‘काउ हग डे’ का खूब मजाक उड़ा रहे विरोधी, लेकिन यह सच्चाई उन्हें शायद पता नहीं

नई दिल्ली

भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने 14 फरवरी को काउ हग डे मनाने का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद से ही देश में ‘काउ हग डे’ को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। कुछ लोगों ने जानवरों के प्रति प्रेम और स्नेह का भाव बनाए रखने के लिए इस प्रस्ताव का स्वागत किया। मगर वहीं दूसरी तरफ ‘काउ हग डे’ को लेकर सोशल मीडिया पर मजाक, मीम्स और कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। ‘काउ हग डे’ को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी लोगों को एक्सपर्ट्स की राय जरूर जाननी चाहिए, जिसमें बताया गया है कि जानवरों को लगे लगाने से इंसान को कितना फायदा होता है। गाय को गले लगाने के फायदे को लेकर वैश्विक स्तर पर कई रिसर्च सामने आ चुके हैं।

दुनिया में गायों से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ को दी गई मान्यता
मनोवैज्ञानिकों सहित कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि गाय से होने वाले स्वास्थ्य लाभ को आज दुनिया भर में मान्यता दी जा रही है। एक्सपर्ट्स कहते हैं पालतू जानवर हमेशा ही तनाव तनाव कम करने में आपकी मदद करते हैं। कुत्ते और बिल्लियों को पालतू जानवरों की इस श्रेणी में सबसे ऊपर रखा जाता है। इसके अलावा भी कई जानवरों के साथ इंसान का जुड़ाव उनके तनाव को कम करने में काफी मदद करता है। नीदरलैंड्स में गाय को गले लगाना एक आम बात है। डच भाषा में गाय को गले लगाने को ‘कोए नफेलेन’ कहा जाता है। इसे एक सदियों पुरानी प्रथा के तौर पर जाना जाता है, जो एक उपचार के तौर पर देखी जाती है।

जानवरों को गले लगाकर इंसानों का तनाव होता है कम
AIIMS के एक मनोचिकित्सक ने कहा, ‘इंसान का जानवरों को गले लगाना, इंसानों और जानवरों दोनों के लिए सांत्वना और आराम के तरीके के रूप में देखा जाता है। इसे पशु चिकित्सा के तौर पर देखा जाता है। जो लोग अपने जीवन में काफी अकेले हैं, वह जानवरों को गले लगाकर काफी सुखद अनुभव करते हैं। इससे उनका मानसिक तनाव कम होता है। मनोचिकित्सक ने कहा कि किसी पालतू जानवर को गले लगाकर लोग अपने तनाल को कम कर सकते हैं। मगर लोग लोग आमतौर पर गायों को गले लगाना पसंद करते हैं। दरअसल भारत में गायों का एक सांस्कृतिक महत्व है और इसे एक पवित्र पशु माना जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों के लिए काफी फायदेमंद
पशु चिकित्सक अभिषेक डाबर ने दावा किया कि पशु को गले लगाने से हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को मदद मिली है। हालांकि केवल गायों को ही गले नहीं लगाया जा सकता है। यह कोई भी जानवर हो सकता है जो आपको कोमलता का अनुभव प्रदान करें। इस कैटेगिरी में कुत्ता या घोड़े को भी रखा जा सकता है। डॉ. डाबर ने कहा, गले लगाने से विचलित मन को शांत होने में मदद मिलती है। हालांकि त्वचा से त्वचा मिलने में कोई औषधीय गुण ट्रांसफर नहीं होता है।’ डॉ. डाबर ने कहा कि गाय शांत होती हैं, आसानी से इंसानों से परिचित होकर शारीरिक संपर्क की अनुमति देती हैं। घोड़े गायों से भी अधिक शांत होते हैं, लेकिन वे आसानी से मित्र नहीं बन सकते। यही बात डॉग्स के लिए लागू होती है।

वैदिक युग से है यह प्रथा
मवेशी कल्याण के लिए काम करने वाली आध्यात्मिक और धर्मार्थ संस्था ध्यान फाउंडेशन का कहना है कि गाय को गले लगाना कोई नए जमाने की एक्टिविटी नहीं है। इसकी उत्पत्ति वैदिक युग में हुई है। फाउंडेशन के अश्विनी गुरुजी ने दावा किया है कि एक गाय एक अत्यधिक विकसित और संवेदनशील प्राणी है और वेदों में उसे धेनु कहा गया है।’ उन्होंने बताया कि कबीर के बारे में कहा जाता है कि उन्हें अपनी काव्य क्षमता तब मिली जब एक गाय ने उनके माथे को चाटा। गाय क्वांटम स्तर पर एक उच्च चेतना से उलझी हुई है और इसका मनुष्यों पर कर्म प्रभाव है। उन्होंने कहा कि लगभग सभी विश्व धर्मों और संस्कृतियों ने गाय से जुड़े लाभों की बात की है।

मिल रहा है जबरदस्त फायदा
इस बीच दक्षिण दिल्ली के छतरपुर में ध्यान फाउंडेशन के आश्रम में आने वाले कुछ लोग गायों से मिले चिकित्सीय लाभ मिलने का दावा कर रहे हैं। ऐसे लोगों ने हमारे सहयोगी टीओआई के साथ अपने अनुभव को साझा किया है। अमेरिकी गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. रमेश गुप्ता ने कहा, ‘शुरुआत में मैं गाय को गले लगाने से हिचक रहा था। लेकिन जब मैंने गले लगाना शुरू किया तो मेरी कई चिकित्सीय परेशानियां गायब हो गईं। मेरे पास कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि यह कैसे हुआ।’ केरल के लक्ष्मी अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रसन प्रभाकर ने भी इसी तरह दावा किया है। उन्होंने कहा, ‘मैंने भावनात्मक रूप से परेशान और उच्च रक्तचाप वाले रोगियों के साथ कई प्रयोग किए। गाय को गले लगाने से उन सभी को फायदा हुआ, जिससे यह साबित होता है कि यह 100% विज्ञान है।’

क्या है पूरा मामला
भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने एक नोटिस जारी कर लोगों से 14 फरवरी को ‘काउ हग डे’ मनाने की अपील की है। गौरतलब है कि हर साल 14 फरवरी को ‘वैलेंटाइन डे’ मनाया जाता है। पशुपालन और डेयरी विभाग के तहत आने वाले बोर्ड द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है, ‘सभी गाय प्रेमी गौ माता की महत्ता को ध्यान में रखते हुए तथा जिंदगी को खुशनुमा और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाने के लिए 14 फरवरी को काउ हग डे मना सकते हैं।’ नोटिस में कहा गया है कि गायों को गले लगाने से भावनात्मक संपन्नता आएगी और सामूहिक प्रसन्नता बढ़ेगी। इसमें यह भी कहा गया है कि वैदिक परंपराएं पश्चिमी संस्कृति की प्रगति के कारण लगभग विलुप्त होने के कगार पर हैं और पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध ने हमारी भौतिक संस्कृति और विरासत को लगभग भुला दिया है। अधिकारियों ने बताया कि सक्षम प्राधिकरण की स्वीकृति से नोटिस जारी किया गया है।

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