राम प्रतिमा के लिए लाई जाएंगी और शिलाएं, राम मंदिर के गर्भगृह का निर्माण जोरों पर

अयोध्‍या

राम मंदिर के गर्भगृह और गृहमंडप के पिलर्स का निर्माण लगभग 17 फुट ऊंचाई तक पहुंच गया है। अब इसके बाद बीम रखने का काम होगा। मंदिर के बाकी 150 पिलर्स की उंचाई 5 फुट से लेकर 14-15 फुट उंचाई तक पहुंची हैं। श्रीराम जन्‍मभूमि तीर्थ ट्रस्‍ट के सदस्‍य डॉक्टर अनिल मिश्र के मुताबिक जब सभी पिलर्स की उंचाई 19 फुट तक पहुंच जाएगी। तब एक साथ बीम का काम शुरू होगा। इसलिए गर्भगृह के बाद दर्शन हाल गृह मंडप का काम पहले पूरा करके अब बाकी का काम भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। उन्‍होंने बताया कि गर्भ गृह का संगमरमर का चौखट स्‍थापित किया जा चुका है । अब एक साथ कई निर्माण कार्य को पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

अयोध्या में निर्माणाधीन मंदिर के लिए भगवान राम की मूर्ति को तराशने के लिए और चट्टानों को लाए जाने की संभावना है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सचिव चंपत राय ने कहा, हम चट्टानों का तकनीकी अध्ययन करेंगे ताकि यह जांचा जा सके कि परिवहन के दौरान इन्हें कोई नुकसान, मलिनकरण या डेंट नहीं हुआ है। यदि ऐसा है, तो ये चट्टानें किसी काम की नहीं होंगी। हम जल्द ही इस उद्देश्य के लिए इसी तरह की तीन और चट्टानें ला रहे हैं।

परकोटा की नींव भराई का काम चल रहा है। इसकी दीवार का निर्माण भी केवल भी पूर्व और पश्चिम दिशा में पहले शुरू होगा। 14 फुट चौड़ा और 800 मीटर लंबा परिक्रमा मार्ग भी परकोटा के इलाके में बनेगा। परकोटा के क्षेत्र में निर्माण सामाग्री की लाने और ले जाने के लिए जगह छोड़ कर बाकी का निर्माण भी नींव का काम पूरा होने के बाद शुरू हो जाएगा।

यात्री सुविधा केंद्र के नींव का काम प्रगति पर
डॉक्टर मिश्र के मुताबिक 25 हजार श्रद्धालुओं के लिए बनने वाले फेसिलिटी सेंटर की नींव का निर्माण किया जा रहा है। इसे बेस मेंट के साथ दो और मंजिल का बनाया जाएगा। बेसमेंट में मिनी चिकित्‍सालय के साथ ट्रस्‍ट के अन्‍य सुविधाओं को मुहैया करवाने वाले सामान और गार्ड आदि के लिए स्‍थान दिया जाएगा। जबकि पहली मंजिल पर बड़ा हाल बनेगा, जिसमें श्रद्धालुओं के अल्‍प विश्राम के लिए बैठने की व्‍यवस्‍था रहेगी, जबकि दूसरी मंजिल पर उनके सामान आदि को रखने की व्‍यवस्‍था रहेगी, जिसे वह दर्शन के समय रख सकेंगे।

पावर स्‍टेशन का निर्माण शुरू
उन्होंने बताया कि 33/11 केवीए का पॉवर स्‍टेशन का निर्माण भी चल रहा है। यहां नींव फाउंडेशन ट्रांसफार्मर जनरेटर रूम स्विच बोर्ड आदि का निर्माण होगा। इसके अलावा मंदिर परिसर को 4 जोन में बांट कर विकेंद्रीकृत पावर सप्‍लाई देने के लिए अलग अलग 4 पावर सबस्‍टेशन भी बनेंगे।

उच्‍च स्‍तरीय शौचालय का निर्माण शुरू
डॉक्टर मिश्र के मुताबिक मंदिर परिसर श्रद्धालुओं को प्रसाधन सुविधा उपलब्‍ध करने के लिए परिसर के पश्चिम दक्षिणी कोने पर उच्‍च स्‍तरीय शौचालय का भी निर्माण शुरू हो गया है। इससे दर्शन करने के बाद लौटते वाले मार्ग पर श्रद्धालु इसका लाभ उठा सकें।

शालिग्राम शिलाओं का विशेषज्ञों से परीक्षण के बाद रामलला की प्रतिमा का निर्माण मदिर ट्रस्‍ट की बैठक में तय होगा। ये शिलाएं रामसेवकपुरम में सुरक्षा में रखी है, जहां रोजाना देश के कोने कोने से बड़ी संख्‍या में अयोध्‍या आने वाले लोग इसके दर्शन पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट ने कहा कि वे इस उद्देश्य के लिए अलग-अलग जगहों से इसी तरह की तीन और शिलाएं लाएंगे। राय ने कहा, अयोध्या में शालिग्राम शिलाओं को भेजना नेपाल के संतों का निर्णय था। इन शिलाओं को राम जन्मभूमि के परिसर के अंदर नहीं ले जाया गया है और विश्व हिंदू परिषद के एक स्थल राम सेवक पुरम में रखा गया है।

इससे पहले, ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा था कि वीएचपी के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल, इसके राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र सिंह पंकज के नेतृत्व में, 25 जनवरी को नेपाल के मस्तंग जिले से रवाना हुए शिलाओं के साथ आया था और 2 फरवरी की देर रात अयोध्या पहुंचा था, जिसने छह दिनों में 350 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की। राम के बाल-रूप की मूर्ति अगले साल जनवरी में मकर संक्रांति तक तैयार होने की उम्मीद थी।

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