MP : क्या है हनीट्रैप कांड? क्यों अश्लील सीडी को MP में मुद्दा बना रही कांग्रेस

भोपाल

मध्य प्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होना है। भाजपा-कांग्रेस दोनों ही अभी से तैयारी में जुट गए हैं। जीत के लिए दोनों ही दल साम, दाम, दंड, भेद की राजनीति पर उतारू हैं। इस बीच, प्रदेश में ‘भेद’ की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है। कांग्रेस, भाजपा के उस भेद को लेकर हमलावर हो गई है, जिसकी कुछ परतें पूर्ववर्ती कमलनाथ की सरकार में खुली थीं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा हनीट्रैप मामला उजागर हुआ था। यहीं से सेक्स सीडी और पेन ड्राइव सामनें आईं। अब कांग्रेस उसी सेक्स सीडी को लेकर भाजपा पर निशाना साध रही है।

मंगलवार को ही नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह ने यह बयान देकर सनसनी मचा दी है कि उनके पास भाजपा, आरएसएस नेताओं की सेक्स सीडी है, उन्होंने भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी घर बुलाकर सीडी दिखाने का आमंत्रण दिया है।

2018 में मध्य प्रदेश में 15 साल पर कांग्रेस की सरकार बनी थी। मुख्यमंत्री कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ थे। 17 सितंबर, 2019 को इंदौर नगर निगम के तत्कालीन इंजीनियर हरभजन सिंह पलासिया पुलिस थाने पहुंचे। वहां, उन्होंने पुलिस को जो बताया वहीं से हनी ट्रैप की परतें खुलना शुरू हुईं। हरभजन ने बताया कि महिलाएं उसे अश्लील वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल करके उनसे तीन करोड़ रुपये मांग रही हैं। पुलिस ने ब्लैकमेल करने वाली भोपाल की एक महिला को अपनी गिरफ्त में लिया, तब पुलिस को पता नहीं था कि यह तो महज एक मछली है। मगरमच्छ के बारे में उसे कोई अंदाजा नहीं था। बाद में पुलिस ने पता लगाया कि आरोपी महिला का पति और निगम इंजीनियर हरभजन अच्छे दोस्त थे।

क्या है सीडी कांड
महिला ने नौकरी दिलाने के बहाने एक 18 साल की छात्रा से इंजीनियर की दोस्ती करवा दी। इसके बाद फिर होटल में छात्रा ने मोबाइल फोन से इंजीनियर और महिला के सेक्स वीडियो बना लिया। वीडियो बनाने के बाद छात्रा, ने महिला और इंजीनियर को ब्लैकमेल किया। यह सिलसिला 8 महीने चला। परेशान इंजीनियर पुलिस के पास चला गया। पुलिस ने इंजीनियर से फोन करवाया और महिला को 50 लाख रुपये लेने इंदौर बुलाया। 17 अक्टूबर 2019 को महिला कार में छात्रा के साथ पहुंची। वहीं, पुलिस ने इन्हें पकड़ लिया। पुलिस के आगे महिलाएं टूट गई और भोपाल की कुछ अन्य युवतियों के नाम उगल दिया। इंदौर एटीएस की टीम भोपाल पहुंची और भोपाल पुलिस की मदद से मिनाल रेसीडेंसी, रेवेरा टाउनशिप, कोटरा से तीन अलग-अलग महिलाओं को हिरासत में लिया। इन महिलाओं के नाम 29 वर्षीय आरती दयाल, श्वेता स्वपनिल जैन, श्वेता विजय जैन। यही मुख्य किरदार थीं। 18 अक्टूबर को 6 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले में पांच महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया था। जो हनीट्रैप के जरिए अधिकारी, नेता, कारोबारी और रसूखदारों को फंसा कर उनसे मोटी रकम ऐंठते थे। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी कई पुलिस अफसरों को तबादला भी किया गया। कमलनाथ सरकार ने अपने पसंद के अधिकारियों से गोपनीय जांच कराई।

किसकी-किसकी सेक्स सीडी? कई रसूखदारों हुए बेपर्दा
हनीट्रैप गैंग ने ब्लैकमेलिंग करके करोड़ों रुपए जमा किए। इनके पास 100 से अधिक सेक्स वीडियो मिले। जिनमें 20 से ज्यादा IAS, IPS अफसरों के साथ नेताओं के भी वीडियो हैं। इन महिलाओं ने एक पूर्व मुख्यमंत्री, दो मंत्री, तीन पूर्व मंत्री, एक पूर्व सांसद, 14 IAS अफसर, 9 IPS अफसरों को अपना शिकार बनाया है। हालांकि इनमें से एक—दो नेताओं और दो अफसरों के वीडियो ही लीक हुए।

वीडियो किसके पास?
समय बीतने के साथ मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिर गई। शिवराज पुन: सरकार में आए। भाजपा नेता लगातार आरोप लगाते हैं कि कमलनाथ ने सेक्स सीडी और अश्लील वीडियो की सीडी खुद के पास सुरक्षित रखी है। जबकि कमलनाथ ने इसे महज झूठा आरोप करार दिया।

एक सांसद ने की थी आत्महत्या की कोशिश
अश्लील सीडी में अपना वीडियो देखकर एक पूर्व सांसद सदमे में आ गये थे। बाद में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया। एक पूर्व मंत्री का वीडियो भी वायरल हुआ था, बाद में कोरोना में उनका देहांत हो गया। एक पूर्व मुख्यमंत्री भी लपेटे में आए थे, जिनका देहांत हो चुका है।

मंत्रियों के संपर्क में ऐसे आई महिला
महिला भोपाल के बेहद पॉश इलाके रिवेरा टाउन में रहती थी। वह रसूख झाड़ने के लिए एक विधायक के घर में 35 हजार रुपये महीने के किराये पर रहती थी। इस कॉलोनी में पूर्व मंत्रियों और तत्कालीन कमलनाथ सरकार के मंत्री और विधायकों के भी घर हैं। महिला यहीं से साजिश रचती थी। इसलिए नेता उसके जाल में आसानी से फंस गए। जिस बंगल मे ये महिला रहती थी, उसे एक पूर्व मुख्यमंत्री ने उसे दिलवाया था। ब्लेकमैलर महिला साल 2013 में ही एक बड़ी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहती थी। लेकिन विधानसभा चुनाव से ऐन पहले खुद के ड्राइवर के साथ ही उसका एक अश्लील वीडियो भी वायरल हो गया। यहीं से उसका सपना चौपट हो गया।

क्या कमल नाथ के पास वीडियो हैं?
सरकार से बाहर होने के बाद एक बार कमल नाथ ने हनी ट्रैप की पेन ड्राइव अपने पास होने का दावा किया था। इस दावे के बाद एसआईटी सक्रिय हो गई थी एसआईटी ने कमल नाथ को नोटिस देकर जांच में सहयोग देने की अपील की थी और पैन ड्राइव भी मांगी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। बाद में कमल नाथ ने कहा था कि भाजपा ओछी राजनीति कर रही है, मेरे पास कोई पैन ड्राइव नहीं है। कई बार भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि कमलनाथ के पास एक पैन ड्राइव है, जिसमें कई दिग्गज नेताओं के सेक्स वीडियो हैं।

भाजपा ने क्यों नहीं कराई जांच
प्रदेश में भाजपा की सरकार के आने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसा दावा किया जाता है कि इस सेक्स सीडी में अधिकतर वीडियो भाजपा नेताओं के हैं, इसलिए भाजपा सरकार जांच आगे नहीं बढ़वा रही है। वर्तमान में कांग्रेस के मीडिया विभाग के चैयरमैन और तत्कालीन कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा था कि हनी ट्रैप से संबंधित सभी दस्तावेज़ सरकार के पास हैं। इस मामले में सभी नेता भाजपा के हैं और अगर सरकार चाहती है उनका शिकार करना तो सही समय में इसे कांग्रेस द्वारा सामने ला दिया जाएगा।

वीडी शर्मा ने उठाया था सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो सांसद वीडी शर्मा ने कमल नाथ पर सवाल किया था कि आख़िर ‘उनके पास सीडी आई कैसे? इसकी जांच की जानी चाहिये। वर्तमान समय में भी सेक्स सीडी मामले में शर्मा ही कांग्रेस पर सबसे ज्यादा हमलावर दिख रहे हैं।

ऐसे बनाते थे सेक्स वीडियो
हनीट्रैप कांड की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन अफसर और नेताओं से आरती की दोस्ती करवाती थी। बाद में आरती उन्हें अपने जाल में फंसा कर वीडियो बना लेती। फिर श्वेता के इशारे पर रुपये वसूलने का काम होता था। श्वेता स्वप्निल जैन (48), श्वेता विजय जैन (39), आरती दयाल (29), मोनिका यादव (19), बरखा सोनी (34) इस पूरे मामले में मुख्य किरदार थे।
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कई अधिकारी बदले गए
23 सितंबर 2019 को गठित एसआईटी की जिम्मेदारी सबसे पहले 1997 बैच के आईपीएस डी श्रीनिवास वर्मा को दी गई थी। लेकिन, गठन के 24 घंटे के अंदर ही एसआईटी की जिम्मेदारी तेजतर्रार अफसरों में शुमार एडीजी संजीव शमी को दी गई। एक अक्टूर को संजीव शमी को एसआईटी प्रमुख के पद से हटाकर राजेंद्र कुमार को एसआईटी जांच की कमान सौंपी गई। श्वेता ने एक बार एसआईटी को बताया था कि आईपीएस और आईएएस अफसरों की डिमांड पर कॉलेज की छात्राओं को उनके पास भेजा जाता था। इन अधिकारियों में कई तो उन छात्राओं की पिता की उम्र के बराबर थे।

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