‘धीरेंद्र शास्त्री को मैं नहीं जानता’… बागेश्वर धाम सरकार से राम कथावाचक मोरारी बापू ने क्यों बनाई दूरी?

अहमदाबाद

पिछले कुछ समय से बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री लगातार सुर्खियों में हैं। इसकी वजह है कि उनसे जुड़े और उनके बयान। धीरेंद्र शास्त्री खुलेतौर पर भारत के हिंदू राष्ट्र होने को जरूरी बता रह हैं तो भारत-पाकिस्तान के विलय से लेकर तमाम मुद्दों पर बेबाक बोल रहे हैं। इसके चलते उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। उनके लगातार बड़े कार्यक्रम भी हो रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने लोकदरबार कार्यक्रम में रामकथाकार मोरारी बापू के बारे में कहा था कि वह युग तुलसी हैं, हालांकि राजकोट में जब मीडिया ने मोरारी बापू से धीरेंद्र शास्त्री का जिक्र किया तो उन्होंने दूरी बना ली।

राजकोट में मीडिया ने पूछा कि बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने आपको युग तुलसी करार दिया है तो मोरारी बापू ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को नहीं जानते हैं उनका ठीक से परिचय नहीं है। मोरारी बापू का ये बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। अटकलें लग रही है कि मीडिया में छाए धीरेंद्र शास्त्री बापू ने जानबूझकर किनारा किया या फिर वे वाकई में इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलना चाहते थे।

बापू को बुंदेलखंड बुलाया था
जानकारी के अनुसार धीरेंद्र शास्त्री ने करीब नौ महीने पहले मोरारी बापू की राम कथा में शिरकत की थी और संबोधन भी दिया था। कहानी में धीरेंद्र शास्त्री ने मोरारी बापू को युग तुलसी, वर्तमान तुलसी कहकर संबोधित किया। व्यास ने भी पीठ के पास खड़े होकर कथा में अपना भाषण दिया। बुंदेलखंड में चल रही कथा में मोरारी बापू को धीरेंद्र शास्त्री ने बागेश्वर धाम हनुमानजी महाराज के दर्शन के लिए आमंत्रित किया था। मोरारी बापू राजकोट में पत्रकारिता भवन के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित थे। उस वक्त पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए जब धीरेंद्र शास्त्री से उनके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं उनके बारे में ज्यादा नहीं जानता।

बालाजी कृपा का दावा
धीरेंद्र शास्त्री भी सभाओं में भूतों को ठीक करने का दावा करते हैं। वे मंच से उड़ जाते हैं और इकट्ठी भीड़ से चीखें सुनाई देती हैं। पुरुष और महिलाएं भीड़ से खड़े होकर चिल्लाते हैं। धीरेंद्र कहते हैं, इनको और मारो, जंजीरों में जकड़ दो। धीरेंद्र बार-बार कहते हैं कि हम चमत्कार नहीं करते। यह बालाजी की कृपा है। वे वही करते हैं जो वे करते हैं। हम कुछ नहीं कहते, बालाजी करते हैं। धीरेंद्र शास्त्री न केवल भक्तों की समस्या के बारे में बात करते हैं, बल्कि कश्मीर फाइल्स, पठान जैसी फिल्मों से लेकर हिंदू राष्ट्र और सनातन धर्म के मुद्दे पर मुखरता से बात रखते हैं।

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