दिल्ली सरकार ने केजरीवाल को दिया वसूली का नोटिस, सिर चकराने वाला ये माजरा क्या है?

नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में उपराज्यपाल (LG) और चुनी हुई सरकार के बीच अधिकारों (पावर शेयरिंग) को लेकर टकराव कोई नई बात नहीं है। इस समय मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है। एक दिन पहले कोर्ट ने कहा कि ये तय करना होगा कि सेवाओं को कौन नियंत्रित करेगा। कुछ घंटे बाद ही एक नोटिस ने लोगों को कन्फ्यूज कर दिया। मामला बड़ा ही दिलचस्प और महत्वपूर्ण है। दरअसल, आम लोग किसी भी राज्य सरकार का मतलब उस स्टेट में सत्ता पर काबिज पार्टी की सरकार को मानते हैं। लेकिन जब लोगों ने खबर पढ़ी कि दिल्ली सरकार ने आम आदमी पार्टी को नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर 163.6 करोड़ रुपये जमा करने को कहा है तो वे समझ ही नहीं पाए कि माजरा क्या है। दिल्ली यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कामकाज के लिए भले ही चुनी हुई सरकार हो लेकिन दिल्ली सरकार की बात आएगी तो पावर सेंटर LG ही हैं। यह आदेश तो यही बता है। यही वजह है कि सूचना एवं प्रचार निदेशालय (DIP) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी को 164 करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया है।

भाजपा के सीएम दिल्ली में छपवाते हैं विज्ञापन
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पलटवार करते हुए भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आम आदमी पार्टी की सरकार को दबाने के लिए दिल्ली के अधिकारियों पर असंवैधानिक नियंत्रण बनाए रखना चाहती है। सिसोदिया ने ट्वीट किया, ‘दिल्ली के अधिकारियों पर असंवैधानिक नियंत्रण का नाजायज इस्तेमाल देखिए। भाजपा ने दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रचार निदेशालय की सचिव एलिस वाज (IAS) से नोटिस दिलवाया है कि 2017 से दिल्ली के बाहर के राज्यों में दिए गए विज्ञापनों का खर्च मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी से वसूला जाएगा।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘दिल्ली के अखबारों में भाजपा के तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों के विज्ञापन छपते हैं। पूरी दिल्ली में भाजपा के मुख्यमंत्रियों के फोटो वाले सरकारी होर्डिंग लगे हैं। क्या इनका खर्च भाजपा के मुख्यमंत्रियों से वसूला जाएगा?’

किस बात का है नोटिस, पूरा मामला समझिए
आरोप है कि सरकारी खजाने से 2016-17 में सरकारी विज्ञापनों के नाम पर राजनीतिक विज्ञापन दिए गए। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने 20 दिसंबर 2022 को मुख्य सचिव को राजनीतिक विज्ञापनों के लिए आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपये वसूलने का निर्देश दिया था, जिसे उसने सरकारी विज्ञापनों के रूप में प्रकाशित किया था। उन्होंने सरकारी विज्ञापनों की आड़ में प्रकाशित होने वाले राजनीतिक विज्ञापनों के लिए AAP को राज्य के खजाने को 97,14,69,137 रुपये और ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया। इस बाबत सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि राजनीतिक दल की छवि को चमकाने में सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जाए।

वित्त वर्ष 2022-2023 में पुनर्मूल्यांकन के बाद आंकड़ा बढ़ा और ब्याज आदि मिलाकर 163,61,88,265 रुपये पहुंच गया। आदेश में कहा गया है कि अगर 10 दिन में पैसा जमा नहीं किया जाता है तो कानून के अनुसार आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों ने TOI को बताया कि विभाग चाहे तो दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित AAP के मुख्यालय को सील कर सकती है। नोटिस सचिव (सूचना एवं प्रचार) की ओर से दिया गया है।

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि एलजी सक्सेना ने बीजेपी के इशारे पर यह आदेश दिया है क्योंकि इस तरह का आदेश देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। 19 दिसंबर के आदेश के बाद DIP ने आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल को नोटिस दिया था। अधिकारियों ने बताया कि 99.31 करोड़ रुपया प्रिंसिपल अमाउंट है और 64.31 करोड़ रुपये ब्याज दंड है।बताया जा रहा है कि अगर ‘आप’ संयोजक पैसा देने में विफल रहते हैं, तो दिल्ली के उपराज्यपाल के पिछले आदेश के अनुसार पार्टी की संपत्तियां कुर्क की जा सकती हैं।

राष्ट्रीय राजधानी कौन चला रहा?
उधर, केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह सोचना गलत है कि राष्ट्रीय राजधानी में सबकुछ उपराज्यपाल करते हैं और आम आदमी पार्टी की सरकार ‘प्रतीकात्मक’ है। राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के विवाद पर सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि संवैधानिक ढांचा 1992 में प्रभाव में आया था और सबकुछ सौहार्द्रपूर्वक चल रहा है।

1992 में अनुच्छेद 239एए संविधान में शामिल किया गया था जिसमें दिल्ली के संबंध में विशेष प्रावधान हैं। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि 1992 से आज तक मतभेद होने पर केवल सात मामले राष्ट्रपति को भेजे गए हैं। उन्होंने कोर्ट से कहा, ‘किसी देश की राजधानी की हमेशा विशिष्ट स्थिति रही है।’

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