कंगाल श्रीलंका को बचाने के लिए चीन ने कुछ नहीं किया, अमेरिकी राजनयिक ने खोली ड्रैगन की पोल

इस्लामाबाद

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन दक्षिण एशिया में एक और देश हैं, जो आर्थिक संकट से जूझ रहा है। यह देश है श्रीलंका। श्रीलंका के आर्थिक संकट ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राजनीतिक मामलों की अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी विक्टोरिया नूलैंड ने श्रीलंका का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन ने श्रीलंका को कर्ज की शर्तों में न के बराबर रियायत दी है। ये श्रीलंका के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अमेरिका श्रीलंका के लिए जल्द से जल्द एक IMF की डील चाहता है।

उन्होंने सबसे बड़े द्वीपक्षीय लेनदार होने के नाते चीन से विश्वसनीय और विशिष्ट आश्वासन देने का आह्वान किया, जो IMF की शर्तों के मानक से मेल खाता हो। उन्होंने कहा कि IMF का पैकेज श्रीलंका को उसके मौजूदा आर्थिक संकट से निकालने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका चाहता है कि इस संकट का समाधान हो। श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ समय से उथल-पुथल देख रही है। श्रीलंका 1948 में आजादी के बाद से अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

भारत ने की मदद
आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका की मदद को भारत आगे आया था। श्रीलंका दवा, ईंधन और खाद जैसी जरूरतों को पूरा कर सके, इसके लिए भारत ने 4 बिलियन डॉलर की सहायता भेजी थी। IMF से 2.9 बिलियन डॉलर का फंड पाने के लिए श्रीलंका को अपने लेनदारों से वित्तपोषण के आश्वासन की आवश्यक्ता है। अब तक भारत ही एकमात्र लेनदार रहा है, जिसने IMF के पैकेज के वित्तपोषण का आश्वासन दिया है। भारत की मदद दुनिया के लिए संकेत है कि वह श्रीलंका की सहायता के लिए आगे आए।

चीन से मदद की उम्मीद
नूलैंड की यात्रा दिखाता है कि अमेरिका उसे जल्द से जल्द आर्थिक संकट से निकालना चाहता है। क्योंकि श्रीलंका जितना आर्थिक रूप से कमजोर होगा उसके चीन की तरफ झुकने के अवसर बढ़ जाएंगे। अमेरिका को उम्मीद है कि चीन समेत अन्य देश श्रीलंका के समान वित्तपोषण का आश्वासन देंगे।

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