडियन आर्मी की नई ब्रांच में पहली बार महिला अधिकारियों को कर्नल बनाने के लिए सिलेक्शन बोर्ड बैठेगा। सूत्रों के मुताबिक 9 जनवरी से 22 जनवरी तक सिलेक्शन बोर्ड की मीटिंग होगी, जिसमें 108 महिला अधिकारियों को कर्नल रैंक में प्रमोशन दिया जाएगा। दरअसल आर्मी में पहले सिर्फ मेडिकल कोर, लीगल और एजुकेशन कोर में ही महिला अधिकारियों को यह प्रमोशन दिया जाता था। क्योंकि इन्हीं ब्रांच में महिला अधिकारियों के लिए परमानेंट कमिशन था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साल 2021 से महिला अधिकारी उन सभी ब्रांच में परमानेंट कमिशन पा सकती हैं जिनमें वह शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत आई हैं।

क्यों है अहम
महिला अधिकारी आर्मी एयर डिफेंस, सिगनल्स, इंजीनियर्स, आर्मी एविएशन, इलैक्ट्रॉनिक्स ऐंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस कोर और इंटेलिजेंस कोर में परमानेंट कमिशन की हकदार हैं। इसका मतलब है कि वह इन सब ब्रांच में कर्नल और इससे ऊपर के किसी भी रैंक तक पहुंच सकती हैं।

1992 से 2006 बैच के लिए बोर्ड
सूत्रों के मुताबिक इस बार यह सिलेक्शन बोर्ड नई ब्रांच में भी महिला अधिकारियों के प्रमोशन पर विचार करेगा। 1992 से 2006 तक जो महिलाएं कमिशन हुई हैं उनके लिए यह बोर्ड है। कुल 244 महिला अधिकारियों पर इस सिलेक्शन बोर्ड में विचार किया जाएगा और इनमें से 108 को कर्नल रैंक में प्रमोशन दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इंजीनियरिंग ब्रांच में 28 सिग्नल्स में 18, आर्मी एयर डिफेंस में 3, एएससी में 14, एओसी में 19, ईएमई में 21 और इन्टेलिजेंस कोर 5 महिला अधिकारियों को इस बोर्ड के जरिए कर्नल रैंक में प्रमोशन दिया जाएगा।

टाइम स्केल और सिलेक्शन में फर्क
पिछले साल कुछ महिला अधिकारी कर्नल बनी थीं लेकिन वह टाइम स्केल प्रमोशन था। 26 साल की सर्विस पूरी होने के बाद यह टाइम स्केल रैंक दिया जाता है। यह सिलेक्शन से हुए प्रमोशन से अलग होता है। टाइम स्केल कर्नल बनने पर फिर आगे की रैंक में बढ़ने के चांस नहीं होते हैं लेकिन जो सिलेक्शन के आधार पर कर्नल बनेंगी वह आगे ब्रिगेडियर और इससे ऊपर रैंक तक भी जा सकती हैं।

अभी आपस में होगा मुकाबला
सूत्रों के मुताबिक जो सिलेक्शन बोर्ड बैठेगा उसमें कर्नल बनने के लिए महिला अधिकारी दूसरी महिला अधिकारियों से ही मुकाबला करेंगी। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि इन बैच की महिला अधिकारियों को कंपनी कमांडर बनने का मौका नहीं मिला था, न ही वह जूनियर कमांड कोर्स कर पाई थीं और ना ही स्टाफ कॉलेज। कर्नल बनने के लिए जूनियर कमांड कोर्स करना होता है और इन सबकी अलग मार्किंग होती है। लेकिन जब 2010 और इसके बाद कमिशन हुई महिला अधिकारियों का सिलेक्शन बोर्ड होगा तब उन्हें अपने पुरुष साथियों के साथ ही मुकाबला करना होगा।

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