दिल्‍ली मेयर चुनाव के गेम में क्‍या बीजेपी बनी हुई है? पूरे बवाल के बीच वोटों का गणित समझ लीजिए

नई दिल्‍ली

सात दिसंबर को आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव में धमाकेदार जीत दर्ज की थी। उसने 250 में से 134 वार्ड में जीत हासिल की थी। बीजेपी 104 वार्ड में जीती थी। इसके बाद सबकी नजरें दिल्‍ली के मेयर चुनाव पर टिकी थीं। संख्‍या बल को देखकर ज्‍यादातर को लग रहा था कि आप के लिए रास्‍ता आसान होगा। लेकिन, शुक्रवार को दिख गया कि इस चुनाव में उसकी राह आसान नहीं रहने वाली है। बीजेपी उसके लिए कदम-कदम पर चुनौती पेश करेगी। दिल्‍ली मेयर चुनाव में राजनीतिक पैंतरेबाजी की ऐसी बानगी शायद ही कभी देखी गई हो। एमसीडी सदन में दोनों पक्षों की गुस्‍सा-गर्मी से एक बात तो साफ है। मेयर के चुनावी मैदान में बीजेपी आउट नहीं है। आखिर मेयर इलेक्‍शन में वोटों का गणित क्‍या है? एमसीडी चुनाव में आप की जीत के बावजूद उसके रास्‍ते में चुनौती कैसे है?

बीजेपी ने जिस दिन दिल्‍ली के मेयर पद के लिए रेखा गुप्‍ता को नामित किया था, उसी दिन साफ था कि टक्‍कर तो होगी। आप की मेयर कैंडिडेट शैली ओबेरॉय के खिलाफ रेखा गुप्‍ता को उतारा गया है। अगर बीजेपी कोई कैंडिडेट खड़ा नहीं करती तो निश्चित ही 39 साल की शैली ओबेरॉय का मेयर बनने का रास्‍ता साफ था। प‍हले के उलट अब दिल्‍ली का एक मेयर होगा। पूर्व में हर एक कॉरपोरेशन का अपना मेयर होता था। यानी साफ है कि मेयर के पास काफी ज्‍यादा पावर होगी। एमसीडी में 2007 से बीजेपी सत्‍ता में थी।

चंडीगढ़ में बीजेपी कर चुकी है खेल
चंडीगढ़ में 35 में से सिर्फ 12 वार्ड जीतने के बावजूद बीजेपी जनवरी में अपना मेयर बनाने में कामयाब हुई थी। आप के 14 कैंडिडेट जीते थे। फिर भी वह हाथ मलते रह गई थी। दिल्‍ली में भी ऐसा हो सकता है। आप को इस बात की आशंका है। जिस तरह से शुक्रवार को एमसीडी की पहली बैठक में माहौल बना है, वह इसकी ओर इशारा करता है। बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

मेयर के चुनाव में वोटों का गुणा-गण‍ित क्‍या है?
दिल्ली म्‍यूनिसिपल कॉरपोरेशन ऐक्‍ट के अनुसार, एमसीडी को हर पांच साल में चुनाव कराना होता है। इसका मकसद यह तय करना होता है कि कौन सी पार्टी सत्ता में रहेगी। ऐक्‍ट की धारा 35 में कहा गया है कि एमसीडी को हर वित्तीय वर्ष में उस वर्ष की पहली बैठक में मेयर चुनाव कराना चाहिए।

मेयर का कार्यकाल एक साल तक रहता है। हालांकि, अधिनियम में यह अनिवार्य है कि किसी पार्टी के कार्यकाल के पहले वर्ष में उसे मेयर पद के लिए एक महिला का चुनाव करना होगा। तीसरे वर्ष के लिए अपने पार्षदों में से एक अनुसूचित जाति के सदस्य का चुनाव करना है। इस साल अप्रैल की जगह दिसंबर में एमसीडी चुनाव होने से मेयर का कार्यकाल कुछ महीने ही बचा है। निर्वाचित पार्षदों के अलावा दिल्‍ली के 10 लोकसभा और राज्यसभा सांसद और 14 विधायक चुनाव में मतदान करने के पात्र हैं। नामित सदस्‍य मेयर चुनाव में वोट नहीं करते हैं। इन्‍हें एल्‍डरमैन कहा जाता है। इनकी नियुक्ति दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल करते हैं। AAP को लगता है कि चुनाव हारने के बावजूद एमसीडी की सत्‍ता पर काबिज रहने के लिए इनका दुरुपयोग हो सकता है।

एक ओर जहां सभी 7 लोकसभा सांसद बीजेपी के हैं, वहीं आप के तीन राज्यसभा सांसद हैं। 7 सांसदों के साथ मेयर चुनाव में बीजेपी के मतों की संख्या 111 (104 पार्षदों सहित) हो जाती है। वहीं, आप 151 तक जा सकती है। इसमें 134 पार्षद, 3 राज्यसभा सांसद और 14 विधायक शामिल हैं। कौन से 14 विधायक वोट करेंगे, उस पर स्‍पीकर फैसला लेते हैं। चूंकि स्‍पीकर आप से हैं। ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि वह किस पार्टी को आमंत्रण देंगे। दिल्ली के विधायकों और सांसदों के साथ पार्षद मेयर चुनाव में 274 सदस्यीय निर्वाचक मंडल बनाते हैं। हालांकि, इसके बाद भी बीजेपी गुणा-गणित बिगाड़ सकती है। कारण है कि म्‍यूनिसिपल चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता है। बीजेपी की सारी उम्‍मीदें क्रॉस वोटिंग पर टिकी हैं।

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