आधी रात का सच… किसानों को क्यों मिलना है मुआवजा? बक्सर में बवाल की पूरी कहानी

नई दिल्ली,

बिहार के बक्सर में किसानों ने जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन किया. दरअसल, बक्सर के चौसा गांव में सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) के थर्मल पावर प्लांट के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया है. किसान इसका उचित मुआवजा मांग रहे हैं. पुलिस ने मंगलवार देर रात किसानों के घर में घुसकर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया.

आरोप है कि पुलिस ने घर में घुसकर महिलाओं-पुरुषों के साथ बच्चों पर भी बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाईं हैं. लाठीचार्ज की घटना का वीडियो किसानों के परिजन साझा कर यह पूछ रहे हैं कि अपराधियों के सामने घुटने टेक देने वाली पुलिस ने आखिर हमें इतनी बर्बरता से क्यों मारा है.

मंगलवार रात घरों में घुसकर पुलिस द्वारा लाठियां बरसाए जाने की घटना के बाद किसान भड़क गए. उन्होंने गाड़ियों को फूंक दिया. चौसा पावर प्लांट में भी तोड़फोड़ कर दी.किसानों ने मोर्चा खोल दिया और रात भर बवाल करते रहे. किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया और बसों में आग लगा दी. पुलिस की गाड़ियां भी फूंक डालीं. किसान पिछले दो महीने से मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.

2010-11 में शुरू किया गया था जमीन का अधिग्रहण
दरअसल, चौसा में एसजेवीएन के द्वारा पावर प्लांट के लिए किसानों का भूमि अधिग्रहण 2010-11 से पहले किया गया था. उस समय किसानों को 2010-11 के अनुसार, मुआवजे का भुगतान किया गया था. इसके बाद कंपनी ने फिर 2022 में किसानों की जमीन अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू की.

मौजूदा दर के हिसाब के किसान मांग रहे मुआवजा 
इसके बाद किसान अब मौजूदा दरों के हिसाब से अधिग्रहण की जाने वाली जमीन का मुआवजा मांग रहे हैं. कंपनी पुरानी दर पर ही मुआवजा देकर जबरजस्ती जमीन अधिग्रहण कर रही है. इसके विरोध में पिछले 2 महीने से किसान आंदोलन कर रहे हैं. इसको लेकर पुलिस ने रात में घर में घुसकर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों पर बर्बरतापूर्ण तरीके से लाठी बरसाई.

एसजेवीएन कंपनी ने किसानों से किए थे बड़े-बड़े वादे
चौसा में थर्मल पावर प्लांट लगाने से पहले जिले के किसानों को कंपनी ने आश्वासन दिया था कि कंपनी के इस इलाके में स्थापित होने के बाद जिले में तेजी से विकास होगा. इसके साथ ही साथ कंपनी के सीएसआर फंड से यहां बड़े-बड़े स्कूल, होटल और रोजगार के संसाधन बढ़ाए जाएंगे.

चारों तरफ खुशहाली होगी. इसके अलावा नौकरी में स्थानीय लोगों को वरीयता दी जाएगी. मगर, जैसे ही किसानों ने एग्रीमेंट पर दस्तखत किए, उसके बाद सब बदल गया. कंपनी के अंदर सभी कर्मियों की बहाली अन्य प्रदेशों से की गई.

लाठीचार्ज को लेकर क्या कहते हैं अधिकारी
किसानों के घर में घुसकर रात 12 बजे लाठी बरसाने के आरोपी थानेदार अमित कुमार से जब पूछा गया कि आखिर पुलिस रात में किसानों के घर क्या करने गई थी. इस पर उन्होंने कहा कि एसजेवीएन पावर प्लांट के द्वारा जिन-जिन किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी, पुलिस उन्हें रात में पकड़ने गई थी. इस दौरान पहले उन लोगों ने हमला किया, जिसके बाद पुलिस ने लाठी बरसाई.

सीसीटीवी फुटेज ने बेनकाब कर दिया पुलिस का चेहरा 
गौरतलब है कि पुलिस का चेहरा सीसीटीवी फुटेज ने बेनकाब कर दिया है. इसमें साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिस किसान के घर के बाहर पहले से खड़ी है और दरवाजा बंद है. हालांकि, पुलिस को इस बात की भनक तक नहीं थी कि ग्रामीण इलाके के किसानों भी अपने यहां सीसीटीवी लगाए होंगे.

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे बोले- किसानों के साथ अत्यचार बर्दाश्त नहीं होगा
सांसद और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने बक्सर हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई अलोकतांत्रिक थी. केंद्रीय मंत्री चौबे ने कहा कि जिले के डीएम, कमिश्नर सहित सभी पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों से बातचीत हुई है.

अश्विनी चौबे ने कहा कि उन्होंने अफसरों से कहा है कि वे किसानों से तत्काल बातचीत की प्रक्रिया शुरू करें. तनाव कम करने की कोशिश करें. हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है. उन्होंने कहा कि देर रात पुलिस ने जिस तरह से किसानों के घर में घुसकर कार्रवाई की है, वह गुंडागर्दी थी.केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि मैंने मांग की है कि जो भी दोषी पुलिस वाले हैं, जिन्होंने देर रात बिना वारंट के किसानों के घर में घुसकर लाठियां चलाईं हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

पूरी सरकार धृतराष्ट्र बन गई है- केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे 
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार धृतराष्ट्र बनकर यह सब नहीं देख सकते हैं. पूरी सरकार धृतराष्ट्र बन गई है. जनता को रोड पर छोड़कर जदयू, राजद और कांग्रेस सहित उनके सहयोगी दल सत्ता का सुख भोग रहे हैं. युवा रोजगार मांग रहे हैं, तो उन्हें लाठी से पीटा जा रहा है. किसान हक मांग रहे हैं, तो घरों में घुसकर उन्हें पीटा जा रहा है.

अश्विनी चौबे ने कहा कि नीतीश बाबू यही जंगल राज है. मैंने 12 दिसंबर 2022 को कंपनी और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की थी. उन्हें निर्देश दिया था कि वह शांतिपूर्ण तरीके से जमीन अधिग्रहण के मसले को सुलझाएं. जिला प्रशासन को भी आगाह किया था. किसानों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं होगा. कोई भी हिंसा न करें. हिंसा से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता है.

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