3 साल बाद भी मुन्‍ना बजरंगी मर्डर में लखनऊ CBI के हाथ खाली, अब दिल्‍ली ब्रांच करेगी जांच

लखनऊ

बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हुई हत्‍या की जांच अब CBI की दिल्ली टीम करेगी। हाई कोर्ट ने करीब तीन साल पहले बजरंगी हत्याकांड की जांच CBI से कराने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच CBI की लखनऊ स्थित क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। लेकिन तीन साल बाद भी लखनऊ CBI की क्राइम ब्रांच इस मामले में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके चलते अब मामले की जांच दिल्ली शाखा करेगी।

मुन्ना बजरंगी यूपी की झांसी जेल में बंद था, जहां से 8 जुलाई 2018 की रात जेल प्रशासन ने उसे बागपत जिला जेल भेजा था। कहा गया था कि पूर्व BSP विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में बजरंगी की पेशी होनी थी। 9 जुलाई 2018 को बागपत जिला जेल में मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मुन्ना बजरंगी के शरीर में 12 गोलियों के निशान पाए गए थे। उसके शरीर पर भी कई चोट के निशान मिले थे।

मुन्ना बजरंगी की हत्या का आरोप बागपत जेल में बंद गैंगस्टर सुनील राठी पर था। पुलिस पूछताछ में सुनील ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। राठी ने कहा था कि दोनों के बीच बहस हुई थी। इसके बाद राठी ने गोली मारकर बजरंगी की हत्या कर दी थी। मुन्ना बजरंगी पर 40 हत्याओं, लूट, रंगदारी की घटनाओं में शामिल होने का केस दर्ज थे।

पत्‍नी ने लगाई थी CBI जांच की गुहार
इस मामले में बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सीमा सिंह ने आरोप लगाया था कि जेल प्रशासन ने सुनील राठी से मिलीभगत कर यह हत्‍या करवाई है। असल में CBI को इसकी जांच करनी थी कि मुन्ना बजरंगी को बागपत जेल में क्यों शिफ्ट किया गया था? मुन्ना बजरंगी को बागपत जेल में शिफ्ट करने से पहले 1 जुलाई से 6 जुलाई के बीच उससे किन-किन लोगों ने मुलाकात की, CBI को इसकी भी जांच करनी थी। इसी तरह के कई बिंदु हैं, जिनको लेकर हाईकोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए थे। सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ CBI की क्राइम ब्रांच तीन साल बाद भी इन बिंदुओं पर जांच नहीं कर पाई थी।

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