गुब्बारे से भारत की भी जासूसी कर रहा है चीन! आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

नई दिल्ली,

अमेरिका द्वारा चीन के जासूसी गुब्बारे को गिराए जाने के बाद अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने भारत, जापान आदि देशों को निशाना बनाते हुए कई जासूसी गुब्बारे संचालित किए है और इन देशों की सैन्य जानकारियां जुटाई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की सेना, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी उन देशों में निगरानी के लिए अपने जासूसी गुब्बारों का इस्तेमाल करती हैं जिनमें उसकी सामरिक रुचि होती है.

वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा, ‘गुब्बारे के जरिए दूसरे देशों पर निगरानी रखने का काम चीन के दक्षिण तट से दूर हैनान प्रांत से संचालित होता है. इसके जरिए चीन ने जापान, भारत, वियतनाम, ताइवान और फिलीपींस सहित कई उभरती सामरिक रुचि के देशों और क्षेत्रों की जासूसी की है. चीन इसके जरिए सैन्य जानकारियां जुटाता है.’ मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने रिपोर्ट में कहा कि इन जासूसी गुब्बारों को चीन की सेना संचालित करती है और पांच महादेशों में इन गुब्बारों को अब तक देखा गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट वेंडी शर्मन ने चीनी गुब्बारे को गिराए जाने की जानकारी 40 दूतावासों के 150 अधिकारियों को दी ताकि वो अपने सहयोगियों को संभावित खतरे के बारे में आगाह कर सकें. अमेरिका के अधिकारी कई देशों के साथ गुब्बारे से संबंधित जानकारी भी शेयर कर रहे हैं. जापान के साथ खासकर यह जानकारी शेयर की गई है जिसकी सैन्य क्षमताओं को चीन टार्गेट करता रहता है.

अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारे सहयोगियों और साझेदारों की इस जासूसी प्रकरण में बहुत रुचि है.’एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘चीन इन गुब्बारों में पुरानी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन उसकी यह पुरानी तकनीक आधुनिक संचार और अवलोकन क्षमताओं से लैस है जो दूसरे देशों की सैन्य खुफिया जानकारी जमा करने का एक बड़ा प्रयास है.

रिपोर्ट में एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी के हवाले से लिखा गया, ‘ये गुब्बारे चीनी गुब्बारों के बेड़े का हिस्सा हैं, जिन्हें निगरानी अभियान चलाने के लिए विकसित किया गया है. इन गुब्बारों ने दूसरे देशों की संप्रभुता का उल्लंघन किया है.’

पिछले हफ्ते चीन का एक गुब्बारा अमेरिकी वायुक्षेत्र में मंडराता दिखा था. अमेरिकी सेना ने उस पर कड़ी नजर रखी थी. तीन दिनों तक गुब्बारा अमेरिका के मोंटाना क्षेत्र में उड़ता रहा. मोंटाना में ही अमेरिका का एक न्यूक्लियर मिसाइल क्षेत्र है और अमेरिका को अंदेशा था कि गुब्बारा संवेदनशील क्षेत्र से गुजरते हुए जानकारी चीन तक पहुंचाएगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसे गिराने के आदेश दे दिए थे लेकिन तीन बसों के आकार के गुब्बारे से किसी को नुकसान न हो, इसलिए गुब्बारे के अटलांटिक महासागर के ऊपर आने का इंतजार किया गया. गुब्बारा शनिवार को समुद्री क्षेत्र में आया और राष्ट्रपति बाइडेन के आदेश पर अमेरिकी एयरफोर्स ने हाई टेक F-22 रैप्टर एयरक्राफ्ट की मदद से चीनी गुब्बारे को मार गिराया.चीन ने गुब्बारा गिराए जाने से पहले तो नरमी दिखाई थी लेकिन जब अमेरिका ने उसे मार गिराया और मलबा देने से इनकार कर दिया तो चीन भड़क गया.

चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा, ‘हम इस मामले की जांच कर रहे हैं. हमें इस बात का दुख है कि हमारे मौसम की जानकारी जमा करने वाले गुब्बारे को उड़ा दिया गया. ऐसा लगता है कि अमेरिका की मीडिया और उसके नेता इस मामले को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं. अमेरिका के गुब्बारे पर हमला अंतरराष्ट्रीय अभ्यास का उल्लंघन है.’

चीन का कहना था कि उसका मौसम की जानकारी जमा करने वाला गुब्बारा गलती से अमेरिकी एयरस्पेस में चला गया था. इस प्रकरण को लेकर अमेरिका-चीन के बीच तनाव चरम पर है. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इसी हफ्ते रिश्तों को सामान्य करने के लिए चीन जाने वाले थे लेकिन अब उनका यह दौरा रद्द कर दिया गया है. गुब्बारा गिराए जाने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कोशिश की थी कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की फोन पर बात हो, लेकिन चीन ने इस पेशकश को ठुकरा दिया था.

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