परिवार के अंदर बच्चों का यौनशोषण माफ न करने वाला अपराध : जस्टिस हिमा कोहली

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस हिमा कोहली ने शनिवार को कहा कि परिवार के अंदर बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं बच्चे के विश्वास का निंदनीय हनन और पारिवारिक तानेबाने के साथ अक्षम्य अपराध है। जस्टिस कोहली ने कहा कि इस तरह के पीड़ित बच्चों को पूरी तरह समर्थन की और उन्हें समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के शोषण का पीड़ित पर लंबे समय तक असर रहता है और दुर्भाग्य की बात है कि कई बार परिवार के सम्मान के नाम पर इस तरह की घटनाओं को दबा दिया जाता है।

वह दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग की तरफ से आयोजित समारोह में पत्रिका ‘चिल्ड्रन फर्स्ट’ के तीसरे संस्करण के जारी होने के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। जस्टिस कोहली ने कहा कि सभी पक्षों के लिए जरूरी है कि बच्चों की बेहतरी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने के लिहाज से हाथ मिलाएं। उन्होंने कहा कि परिवार के अंदर बच्चों का यौन उत्पीड़न संवेदनशील विषय है जिसे कई बार दबाया जाता है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान सुप्रीम कोर्ट ओर कई हाई कोर्ट ने बच्चों के हितों की सुरक्षा के लिए अनेक निर्देश जारी किए थे। जस्टिस कोहली ने कहा कि चाइल्ड एब्यूज कई तरीकों से जाहिर होता है जैसे बाल विवाह, बाल श्रम, यौन हिंसा, घरेलू हिंसा, तस्करी, शिक्षा से वंचित रखना और स्वास्थ्य पर पोषण से वंचित रखना।

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