क्या गुजरात में ‘आप’ का गेमओवर करना चाहती है बीजेपी? इन बातों से समझिए भूपेन्द्र पटेल का गेम प्लान

अहमदाबाद

गुजरात बीजेपी अपने सबसे मजबूत गढ़ में आम आदमी पार्टी (आप) को मुद्दाविहीन करने की दिशा में बढ़ रही है? गुजरात की भूपेन्द्र पटेल की अगुवाई वाली नई सरकार तमाम उन मुद्दों पर काम कर रही है, जिन्हें चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी ने जोर-शोर से उठाया था। चाहे शिक्षा-स्वास्थ्य की बात हो या फिर आउटसोर्सिंग खत्म करने की बात। भूपेन्द्र पटेल की सरकार ने इन्हीं मोर्चों पर काम कर रही है। विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने किसानों के साथ संवाद करने के बाद जमीनों के सर्वे रद्द करने और फिर से सर्वे कराने का ऐलान किया था। भूपेन्द्र पटेल सरकार ने जमीन के सर्वे भी फिर से कराने का ऐलान किया है।

ऐसे में चर्चा है कि चुनावों के दौरान जो मुद्दे आप ने उठाए थे, क्या सरकार पहले फेस में उन्हें खत्म करना चाहती है? इस सवाल पर बीजेपी के गुजरात प्रदेश के मीडिया कंवीनर डॉ. यग्नेश दवे कहते हैं ऐसा नहीं, गुजरात में बीजेपी की सरकार और सतत सातवीं बार है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पार्टी लगातार लोगों की चिंता कर रही है। लोगों ने फिर हमें अभूतपूर्व समर्थन दिया है। अपना भरोसा जताया है, तो ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि जो जनता के जो भी प्रश्न हैं उन्हें हल किया जाए। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने पिछले एक महीने में वही फैसले लिए हैं।

गुजरात की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार दिलीप गोहिल कहते हैं अगर हमारे सिर में दर्द होता है तो हम सिरदर्द का इलाज करते हैं। गुजरात सरकार उन्हें प्रश्नों को हल कर रही है जिन मुद्दों ने मुश्किल खड़ी की थी। आगे लोकसभा के चुनाव हैं ऐसे में पार्टी नहीं चाहेगी कि एक भी सीट कम हो। 2014 हो या फिर 2019 दोनों चुनाव में अगर केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी, तो इसमें गुजरात का प्रदर्शन 100 फीसदी रही। गोहित कहते यह बिल्कुल सही है कि भूपेन्द्र पटेल सीएम की बजाए कॉमन मैन की छवि गढ़ रहे हैं। उन्होंने लोगों से सीधा संवाद करने का फैसला किया है, लेकिन आप उनके लिए चिंता का सबब है, क्योंकि आप को सीटें जरूर कम मिली हैं, लेकिन वह 32 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही।

तो क्या करेगी आप?
गुजरात विधानसभा चुनावों में आप को ज्यादा सीटें नहीं मिल पाई थीं पार्टी सिर्फ 5 सीटें जीती थी, हालांकि उसे 12.9 प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी के संयोजक ने अरविंद केजरीवाल ने इसे बड़ी उपलब्धि करार दिया था। ऐसे में जब मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल कॉमन मैन की छवि गढ़ रहे हैं तो आप आने वाले दिनों में किन मुद्दों को लेकर आगे बढ़ेगी। आप का एक बड़ा आरोप था कि असली मुख्यमंत्री तो सीआर पाटिल हैं, इस बार के फैसलों में पाटिल की बजाए सीएम और सीएम ऑफिस की चर्चा अधिक है। जो भी पिछले 30 दिनों के घटनाक्रम को देखें तो लगता है कि सरकार विपक्ष को मुद्दा विहीन बनाने पर फोकस कर रही है। इसमें आप द्वारा उठाए गए मुद्दे अधिक हैं। चर्चा यह भी है कि सरकार बजट में फ्री की योजनाओं का बंद करने के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य पर अपना बजट खर्च बढ़ा सकती है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने बड़े शहरों की निगरानी जिस तरह से सीएमओ के दायरे में ली है। उससे साफ है कि दादा इस बार बड़ी लकीर खींचने के मूड में हैं। अगर जरूरत पड़ी तो वे दादागिरी भी दिखा सकते हैं।

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