भोपाल का नाम भोजपाल करें तभी मेरी कथा सफल हो पाएगी : जगदगुरु रामभद्राचार्य

भोपाल

राजधानी के भेल दशहरा मैदान पर चल रही श्रीराम कथा में जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने अपनी 1361वीं कथा के छाठवें दिन की कथा में बताया कि आज मध्य प्रदेश की पुण्यदायिनी नदी नर्मदा की जयंती है। इनका उद्गम अमरकंटक (अमृकूट) में हुआ था। महाराज ने बताया कि नर्मदा की गोद में शिव जी भी नर्मदेश्वर बनकर खेलते हैं। यहां शिवजी हरिहर के रूप में हैं। इस मौके पर धन-धन नर्मदा मैया, लेहंू मैं तोहरी बलैइया जैसी सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी।

आगे की कथा में कहा कि सब द्विज देहुं हरषि अनुशासन, रामचंद्र बैठहिं सिम्हासन, महाराज ने बताया कि वशिष्ट जी ने सभी ब्राह्मणों से कहा कि सभी लोग प्रसन्नता पूर्वक अनुशासन दीजिए की रामचंद्र सिंम्हासन पर बैठें। उसी तरह मैं मध्य प्रदेश सरकार को अनुशासन दे रहा हूं कि भोपाल का नाम भोजपाल करें, तभी मेरी कथा सफल होगी। भजपा सरकार ही भोपाल को भोजपाल बनाएगी।

महाराज ने कहा कि कांग्रेस ने मेरी योग्यता का कोई मूल्यांकन नहीं किया। भाजपा सरकार ने जरूर मूल्यांकन किया और वर्ष 2015 मेंं पद्मविभूषण से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा मुझसे पे्रम करती है तो मैं भी उससे प्रेम करता हूं। मैं भविष्यवाणी कर रहा हूं कि तीसरी बार भी नरेंद्र मोदी आएंगे। उन्होंने कहा कि इस बार तीन प्रमुख कार्य करना है, इसमें गोवध बंद कराना, हिन्दी को राष्ट्रभाषा और रामचरित मानस को राष्ट्रगं्रथ बनवाना है। इस मौके पर महाराज ने कहा कि अयोध्या रामजी की थी, है और रहेगी। रामभद्राचार्य महाराज ने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि मैंने कभी भी खुद को दिव्यांग नहीं माना और न ही कम्पनसेशन लिया। महाराज ने कहा कि संतों को अवश्य राजनीति में पडऩा चाहिए पर अपने स्वार्थों के लिए नहीं।

रामभद्राचार्य महाराज ने बताया कि चंद्रमा की तरह रामचंद्र में भी 16 कलाएं थी। उन्होंने पहली कला अयोध्यावासियों को दी। दूसरी कला वशिष्ट जी को दी। तीसरी कला विश्वामित्र को दिया। चौथी कला अहिल्या को और पांचवी कला सीता जी को दी। महाराज ने बताया कि रामजी ने ताडक़ा का वध किया, अहिल्या का उद्वार किया और सीता का शृंगार किया। आगे की कथा में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को मांगने जाना। ताडक़ा का वध, अहिल्या का उद्धार की कथा सुनाई।

इसके बाद धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर की कथा सुनाते हुए झुक जइयो ललन एक बार किशोरी मोरी छोटी सी जैसी सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। इसके बाद लक्ष्मण परशुराम संवाद का वर्णन किया। कथा के शुरुआत में नारायण सिंह परमार के नेतृत्व में परमार समाज के लोगों ने भोपाल का नाम भोजपाल करने की पहल करने पर महाराज का सम्मान किया। कथा में मुख्य यजमान शुभावती-हीरा प्रसाद यादव हैं।

शनिवार को कथा सुनने पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, आबकारी अधिकारी हुकुम सिंह भदौरिया, मेट्रो प्रोजेक्ट के डायरेक्टर अजय शर्मा, श्रीकृष्ण मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र सिंह यादव, मेला समिति के अध्यक्ष सुनील यादव, संयोजक विकास वीरानी, महामंत्री हरीश कुमार राम, उपाध्यक्ष विरेंद्र तिवारी के साथ ही मेला मेला समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे।

About bheldn

Check Also

नव पदोन्नत पर्यवेक्षकों का सम्मान एवं अभिनंदन कार्यक्रम

भोपाल। अखिल भारतीय अधिकारी एवं सुपरवाइजर संघ संबंध भारतीय मजदूर संघ भेल भोपाल द्वारा बुधवार …