ख्याल रहे, जो हमें चाहिए वो पूरा होता रहे, कॉलेजियम की सिफारिशों पर SC की सरकार को दो टूक

नई दिल्ली

कॉलेजियम की सिफारिशों को लटकाने के मामले में केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से नसीहत दी है। अदालत ने सरकार से तल्ख लहजे में कहा कि ख्याल रहे कि जो हमें चाहिए वो पूरा होता रहे। अदालत एक अवमानना याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें बेंगलुरु बार एसोसिएशन ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक अवमानना याचिका दायर की थी। इसमें कॉलेजियम की सिफारिशों को लागू करने में हो रही देरी का जिक्र था।

जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच के सामने ये तथ्य लाया गया कि सरकार कुछ सिफारिशों को तुरंत लागू कर देती है जबकि कुछ सिफारिशों को रोक लिया जाता है। इस पर तीन जजों की बेंच ने सरकार को सख्त नसीहत दी। सॉलिसिटर जनरल सुनवाई के दौरान आज अदालत में पेश नहीं हो सके थे।

कोर्ट बोली- पिछली सुनवाई के बाद कुछ सुधार
हालांकि बेंच ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि पिछली बार की सुनवाई के बाद कुछ सुधार तो देखने को मिला है। सुप्रीम कोर्ट के जजों, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों और जजों की कई नियुक्तियों को केंद्र ने हरी झंडी दे दी है। लेकिन एडवोकेट अरविंद दतार और उनका सहयोग कर रहे अमित पाई ने बेंच को बताया कि कुछ नियुक्तियों को केंद्र ने तुरंत अप्रूव कर दिया अलबत्ता कुछ को केंद्र अभी तक रोके बैठा है।

केरल हाईकोर्ट के जस्टिस के विनोद चंद्रन का जिक्र
अरविंद दतार ने एक चार्ट के जरिये बेंच को बताया कि केरल हाईकोर्ट के जस्टिस के विनोद चंद्रन के मामले में अभी तक केंद्र की अप्रूवल का इंतजार हो रहा है। उन्हें पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाना है। कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश उसी दिन की थी जिस दिन जस्टिस संदीप मेहता को गुवाहाटी हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई थी। मेहता के नाम पर केंद्र ने तुरंत अप्रूवल दे दी। विनोद का मामला पेंडिंग है।

जस्टिस संजय किशन कौल का कहना था कि जिन मामलों में राज्य सरकार की सहमति तुरंत मिल गई उन पर केंद्र ने जल्दी अप्रूवल जारी कर दी। इस पर अरविंद दतार का कहना था कि फिर तो जो सिफारिशें लंबित हैं उन सभी को राज्य सरकार की सहमति से जोड़कर देखा जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद रखी गई है। इस दौरान एडवोकेट प्रशांत भूषण ने भी कोर्ट का ध्यान कुछ मुद्दों की तरफ खींचा।

सुप्रीम कोर्ट ने कानून मंत्री को लिया था आड़े हाथ
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीखी फटकार लगाई थी। कोर्ट का कहना था कि सरकार जिस तरह से कॉलेजियम की सिफारिशों को रोककर बैठ जाती है वो स्वीकार नहीं होगा। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई थी कि कानून मंत्री किरण रिजिजू कॉलेजियम और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।

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