भारत ने कोरोना में बचाए 34 लाख जीवन, वैक्सीनेशन बना सबसे बड़ा हथियार, विदेशी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में दावा

नई दिल्ली

कोरोना काल की पहली और दूसरी लहर अभी भारत भूला नहीं है। इस महामारी की दौरान लाखों लोगों अबतक अपनी जान गंवा चुके हैं। साल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हमारे देश ने बहुत खराब समय भी देखा। हालांकि जिस तरह से भारत सरकार ने कोरोना के खिलाफ अभियान छेड़ा उसकी दुनियाभर में तारीफ हुई है।

अब स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में भी भारत सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने अभूतपूर्व तरीके से कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाकर 34 लाख से ज्यादा लोगों की जान बचाई है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत के कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम ने 18.3 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान होने से भी बचाया है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस के ‘हीलिंग द इकोनॉमी: एस्टिमेटिंग द इकोनॉमिक इम्पैक्ट ऑन इंडियाज वैक्सीनेशन एंड रिलेटेड इश्यूज’ टाइटल वाले वर्किंग पेपर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने रिलीज किया। इस पेपर में भारत पर लॉकडाउन के इम्पैक्ट के बारे में भी बतया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 11अप्रैल 2020 तक भारत में कोरोना मामलों की संख्या सिर्फ 7500 तक ही पहुंची। लॉकडाउन लगाकर भारत ने करीब 20 लाख लोगों की जान बचाई।

रिपोर्ट में आर्थिक सर्वेक्षण (2020-21) के हवाले से कहा गया है कि लॉकडाउन (मार्च-अप्रैल) की वजह से 100,000 लोगों की जान बचाई गई थी। अगर देश में लॉकडाउन न लगाया गया होता तो 11 अप्रैल 2020 तक कोरोना मामलों की संख्या 200,000 तक होती। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली लहर में पीक पर पहुंचे में भारत ने 175 दिन लिए जबकि रूस, कनाडा, फ्रांस, इटली और जर्मनी में सिर्फ 50 दिनों में कोविड मामले पीक पर पहुंच गए।

इस रिपोर्ट में कोरोना के फैलने की स्पीड को कम करने को लेकर किए गए उपायों की भी चर्चा की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीनी स्तर पर मजबूत उपाय, जैसे कांटेक्ट ट्रेसिंग, मास टेस्टिंग, होम क्वारंटाइन, जरूरी मेडिकल उपकरणों का वितरण, स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे में सुधार और केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर स्टेक होल्डर्स के बीच निरंतर समन्वय ने न सिर्फ वायरस के प्रसार को रोकने में मदद की है।

रिसर्च पेपर में भारत के उपायों- कंटेनमेंट, रिलीफ पैकेज और वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन की भी चर्चा की गई है। इसमें आगे कहा गया है कि भारत ने प्रभावी वैक्सीनेशन ड्राइव की वजह से 34 लाख से ज्यादा लोगों की जान बचाई है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि वैक्सीनेशन के लाभ इसकी कॉस्ट से अधिक हैं। इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि वैक्सीनेशन को सिर्फ हेल्थ इंटरवेंशन के अलावा माइक्रो इकोनॉमिक स्टेबिलाइजिंग इंडिकेटर माना जाना चाहिए।

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