इंदिरा गांधी और फिरोज की वो लव स्टोरी, जिसने बदल डाला भारतीय राजनीति का इतिहास

नई दिल्ली,

बात उस दौर की है जब फिरोज कॉलेज में पढ़ते हुए स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा थे और इंदिरा स्कूल में पढ़ रही थीं. साल 1930 में आजादी की लड़ाई में इंदिरा नेहरू की मां कमला नेहरू एक कॉलेज के सामने धरना देने के दौरान बेहोश हो गई थीं. तब फिरोज ने न सिर्फ उन्हें संभाला-देखभाल की बल्कि उनकी तबियत पूछने आनंद भवन (नेहरू परिवार का घर) जाने लगे. वहीं इंदिरा और फिरोज की मुलाकात हुई. तभी से फिरोज का नेहरू परिवार के घर आना-जाना शुरू हुआ था.

इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू और फिरोज की लव स्टोरी को शादी तक पहुंचने में कई मुश्किलों से गुजरना पड़ा था जिसमें कई साल लगे. पंडित जवाहर लाल नेहरू शादी के खिलाफ थे, दोनों के धर्म अलग और उम्र में बड़ा फांसला… कई अड़चनें आईं लेकिन आखिर में इंदिरा नेहरू को फिरोज मिले और फिरोज को इंदिरा के साथ ‘गांधी’ सरनेम भी मिला. इंदिरा ‘गांधी’ हो गईं और राजनीति में गांधी परिवार का नाम.

इंदिरा-फिरोज की लव स्टोरी में ‘विलेन’ थीं ये बातें
इंदिरा और फिरोज के लव स्टोरी में कई अड़चनें थीं. इनमें सबसे बड़ी दोनों का अलग-अलग धर्म से होना था. इंदिरा, हिंदू पंडित परिवार से थीं और फिरोज एक पारसी परिवार थे. उनके पिता का नाम जहांगीर और मां का नाम रतिबाई था. दूसरी दोनों की उम्र में बड़ा फांसला, उस वक्त इंदिरा की उम्र 16 साल थी तो फिरोज 21 साल के थे. तीसरा फिरोज और जवाहरलाल नेहरू की विचारधारा अलग होना था. फिरोज, अक्सर जवाहरलाल नेहरू की नीतियों के खिलाफ लिखते थे.

फिरोज को मिला ‘गांधी’ सरनेम
जब इंदिरा और फिरोज की प्रेम कहानी की चर्चा होने लगी तो नेहरू परिवार इससे नाखुश था. जवाहरलाल नेहरू इससे परेशान रहने लगे. उन्होंने इसपर महात्मा गांधी से राय मांगी. तब महात्मा गांधी ने फिरोज को अपना सरनेम ‘गांधी’ दिया और इस तरह 26 मार्च 1942 में इंदिरा ‘गांधी’ बन गईं. हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की शादी हुई. जवाहर लाल नेहरू ने फिरोज गांधी को नेशनल हेराल्ड मैनेजिंग डायरेक्टर बना कर लखनऊ भेज दिया. नेशनल हेराल्ड का दफ्तर लखनऊ के कैसरबाग में था.

बता दें कि इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर, 1917 को इलाहाबाद में हुआ था. उन्होंने लगातार तीन कार्यकाल (1966-77) तक सेवा की और चौथे कार्यकाल में 1980 से 1984 में उनकी हत्या होने तक देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला. 31 अक्‍टूबर 1984 को नई दिल्ली में इंदिरा गांधी के ही दो सिख अंगरक्षकों ने उनपर गोलियों की बौछार कर दी. उनकी हत्या को 1 से 8 जून 1984 को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में चले ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला कहा गया. इंदिरा गांधी की मौत के बाद उनके बेटे राजीव गांधी प्रधानमंत्री के रूप में उनके उत्तराधिकारी बने जो 1989 तक पद पर रहे.

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